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सूबेदार (उपाधि)

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मुग़ल पदों में नवाब, सूबेदार, मनसबदार, सवार और सिपाही उपस्थित है। मुग़ल राजकुमारों को प्रायः मीर और मिर्ज़ा के उपाधि दिए जाते थे।

सूबेदार (फ़ारसी: صوبه‌دار) या नाज़िम[1] ग़ुलाम, ख़िलजी, तुग़लक़ और मुग़ल साम्राज्य के राज के समय एक सूबे के मालिक के लिए एक उपाधि थी। मुग़ल शासनकाल में इसे साहिब-ए-सूबा या नाज़िम के नाम से भी जाना जाता था। शब्द फ़ारसी भाषा का है और उसका अर्थ है "सूबा का मालिक"।[2] सूबेदार मुग़ल प्राधिकरण का प्रधान था। सूबे के दीवान, बख़्शी, फ़ौजदार, कोतवाल, क़ाज़ी, सदर, वाक़ा-ए-नवीस, क़ानूनगो और पटवारी ने उसे साथ दिया।[3] सूबेदार को मुग़ल राजकुमारों या ऊँचे मनसब वाले अधिकारियों द्वारा चुना गया था।

  1. George Clifford Whitworth. Subah. An Anglo-Indian Dictionary: A Glossary of Indian Terms Used in English, and of Such English Or Other Non-Indian Terms as Have Obtained Special Meanings in India. London: Kegan Paul, Trench & Co. 1885. p. 301.
  2. Islam, Sirajul (2012). "Subahdar". In Islam, Sirajul; Jamal, Ahmed A. (eds.). Banglapedia: National Encyclopedia of Bangladesh (Second ed.). Asiatic Society of Bangladesh. 2015-07-03 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2015-10-27.
  3. Mahajan V.D. (1991, reprint 2007). History of Medieval India, Part II, New Delhi: S. Chand, ISBN 81-219-0364-5, p.236