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स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी

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स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी (अंग्रेज़ी: Street photography) फ़ोटोग्राफ़ी की एक शैली है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के दैनिक जीवन, गतिविधियों और क्षणों को स्वाभाविक रूप में कैद किया जाता है।[1]

यह शैली आमतौर पर बिना पूर्व योजना के, वास्तविक परिस्थितियों में ली गई तस्वीरों पर आधारित होती है और इसमें कृत्रिम प्रकाश या मंचन (staging) का प्रयोग कम किया जाता है।[2]

स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी का विकास 19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी की शुरुआत में हुआ, जब पोर्टेबल कैमरों का उपयोग बढ़ा। 20वीं शताब्दी में यह शैली और लोकप्रिय हुई, विशेष रूप से शहरी जीवन के दस्तावेजीकरण के रूप में।[1]

विशेषताएँ

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स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं:

  • स्वाभाविक (candid) क्षणों को कैद करना
  • सार्वजनिक स्थानों पर चित्र लेना
  • दैनिक जीवन और सामाजिक व्यवहार को दर्शाना
  • प्रकाश, छाया और संरचना (composition) का उपयोग

स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी के अंतर्गत विभिन्न उप-शैलियाँ शामिल हैं:

स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी समाज और संस्कृति के दस्तावेजीकरण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह समय, स्थान और सामाजिक परिवर्तनों को दृश्य रूप में प्रस्तुत करती है और इतिहास के अध्ययन में सहायक होती है।[2][3]

इन्हें भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. 1 2 "Street photography". Encyclopaedia Britannica.
  2. 1 2 Team, N. F. I. (2021-11-11). "Street Photography - Everything You Need to Know". NFI (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-04-16.
  3. "London Street Photography, Museum of London". The Independent (अंग्रेज़ी भाषा में). 2011-03-11. अभिगमन तिथि: 2026-04-16.