स्वतंत्रता-पूर्व भारत की जनगणना

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भारतीय साम्राज्य की 1901 की जनगणना में जिले द्वारा प्रचलित धर्म।

भारत की स्वतंत्रता के पहले १८६५ से लेकर १९४७ तक समय-समय पर भारत की जनगणना करायी जाती रही। जनगणना का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक लाभ प्राप्त करना था। जनसंख्या में अनेकों समस्याएँ आतीं थीं। परन्तु इन जनगणनाओं का मुख्य उद्देश्य भारतीय समाज में अच्छी तरह से समझना एवं इस समझ का भारत को गुलाम बनाए रखने के लिए उपायोग करना था, न कि पूरे जनसमुदाय के आन्तरिक संरचना को समझना था। 1911 और 1921 के बीच का दशक एकमात्र जनगणना काल था जिसमें भारत की आबादी गिर गई थी, जो ज्यादातर स्पैनिश फ्लू महामारी के कारण हुई थी।[1][2]

स्वतंत्रता-पूर्व भारत की जनगणना (1901–1941)[3]
Year Population
1901 238,396,327
1911 252,093,390
1921 251,321,213
1931 278,977,238
1941 318,660,580

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Why 1918 matters in India's corona war". मूल से 18 अप्रैल 2020 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 7 जून 2020.
  2. "What the history of pandemics tells us about coronavirus". मूल से 21 अप्रैल 2020 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 7 जून 2020.
  3. "Variation in Population since 1901". मूल से 25 नवंबर 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 7 जून 2020.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]