स्पेन का स्वतंत्रता संग्राम

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०२ मई १८०८ : फ्रांसिस्को डी गोया द्वारा १८१४ में चित्रित 'The Charge of the Mamelukes'

नेपोलियन बोनापार्ट के साम्राज्य तथा स्पेन, ब्रिटेन और पुर्तगाल की सम्मिलित सेनाओं के बीच हुआ युद्ध स्पेन का स्वतंत्रता संग्राम (स्पेनी भाषा:Guerra de la Independencia Española) या प्रायद्वीपीय युद्ध (Peninsular War) (1807–1814) कहलाता है।

स्पेन ने समय-समय पर फ्रांस को सहायता दी थी। इस समय स्पेन का शासक चार्ल्स चतुर्थ था किन्तु उसके निष्क्रिय शासन के स्थान पर जनमत उसके पुत्र राजकुमार फर्डिनेण्ड को शासक बनान चाहती थी। अतः चार्ल्स ने फर्डिनेण्ड के पक्ष में पद त्याग दिया। इसी समय नेपोलियन ने फर्डिनेण्ड को एक तरह से नजरबन्द कर अपने भाई नेपल्स के राजा जोजफ को स्पेन का राजा बनाया (1808) और नेपल्स अपने बहनोई म्यूरा को दे दिया। वस्तुतः पुर्तगाल में फ्रांस व स्पेन के संयुक्त अभियान के कारण नेपोलियन को फ्रांसीसी सेनाएँ स्पेन में भेजने का अवसर मिल गया और मौका देख उसने स्पने पर अधिकार कर लिया।

नेपोलियन के इस कदम से स्पेनिश जनता अपमानित महसूस कर रही थी। स्पेनवासियों में राष्ट्रीय भावना का संचार हुआ और पूरा राष्ट्र नेपोलियन के विरूद्ध उठ खड़ा हुआ। जगह-जगह प्रबंध समितियाँ स्थापित की जाने लगी, 'पोप के शत्रु' के विनाश का अच्छा अवसर देखते हुए कैथोलिक पादरियों ने लोगों को उकसाना शुरू किया। Zunta नामक संगठन ने गुरिल्ला पद्धति से लड़ने के लिए लोगों को प्रशिक्षित करना आरंभ कर दिया। स्पेन की जनता की नजर में नेपोलियन राष्ट्रीय एकता का संहारक और राजमुकुट का विनाशक था। अतः उन्होंने गुरिल्ला युद्ध शुरू कर दिया। यह युद्ध 1808 से 1814 तक चलता रहा।

जुलाई 1808 में बेलन के युद्ध में फ्रांसीसी सेना पराजित हुई। स्थल में, नेपोलियन की सेना की यह प्रथम पराजय थी। स्पेनवासियों का उत्साह बढ़ा और पूरे यूरोप में सनसनी फैल गई। जोजेफ स्पेन छोड़ भाग खड़ा हुआ। ऐसी स्थिति में नेपोलियन ने स्पेन पर हमला किया और उसे पराजित कर पुनः जोजफ को सिंहासन पर बैठाया। स्पेन में फंसे रहने के कारण साम्राज्य पर वह ध्यान नहीं दे पाया। 1809 ई. में यूरोपीय गतिविधयों के कारण नेपोलियन को एक बड़ी सेना स्पेन में छोड़ मध्य यूरोप की ओर जाना पड़ा। इसके बाद उसका स्पेन आना संभव नहीं हुआ। स्पेन में राष्ट्रवादी पुनः सक्रिय हो गए और जोजफ का शासन लड़खड़ाने लगा। इंग्लैण्ड ने स्पेन का समर्थन देकर कई स्थानों पर फ्रांसीसी सेना को परास्त किया और अंततः स्पेन फ्रांसीसी आधिपत्य से मुक्त हुआ।

स्पेन का युद्ध नेपोलियन के लिए अत्यंत विनाशकारी साबित हुआ। एक तरफ इसने जहाँ नेपोलियन के लाखों सैनिकों व योग्य सेनापतियों को नष्ट कर दिया तो दूसरी तरफ युद्ध में व्यस्त रहने के कारण शेष यूरोप की ओर ध्यान भी नहीं दे सका। स्पेन की विजय ने नेपोलियन की अपराजेयता के मिथक को तोड़ा और यूरोप में सोई राष्ट्रीयता की भावना को जगाया। इसी राष्ट्रवाद की भावना से पे्ररित होकर आगे आस्ट्रिया ने फ्रांस के विरूद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। इस प्रकार स्पेनिश युद्ध के संदर्भ में नेपोलियन का यह कहना ठीक है कि स्पेन के नासूर ने मुझे बर्बाद कर दिया।

स्पेन की सफलता के कारण[संपादित करें]

  • स्पने के सैनिक गुरिल्ला सैनिक थे और फ्रांसीसी सेनाओं को इस युद्ध का अनुभव नहीं था।
  • जिस क्रांति की भटकी दिशा ने नेपालियन को जन्म दिया था वही क्रांति का ज्वार अब नेपोलियन के समक्ष था जिसका सामना वह नहीं कर सका।
  • स्पेन की भौगोलिक स्थिति फ्रांसीसी सैनिकों के लिए परेशानी का सबब रही।
  • स्पेन को इंग्लैण्ड से सैन्य व आर्थिक मदद मिलती रही।
  • कैथोलिक पादरियों ने जनमत को नेपोलियन के विरूद्ध उकसाया।