सैन्य प्रौद्योगिकी का इतिहास

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

बीसवीं शताब्दी में सेना द्वारा विज्ञान के वित्तपोषण ने वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में अनेकों प्रभाव देखने को मिले। विशेष रूप से प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात से यह माना जाने लगा है कि सफल सेना के लिए विज्ञान पर आधारित उन्नत प्रौद्योगिकी अत्यावश्यक है।

प्रथम विश्वयुद्ध को प्रायः 'रसायनज्ञों का युद्ध' (chemists’ war) कहा गया है क्योंकि इसमें विषाक्त गैसों का बहुतायत में प्रयोग हुआ तथा नाइट्रेट व अन्य उन्नत विस्फोटकों का विशेष महत्व रहा।

आधुनिक युग के पहले सैन्य प्रौद्योगिकी[संपादित करें]

प्रथम विश्वयुद्ध के समय सैन्य प्रौद्योगिकी[संपादित करें]

द्वितीय विश्वयुद्ध के समय सैन्य प्रौद्योगिकी[संपादित करें]

शीतयुद्ध काल की सैन्य प्रौद्योगिकी[संपादित करें]

  • संगणन (कम्प्युटिंग)
  • भूविज्ञान तथा खगोलविज्ञान (Geosciences and astrophysics)
  • जीव विज्ञान

इन्हें भी देखें[संपादित करें]