सोफ़िया, हॅनोवर की निर्वाचिका

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राजकुमारी सोफ़िया, निर्वाचिका फ़ाल्ज़
हनोवर की निर्वाचिका संगिनी
शासनकाल 19 दिसंबर 1692 – 23 जनवरी 1698
जीवनसाथी अर्नेस्ट ऑगस्टस, हनोवर के निर्वाचक
राजघराना हनोवर
पिता फ़्रेडरिक पंचम, निर्वाचक फ़ाल्ज़
माता एलिज़ाबेथ स्टुअर्ट
जन्म 14 अक्टूबर 1630
हेग, नीदरलैंड
मृत्यु 8 जून 1714(1714-06-08) (उम्र 83)
हनोवर
कब्र 9 जून 1714[1]
लीन कासल, हनोवर

फ़ाल्ज़ की राजकुमारी, सोफ़िया(जर्मन:Sophie, Prinzessin von der Pfalz) जिन्हें अधिक प्रचलित रूप से सोफ़िया ऑफ़ हॅनोवर अर्थात् "हनोवर की सोफ़िया" के नाम से जाना जाता है, का जन्म १७ अक्टूबर १६३० को हेग, नीदरलैण्ड में हुआ था। वे फ़्रेडरिक पंचम, निर्वाचक फ़ाल्ज़ तथा स्कॉटलैंड और इंग्लैंड के राजा, जेम्स (षष्टम् और प्रथम) की पुत्री, एलिज़ाबेथ स्टुअर्ट, की सबसे छोटी पुत्री थी। उनकी पर्वरिश डच गणराज्य में हुई थी। १६५८ में उनका विवाह बर्नस्विक-लूनबर्ग के ड्यूक, अर्नेस्ट ऑगस्टस के साथ हुआ, जिन्हें बाद में पवित्र रोमन साम्राज्य में निर्वाचक का दर्ज प्राप्त हुआ, जिसके कारण सोफ़िया को हनोवर की निर्वाचिका की उपादि प्राप्त हुई। एक ऐसा ख़िताब, जिसके नाम से उन्हें बेहतर जाना जाता है।

इंग्लैण्ड में गौरवशाली क्रांति के पश्चात पारित हुए ऍक्ट ऑफ़ सेटलमेंट, १७०१ के अंतर्गत उन्हें, जेम्स प्रथम की पोती होने के नाते, अंग्रेज़ी सिंघासन का एकमात्र वैध वारिस तथा उन्हें और उनके आगामी प्रोटोस्टेंट वंश को इंग्लैंड की राजगद्दी का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया था। हालाँकि उनके सिंघासन विराजने से दो महीने पूर्व ही मृत्यु हो गयी; अतः सिंघासन पर उनका अधिकार, विधि द्वारा उनके ज्येष्ठ पुत्र, जॉर्ज लुइस, हनोवर के निर्वाचक के पास चला गया, जिन्होंने १ अगस्त १७१४ को इंग्लैंड के राजा जॉर्ज प्रथम के रूप में सिंघासन पर विराजमान होकर, इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में हनोवर वंश के राज को शुरू किया। ऐसा, तत्कालीन राजा विलियम तृतीय और रानी मैरी द्वितीय, और मैरी की बहन रानी ऐनी के कोई जीवित संतान उत्पन्न नहीं कर पाने, तथा स्टुअर्ट घराने के अन्य सभी सदस्यों के कैथोलिक धर्म होने के कारण किया गया था।

जीवनी[संपादित करें]

राजकुमारी सोफ़िया, का जन्म १६३० में राइन के निर्वाचक फ़ाल्ज़, फ़्रेडरिक पंचम, बोहेमिया के राजा(जिन्हें "शीतकाल के राजा" भी कहा जाता है, क्योंकि उनका राज केवल एक शीतकाल तक चला था) और एलिज़ाबेथ स्टुअर्ट, बोहेमिया की रानी की बारहवीं सन्तान के रूप में हुआ था। उनका जन्म फ़्रेडरिक के नीदरलैंड में निष्काशन के दौरान हुआ था। अपने दूर के ममेरे भाई, इंग्लैंड के चार्ल्स द्वी के साथ असफल विवाह के पश्चात् वो अपने भाई कार्ल लुडविग, निर्वाचक फ़ाल्ज़ के साथ हैडेलबर्ग में रहने लगी। जहाँ वो अपनी विवाह तक रही थी।

