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सोने का बछड़ा

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सोने के बछड़े की पूजा, जैसा कि निर्गमन 32:1-35 में है, 1901 का चित्रण

तौरात, बाइबिल, और क़ुरान के अनुसार, जब मूसा सीनाई पर्वत पर गया, इस्राएलियों ने अपनी अधीरता में एक सोने का बछड़ा (इब्रानी: עֵגֶל הַזָּהָב) बनवाया और उसकी पूजा करने लगे। इस दुराचार को बछड़े का पाप कहा जाता है। इसका पहला उल्लेख निर्गमन की पुस्तक में है।[1]

बैलों की पूजा कई संस्कृतियों में उपस्थित थी। मिस्र में, जहाँ से निर्गमन कथा के अनुसार, इस्राएली हाल ही में पहुँचे थे, बैल-देवता एपिस की पूजा की जाती थी, जिसे कुछ लोग मानते हैं कि इब्रानियों भी जंगल में कर रहे थे।[2] अन्य लोग मानतें हैं कि इस्राएलियों के देवता यहोवा को पवित्र बैल के रूप में चित्रित या उससे जोड़ा गया था। कनानियों, जिनमें से कुछ इस्राएली बनें,[3] बैल को एल देव का पशु मानते थे।[4]

बाइबिल में

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सोने के बछड़े पर क्रुद्ध मूसा, विलियम ब्लेक रचित चित्रकला, 1799–1800

जब मूसा परमेश्वर से मिलने सीनाई पर्वत पर चढ़ा, वह वहाँ चालीस दिन और चालीस रात रहा।[5] इस्राएलियों को लगा कि वह नहीं लौट आएगा, और उन्होंने हारून को देवता बनाने को कहा "जो उनके आगे आगे चले"। हारून ने उनसे सोने की बालियों लाने को कहा, जिससे वह एक बछड़े की मूर्ति बनाया। तब लोग कहने लगे, “हे इस्राएल, तेरा ईश्‍वर जो तुझे मिस्र देश से छुड़ा लाया है, वह यही है।”[6]

यह देख के हारून ने उसके आगे एक वेदी बनवाई; और कहा कि कल यहोवा के लिये पर्व होगा। और दूसरे दिन लोगों ने सुबह-सवेरे होमबलि चढ़ाए, और मेलबलि ले आए; फिर बैठकर खाया पिया, और उठकर खेलने लगे।[7]

तब यहोवा ने मूसा को अपने लोगों का दुराचार बताया और कहा कि वह उन्हें ढा देकर मूसा से नए लोग बनाएगा। परन्तु मूसा ने उनसे अपने लोगों को बख़्शने की विनती की। तब यहोवा ने लोगों पर अपने दण्ड को त्याग दिया।[8]

मूसा सीनाई पर्वत से उतरा; और बछड़ा देखकर अपने क्रोध में पत्थर की दोनों तख़्तियों को पटककर तोड़ डाला। फिर उसने बछड़े को आग में जलाकर, पीसकर चूर चूरकर, पानी में डालकर इस्राएलियों को पिलवाया। जब मूसा ने उससे पूछा, तब हारून के कहा कि उसने ही सोने का बछड़ा बनाया था।[9]

लेवीयों ने लगभग 3000 इस्राएलियों को मारा, जिन्होंने सोने के बछड़े की पूजा की (जिम पजेट द्वारा चित्रण, 1984)

लेवी के गोत्र ने सोने के बछड़े की पूजा नहीं की। मूसा ने छावनी के निकास पर खड़े होकर कहा, "जो कोई यहोवा की ओर का है वह मेरे पास आए!” तब सारे लेवीय उस के पास इकट्ठे हुए।

उनको निरंकुश देखकर मूसा ने छावनी के निकास पर खड़े होकर कहा, “जो कोई यहोवा की ओर का है वह मेरे पास आए;” तब सारे लेवीय उस के पास इकट्ठे हुए। उसने उनसे कहा, “इस्राएल का परमेश्‍वर यहोवा यों कहता है कि अपनी अपनी जाँघ पर तलवार लटकाकर छावनी के एक निकास से दूसरे निकास तक घूम घूमकर अपने अपने भाइयों, संगियों, और पड़ोसियों को घात करो।” मूसा के इस वचन के अनुसार लेवियों ने किया; और उस दिन तीन हज़ार के लगभग लोग मारे गए।

  1. ↑ "निर्गमन 32:4". YouVersion.
  2. ↑ Chung, Youn Ho (2010). The Sin of the Calf: The Rise of the Bible's Negative Attitude Toward the Golden Calf. Bloomsbury Publishing USA. p. 3. ISBN 978-0-567-21231-3. Even today, there are scholars who adhere to this stance.
  3. ↑ Finklestein, Israel; Silberman, Neil Asher (2002). The Bible Unearthed. Touchstone. p. 118. ISBN 0-684-86913-6. Most of the people who formed early Israel were local people—the same people whom we see in the highlands throughout the Bronze and Iron Ages. The early Israelites were—irony of ironies—themselves originally Canaanites!
  4. ↑ Friedman, Richard Elliott (2019). Who Wrote the Bible?. Simon & Schuster. ISBN 978-1-9821-2900-2. The calf, or young bull, was often associated with the god El, the chief god of the Canaanites, who was in fact referred to as Bull El.
  5. ↑ "निर्गमन 24:12-18". YouVersion.
  6. ↑ "निर्गमन 32:1-4". YouVersion.
  7. ↑ "निर्गमन 32:5-6". YouVersion.
  8. ↑ "निर्गमन 32:11-14". YouVersion.
  9. ↑ "निर्गमन 32:21-24". YouVersion.