सेला दर्रा

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से ला
सेला दर्रा

अप्रैल 2015 में सेला द्वार
ऊँचाई 4,170 मीटर (13,680 फीट)
स्थिति
शृंखला हिमालय
निर्देशांक 27°30′17″N 92°06′17″E / 27.50480843°N 92.10469818°E / 27.50480843; 92.10469818निर्देशांक: 27°30′17″N 92°06′17″E / 27.50480843°N 92.10469818°E / 27.50480843; 92.10469818

सेला दर्रा या से ला (ला का मतलब दर्रा है) भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य के तवांग ज़िले और पश्चिम कमेंग ज़िले के मध्य अवस्थित एक उच्च तुंगता वाला पहाड़ी दर्रा है। इसकी ऊँचाई 4,170 मीटर (13,700 फुट) है और यह तिब्बती बौद्ध शहर तवांग को दिरांग और गुवाहाटी से जोड़ता है। इस दर्रे से होकर ही तवांग शेष भारत से एक मुख्य सड़क के माध्यम से जुड़ा हुआ है। इस दर्रे के आस-पास वनस्पति अल्प मात्रा में उगते हैं तथा यह क्षेत्र आमतौर से वर्ष भर बर्फ से ढका होता है। इस दर्रे के शिखर के नजदीक स्थित सेला झील इस क्षेत्र में स्थित लगभग 101 पवित्र तिब्बती बौद्ध धर्म के झीलों में से एक है।[1][2]

सुरंग[संपादित करें]

भारत सरकार ने 2018-19 के बजट में सभी मौसम में परिवहन की सुविधा से युक्त सेला दर्रा सुरंग के निर्माण हेतु वित्तपोषण की घोषणा की।[3]

धर्म[संपादित करें]

सेला दर्रा तिब्बती बौद्ध धर्म का एक पवित्र स्थल है। बौद्धों का मानना है कि यहाँ आस-पास में 101 पवित्र झीलें हैं।

अनुश्रुति[संपादित करें]

एक अनुश्रुति के अनुसार 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान जसवंत सिंह रावत नामक भारतीय सेना के एक वीर जवान ने इस दर्रे के नजदीक चीनी सैनिकों के खिलाफ अकेले युद्ध किया था। जसवंत सिंह रावत को उनके साहस एवं कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "Sela Pass". Pan India Internet Private Limited (PIIPL). arunachalonline.in. अभिगमन तिथि 2013-04-19.
  2. "High Altitude Sela Pass–Backbone of Tawang District". Sankara Subramanian C (www.beontheroad.com). beontheroad.com. January 21, 2011. अभिगमन तिथि 2013-04-18.
  3. Sela pass tunnel, Economic Times, 1 Feb 2018.