सैयद सालार साहू गाजी

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सैयद सालार साहू गाजी या सालार साहू (फारसी: غازى سيد سالار ساھو) सुल्तान महमूद ग़ज़नवी की सेना में सेनापति थे जो 11वीं शताब्दी की शुरुआत में दक्षिण एशिया आए थे।

सालार साहू अली के पुत्र मुहम्मद इब्न अल-हानाफियाह के वंशज थे। उनके पिता का नाम ताहिर अताउल्ला था और मान्यता के तौर पर वह सेनापति सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी के पिता थे। वह सुल्तान महमूद गज़नवी के बहनोई थे और उन्होंने कथित तौर पर उनकी बहन सुत्र -ए-मुअल्ला से शादी कर ली थी। वह सुल्तान महमूद गज़नवी के साथ सेना के सेनापति के रूप में भारत आए।

वह लगभग 1000 साल पहले सतरीख में मर गए और उन्हें वहाँ दफनाया गया।

सैयद सालार साहू का मकबरा[संपादित करें]

सालार साहू का मकबरा सतरीख में स्थित है, जो उत्तर प्रदेश में बाराबंकी से 8 किलोमीटर (5.0 मील) दूर है। गर्मी के दौरान हिंदू महीने ज्येष्ठ के पूर्णिमा के दौरान लोग उनकी कब्र पर तीर्थयात्रा में इकट्ठे होते हैं। पाँच दिन लंबे उर्स के दौरान हजारों भक्त प्रार्थना करते हैं। उनका मकबरा "बूढ़े बाबा की मजार" के रूप में जाना जाता है।[1][2][3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "बूढ़े बाबा का पांच दिवसीय वार्षिक उर्स 17 से". दैनिक जागरण. 11 मई 2017. अभिगमन तिथि 2 जुलाई 2018.
  2. "दरगाह पर उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब". दैनिक जागरण. 29 मई 2016. अभिगमन तिथि 2 जुलाई 2018.
  3. "बूढ़े बाबा की मजार पर उमड़े जायरीन, मेला आज से". दैनिक जागरण. 8 मई 2012. अभिगमन तिथि 2 जुलाई 2018.