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स्प्रिंट

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स्प्रिंट (दौड़)
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विशेषताएँ
उपकरण ट्रैक स्पाइक्स, स्टार्टिंग ब्लॉक्स
स्थल सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक
ओलंपिक 1896 (आधुनिक ओलंपिक की शुरुआत से)

स्प्रिंट (अंग्रेज़ी: Sprint) या तेज दौड़, एथलेटिक्स और ट्रैक एंड फील्ड की एक प्रमुख प्रतिस्पर्धा है, जिसमें एथलीट को एक बहुत ही कम दूरी को अपनी अधिकतम संभव गति के साथ तय करना होता है। ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में मुख्य रूप से तीन स्प्रिंट स्पर्धाएं होती हैं: 100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर। स्प्रिंटिंग केवल दौड़ना नहीं है, बल्कि यह भौतिकी और मानव शरीर विज्ञान का एक जटिल तालमेल है, जहाँ जीत और हार का फैसला एक सेकंड के सौवें हिस्से से होता है।[1][2]

एक आदर्श स्प्रिंट—विशेष रूप से 100 मीटर की दौड़—को खेल वैज्ञानिकों द्वारा चार मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है:

  1. प्रतिक्रिया और शुरुआत: धावक 'स्टार्टिंग ब्लॉक्स' का उपयोग करते हैं। बंदूक की आवाज़ सुनते ही तंत्रिका तंत्र मांसपेशियों को संकेत भेजता है। एथलीट ब्लॉक को पीछे की ओर धकेलकर आगे की ओर विस्फोटक गति उत्पन्न करता है। 0.100 सेकंड से कम का प्रतिक्रिया समय 'फाल्स स्टार्ट' माना जाता है।
  2. त्वरण: शुरुआत के बाद के 30 से 40 मीटर तक धावक का शरीर आगे की ओर झुका होता है। इस चरण में धावक अपनी अधिकतम गति प्राप्त करने के लिए प्रत्येक कदम के साथ बल बढ़ाता है।
  3. अधिकतम वेग: 40 से 60 मीटर के बीच, शीर्ष एथलीट (जैसे उसैन बोल्ट) अपनी अधिकतम गति (लगभग 44 किमी/घंटा) तक पहुँच जाते हैं। यहाँ शरीर सीधा हो जाता है और कदम की लंबाई अधिकतम हो जाती है।
  4. मंदी: 60 से 80 मीटर के बाद, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की थकान और ऊर्जा की कमी के कारण धावक की गति अनिवार्य रूप से कम होने लगती है। सबसे अच्छा स्प्रिंटर वह नहीं है जो अंत में गति बढ़ाता है, बल्कि वह है जो सबसे कम गति खोता है।[3]

स्प्रिंटिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से अवायवीय गतिविधि है। इसका अर्थ है कि दौड़ के दौरान मांसपेशियां ऑक्सीजन का उपयोग करके ऊर्जा नहीं बनाती हैं।

  • स्प्रिंटर्स ऊर्जा के लिए शरीर में पहले से जमा ATP-CP प्रणाली (एडेनोसाइन ट्राइफॉस्फेट - क्रिएटिन फॉस्फेट) और 'ग्लाइकोलाइसिस' पर निर्भर करते हैं। यह ऊर्जा प्रणाली बहुत शक्तिशाली होती है लेकिन यह केवल 10 से 40 सेकंड तक ही टिक सकती है।
  • महान स्प्रिंटर्स के पैरों में आनुवंशिक रूप से फास्ट-ट्विच मांसपेशी फाइबर का अनुपात बहुत अधिक होता है। ये फाइबर मैराथन धावकों (स्लो-ट्विच फाइबर) के विपरीत, बहुत तेज़ी से सिकुड़ते हैं और विस्फोटक शक्ति पैदा करते हैं।[4]

उपकरण और तकनीक

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  • स्पाइक्स: स्प्रिंटर्स बहुत हल्के जूते पहनते हैं जिनके आगे के हिस्से में नुकीले कील लगे होते हैं। स्प्रिंट के दौरान धावक की एड़ी कभी ट्रैक को नहीं छूती; वे केवल पंजों पर दौड़ते हैं।
  • एयरोडायनामिक्स: हवा के प्रतिरोध को कम करने के लिए धावक त्वचा से चिपके हुए 'लाइक्रा' या स्पैन्डेक्स सूट पहनते हैं।[5]

ऐतिहासिक रिकॉर्ड

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जमैका के उसैन बोल्ट को इतिहास का सबसे महान स्प्रिंटर माना जाता है, जिनके नाम 100 मीटर (9.58 सेकंड) और 200 मीटर (19.19 सेकंड) के विश्व रिकॉर्ड दर्ज हैं। महिलाओं में यह रिकॉर्ड अमेरिकी धाविका फ्लोरेंस ग्रिफिथ-जॉयनर (10.49 सेकंड) के नाम है।[6][7]

सन्दर्भ

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  1. ↑ Schmolinsky, Gerhardt (1992). Track and Field: The East German Textbook of Athletics. Sports Books Publisher. pp. 112–120. ISBN 978-0920905470.
  2. ↑ "A Brief History of Track and Field in the US"
  3. ↑ Mero, Antti; Komi, Paavo V.; Gregor, Robert J. (1992). "Biomechanics of Sprint Running: A Review". Sports Medicine. 13 (6): 376–392. डीओआई:10.2165/00007256-199213060-00002.
  4. ↑ Haff, G. Gregory; Triplett, N. Travis (2015). Essentials of Strength Training and Conditioning (4th ed.). Human Kinetics. pp. 510-518. ISBN 978-1492501626.
  5. ↑ Smith, L. C. (2000). Biomechanics of Track and Field Athletics. Routledge. pp. 88–95. ISBN 978-0415254069.
  6. ↑ "World Athletics: Official World Records". World Athletics. अभिगमन तिथि: 27 जून 2026.
  7. ↑ Hawaiian Antiquities[मृत कड़ियाँ]

बाहरी कड़ियाँ

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