सौर उभार

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
एक सौर उभार - आकार तुलना के लिये साथ में पृथ्वी और बृहस्पति भी दिखाए गए हैं

सौर उभार (solar prominence) सूरज की सतह से ऊपर कुंडली के आकार में उभरी हुई दमकती गैस और प्लाज़्मा की एक आकृति होती है। यह सूरज के प्रकाश मंडल में सूरज से जुड़े होते हैं और ऊपर से कोरोना में उभरे हुए होते हैं। जहाँ कोरोना की गैसें ३० लाख सेन्टीग्रेग का अति-गरम आयनित प्लाज़्मा होती हैं और बहुत कम प्रकाश छोड़ती हैं, वहाँ सौर उभारों का प्लाज़्मा वर्णमण्डल से मिलते-जुलते तापमान (३५०० से २५००० सेन्टीग्रेड) पर होता है। नये सौर उभार लगभग एक दिन के काल पर निर्मित होते हैं और कभी-कभी कई सप्ताहों या महीनों तक रहते हैं। कभी-कभी इनके फंदे टूटकर कोरोना द्रव्य उत्क्षेपण (coronal mass ejection) का कारण बन सकते हैं। वैज्ञानिक सौर उभारों के बनने के कारणों पर अनुसंधान कर रहे हैं।[1]

आकार[संपादित करें]

साधारण सौर उभार कई हज़ार किलोमीटर की ऊँचाई रखते हैं। आज तक मापा गया सबसे बड़ा सौर उभार ८,००,००० किलोमीटर लम्बा था। तुलना के लिये पृथ्वी का व्यास (डायामीटर) केवल १२,७०० किमी के लगभग है।[2]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "About Filaments and Prominences". solar.physics.montana.edu. http://solar.physics.montana.edu/ypop/Program/hfilament.html. अभिगमन तिथि: 2 January 2010. 
  2. Atkinson, Nancy (6 August 2012). "Huge Solar Filament Stretches Across the Sun". Universe Today. http://www.universetoday.com/96649/huge-solar-filament-stretches-across-the-sun/. अभिगमन तिथि: 11 August 2012.