सैडवावायरस
| सैडवावायरस | |
|---|---|
| वैज्ञानिक वर्गीकरण | |
| संघ: | पिसुविरिकोटा |
| वंश: | सैडवावायरस |
| प्रकार जाति | |
| सैडवावायरस सिट्री ICTV | |
सैडवावायरस (Sadwavirus) पादपों में रोग उत्पन्न करने वाले विषाणुओं का एक महत्वपूर्ण वंश है, जो पिकोर्नाविरलेस गण तथा सिकोविरिडी कुल के अंतर्गत आता है। यह वंश मुख्यतः प्राकृतिक परिस्थितियों में नींबू-प्रजाति के पौधों को संक्रमित करता है, विशेषकर सत्सुमा मैंडरिन जैसे वृक्ष इसके प्रमुख मेज़बान होते हैं।
इस वंश का नाम इसके प्रमुख विषाणु 'सत्सुमा ड्वार्फ वायरस' के नाम के प्रारंभिक अक्षरों (Satsuma dwarf virus) से निर्मित है, जो इसके वर्गीकरण और पहचान को स्पष्ट करता है। यह विषाणु पौधों की वृद्धि और उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है, जिससे कृषि और बागवानी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
वर्गीकरण
[संपादित करें]वर्तमान में इस वंश के अंतर्गत तीन उपवंश और 15 प्रजातियों को मान्यता प्राप्त है:[1]
- चोलिवायरस: इसमें अनानास और कैटलिया को प्रभावित करने वाली प्रजातियाँ शामिल हैं।
- सत्सुमावायरस: इसमें मुख्य 'सत्सुमा ड्वार्फ वायरस' शामिल है।
- स्ट्रामोवायरस: इसके अंतर्गत स्ट्रॉबेरी और ब्लैक रास्पबेरी को संक्रमित करने वाले विषाणु आते हैं।
संरचना और जीनोम
[संपादित करें]ये विषाणु आवरणहीन होते हैं और इनकी संरचना विंशफलकीय होती है। इनका व्यास लगभग 25 से 30 नैनोमीटर के बीच होता है। इनका जीनोम रेखीय, धनात्मक-रज्जु वाला एकल-सूत्री आरएनए होता है, जो दो खंडों में बँटा रहता है।
लक्षण और फैलाव
[संपादित करें]सत्सुमा ड्वार्फ रोग से संक्रमित पेड़ों की पत्तियाँ मुड़कर चम्मच के आकार की हो जाती हैं। इसके अन्य प्रमुख लक्षणों में पौधों का बौनापन, पत्तियों व फलों के आकार में कमी तथा विकास का पूरी तरह से रुक जाना शामिल है।
यह विषाणु मुख्य रूप से निम्नलिखित माध्यमों से फैलता है:[2]
- रोगवाहक (वेक्टर): सूत्रकृमि, कुटकी और थ्रिप्स कीटों द्वारा।
- अन्य माध्यम: संक्रमित बीजों तथा कलम लगाने की प्रक्रिया के माध्यम से।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Virus Taxonomy: 2025 Release". International Committee on Taxonomy of Viruses. अभिगमन तिथि: 22 March 2026.
- ↑ "Viral Zone". ExPASy. अभिगमन तिथि: 15 June 2015.