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सेप्टुआजिंट

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सेप्टुआजिंट
लेखक72 यहूदी विद्वान (परंपरानुसार)
भाषाकोइन ग्रीक (यूनानी)
विषयहिब्रू बाइबिल का यूनानी अनुवाद
शैलीधार्मिक ग्रंथ
प्रकाशिततीसरी से दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व

सेप्टुआजिंट, जिसे अक्सर यूनानी पुराने नियम के रूप में जाना जाता है, हिब्रू बाइबिल (तनख) का सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण यूनानी अनुवाद है।[1] यह अनुवाद मुख्य रूप से कोइन ग्रीक में किया गया था, जो प्राचीन काल में भूमध्यसागरीय क्षेत्र की संपर्क भाषा (लिंग्वा फ़्रैंका) थी। इस पाठ का यह नाम लैटिन शब्द 'सेप्टुआजिंटा' से लिया गया है, जिसका अर्थ "सत्तर" (70) होता है। रोमन अंकों में इसे प्रायः ' एलएक्सएक्स' लिखा जाता है। यह नाम एक प्राचीन यहूदी मान्यता पर आधारित है जिसके अनुसार 72 यहूदी विद्वानों ने मिलकर इसका अनुवाद किया था, जिसे सुविधा के लिए 70 मान लिया गया।

इस ऐतिहासिक अनुवाद का कार्य तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मिस्र के अलेक्जेंड्रिया शहर में टॉलेमी द्वितीय फिलाडेल्फस के शासनकाल के दौरान शुरू हुआ था। उस समय अलेक्जेंड्रिया में यहूदियों की एक बहुत बड़ी आबादी निवास करती थी। हेलेनिस्टिक प्रभाव के कारण उनमें से कई लोग अपनी मातृभाषा हिब्रू भूल चुके थे और केवल यूनानी भाषा का उपयोग करते थे। इन्हीं यहूदी समुदायों की धार्मिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हिब्रू धर्मग्रंथों का यूनानी भाषा में अनुवाद किया गया था।[2] सबसे पहले तोराह यानी मूसा की पाँच पुस्तकों (पेंटाट्यूक) का अनुवाद किया गया, और बाद में दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व तक अन्य पुस्तकों (भविष्यद्वक्ताओं और लेखों) का अनुवाद भी पूरा कर लिया गया।

सेप्टुआजिंट का ऐतिहासिक, भाषाई और धार्मिक महत्व अत्यधिक है। यह न केवल प्राचीन यूनानी भाषी यहूदियों के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रंथ था, बल्कि प्रारंभिक ईसाई कलीसिया द्वारा भी इसे बड़े पैमाने पर अपनाया गया था। नए नियम के लेखकों (जैसे प्रेरित पौलुस) ने जब भी अपने लेखनों में पुराने नियम के उद्धरण दिए, तो उन्होंने मुख्य रूप से सेप्टुआजिंट का ही उपयोग किया। आज भी, ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स चर्च अपने पुराने नियम के आधिकारिक पाठ के रूप में इसी का उपयोग करता है।

सेप्टुआजिंट में कुछ ऐसी पुस्तकें भी शामिल हैं जिन्हें मूल हिब्रू बाइबिल (मसोरेटिक पाठ) में शामिल नहीं किया गया है। इन अतिरिक्त पुस्तकों को अपोक्रिफा या ड्यूटेरोकैनोनिकल पुस्तकों के रूप में जाना जाता है। रोमन कैथोलिक और ऑर्थोडॉक्स ईसाई परंपराओं में इन पुस्तकों को प्रामाणिक माना जाता है, जबकि अधिकांश प्रोटेस्टेंट संप्रदाय इन्हें अपनी बाइबिल के मुख्य भाग से बाहर रखते हैं। आधुनिक समय में, बाइबिल के प्राचीन मूल पाठ के अध्ययन और विभिन्न भाषाओं में नए अनुवादों को तैयार करने में विद्वानों के लिए सेप्टुआजिंट एक अत्यंत प्रामाणिक स्रोत बना हुआ है।[3]

सन्दर्भ

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  1. "Septuagint: biblical literature". Encyclopedia Britannica.
  2. "The Septuagint". Jewish Virtual Library.
  3. "Septuagint Version". Catholic Encyclopedia.

बाहरी कड़ियाँ

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