विवाह से पहले उन्हें राइन की राजकुमारी फ़ाल्ज़ के नाम से जाना जाता था, क्योंकि उनके पिता राइनलैंड की जागीर के निर्वाचक फ़ाल्ज़ थे। ३० सितम्बर १६५८ को उनका विवाह बर्नस्विक-लूनबर्ग के ड्यूक, अर्नेस्ट ऑगस्टस के साथ हुआ, जिसके कारण उन्हें डचेस की उपदि प्राप्त हुई। १६९२ में, ऑगस्टस को हनोवर का निर्वाचक बना दिया गया, तथा सोफ़िया, हनोवर की निर्वाचिका बन गयी। सोफ़िया को एक बुद्धिमान, और वैज्ञानिक तथा दार्शनिक जिज्ञासा से भरपूर महिला के रूप में जाना जाता था।

सोफ़िया और अर्नेस्ट का विवाह मृत्यु तक रहा, और अर्नेस्ट के गुस्सैलपन और अक्सर नामौजूदगी के बावजूद, उन दोनों के बीच काफी प्यार था। सोफ़िया ने अर्नेस्ट के अनेक संतानों को जन्म दिया था, जिनमे से:

  • ग्रेट ब्रिटेन के जॉर्ज प्रथम (1660-1727)
  • बर्नस्विक-ल्यूंबर्ग के फ्रेडरिक ऑगस्टस (1661-1690), इम्पीरियल जनरल
  • बर्नस्विक-ल्यूंबर्ग के मैक्सीमिलियन विलियम (1666-1726), शाही सेना में फील्ड मार्शल
  • सोफिया शेर्लोट (1668-1705), प्रशिया में रानी
  • बर्नस्विक-ल्यूंबर्ग के चार्ल्स फिलिप (1669-1690), इम्पीरियल सेना में कर्नल
  • बर्नस्विक-ल्यूंबर्ग के क्रिस्टियान हेनरी (1671-1703)
  • बर्नस्विक-ल्यूंबर्ग, यॉर्क और अल्बानी (1674-1728) के ड्यूक, जो अर्नेस्ट ऑगस्टस अर्नेस्ट ऑगस्टस द्वितीय के रूप में बर्लिन के राजकुमार-बिशप बने

मृत्यु और विरासत[संपादित करें]

हनोवर की सोफ़िया, अंग्रेज़ी सिंघासन की वारिस घोषित होने के सने की चित्र


सोफ़िया ने अपने जीवन काल में, उस समय के मुकाबले काफी बेहतर स्वास्थ्य का अनुभव किया था। हालांकि वे रानी ऐनी से कहीं बूढ़ी थी, परंतु मृत्यु के समय उनकी सेहत उनसे काफी बेहतर थे। ५ जून १७१४ को रानी ऐनी से एक क्रोधमय चिट्ठी मिलने पर, वे भय से बीमार पड़ गयी थी। दो दिनों बाद, अस्वस्थता से उबरने के बाद, वे हेर्रेनहौसेन के बगीचे में टहल रहीं थी, जब अचानक मूसलाधार बारिश होने लगी। बकबर्ग की काउंटेस के अनुसार, सोफ़िया इस बारिश से बचने के लिए दौड़ने के बाद गिर पड़ी और उनहोंने डैम तोड़ दिया। इस प्रफर उनका देहांत ८३ की आयु में ८ जून १७१४ को हुई, जो उस काल के अनुसार बहुत अधिक और असामान्य था। जबकि रानी ऐनी एक महीने बाद ४९ की उम्र में देहत्याग किया। जिसके बाद, निर्वाचिता सोफ़िया की ज्येष्ठ पुत्र, जॉर्ज प्रथम ने इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के सिंघासन पर काबिज़ हुए।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

  • Hatton, Ragnhild (1978). George I: Elector and King. London: Thames and Hudson. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-500-25060-X.
  • Israel, Johnathan I. Radical Enlightenment. Oxford University Press, 2001, 84.
  • Duggan, J. N., Sophia of Hanover, From Winter Princess to Heiress of Great Britain; London, Peter Owen, 2010
  • Klopp, Onno (ed.), Correspondance de Leibniz avec l'électrice Sophie. Hanover, 1864–1875
  • Van der Cruysse, Dirk; Sophie de Hanovre, memoires et lettres de voyage; Paris, Fayard, 1990
  •  Sophia”ब्रिटैनिका विश्वकोष (11th)। (1911)।