स्वच्छ कक्ष
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स्वच्छ कक्ष (अंग्रेज़ी: Cleanroom) एक अभियांत्रिकीय रूप से निर्मित ऐसा कक्ष होता है जिसमें वायुमंडलीय कणों की सघनता अत्यंत कम स्तर पर बनाए रखी जाती है। यह कक्ष बाहरी प्रदूषण से भलीभांति पृथक, नियंत्रित तथा स्वचालित रूप से स्वच्छ बनाए रखा जाता है। ऐसे कक्षों की आवश्यकता प्रायः वैज्ञानिक अनुसंधान तथा औद्योगिक उत्पादन में होती है, विशेषकर नैनो स्तर की प्रक्रियाओं जैसे कि अर्धचालक युक्तियों के निर्माण में। स्वच्छ कक्ष को इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि धूल, वायुकण, सूक्ष्मजीवों से लेकर वाष्पित कणों तक सभी प्रकार की अशुद्धियाँ उससे बाहर ही रहें, जिससे भीतर संभाले जा रहे किसी भी पदार्थ की शुद्धता बनी रहे।
कुछ परिस्थितियों में, स्वच्छ कक्ष का उद्देश्य भीतर से पदार्थों का बाहर निकलना रोकना भी होता है। यह विशेष रूप से संकटपूर्ण जैविक अनुसंधान, नाभिकीय कार्य, औषध निर्माण, तथा वायरोलॉजी (विषाणु विज्ञान) के क्षेत्र में आवश्यक होता है।
स्वच्छ कक्ष में स्वच्छता का स्तर प्रायः प्रति घन मीटर कणों की संख्या द्वारा मापा जाता है, जो किसी पूर्व निर्धारित आणविक आकार पर आधारित होता है। एक सामान्य नगरीय क्षेत्र की बाहरी वायु में ०.५ माइक्रोन या उससे बड़े आकार के कणों की संख्या लगभग ३,५०,००,००० प्रति घन मीटर होती है, जो आईएसओ ९ प्रमाणित स्वच्छ कक्ष के समकक्ष मानी जाती है।
इसके विपरीत, आईएसओ १४६४४-१ स्तर १ प्रमाणित स्वच्छ कक्ष में ०.५ माइक्रोन आकार के कण एक भी नहीं पाए जाने चाहिए, तथा ०.३ माइक्रोन या उससे छोटे कणों की संख्या अधिकतम १२ प्रति घन मीटर होनी चाहिए।
अर्धचालक निर्माण संयंत्रों में प्रायः स्तर ७ अथवा स्तर ५ के स्वच्छ कक्ष प्रयुक्त होते हैं, जबकि स्तर १ के स्वच्छ कक्ष अत्यंत दुर्लभ होते हैं।
इतिहास
[संपादित करें]आधुनिक स्वच्छ कक्ष का आविष्कार अमेरिकी भौतिक विज्ञानी विलिस व्हिटफील्ड ने किया था।[1]
यह भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ यार्डली, विलियम (2012-12-04). "Willis Whitfield, Clean Room Inventor, Dies at 92". The New York Times. मूल से से 5 दिसंबर 2012 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2013-06-22.