सुरैया हसन बोस

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सुरैया हसन बोस ( १९२८ -- ३ सितम्बर, २०२१) भारतीय स्वंत्रता संग्राम के क्रान्तिकारी नेता सुभाष चंद्र बोस के भतीजे अरविन्द बोस की पत्नी और पारम्परिक बुनकरी को पुनर्जीवित करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रही हैं। उन्होंने हिमरू ब्रोकेड/ जरी वस्त्र, मश्रू और तेली जैसी पारंपरिक बुनकरी के काम को पुनर्जीवित करने और कई सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। 93 साल की उम्र में 3 सितम्बर 2021 को उनका निधन हुआ था।[1] उनके के निधन से स्वतंत्रता के बाद के भारत में दुर्लभ और लुप्त होती कपड़े की बुनाई के डिजाइनों के पुनरुद्धार के गौरवशाली अध्याय का कुछ जानकार अंत हो मानते हैं। [2]

कार्य[संपादित करें]

तेलंगाना राज्य के हैदराबाद शहर में सुरैया ने करीब 600 से ज्यादा बुनकर परिवारों को बुनकरी के ज़रिए रोजगार देने का काम किया। उन्होंने बच्चों की मुफ़्त शिक्षा के लिए एक स्कूल भी खोला था। उन्हें उनके सामाजिक कार्यों के लिए देवी अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया है। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से टैक्सटाइल डिजाइनिंग में डिप्लोमा किया था। गांवों में काम करने वाली सुरैया फ़ैबइंडिया और पीएर कार्डिन जैसे ब्रेंड्स के साथ काम कर चुकी हैं। उन्हें लोग प्यार से सुरैया आपा कहकर बुलाते थे।[3]

परिवार[संपादित करें]

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भतीजे अरबिंदो बोस की पत्नी होने के साथ-साथ वे आबिद हसन साफ़रानी की भतीजी भी हैं जिन्होंने जय हिन्द जैसे नारे को गढ़ा था[4] और आजाद हिंद फौज में एक मेजर के पद तक पहुंचे थे। इस प्रकार से सुरैया हसन बोस अपने मैके और ससुराल - दोनों से देश-सेवा की भावना विरासत में पा चुकी हैं।

सम्मान एवं पुरस्कार[संपादित करें]

  • १४वाँ गॉडफ्री फिलिप्स पुरस्कार, (असाधारण सामाजिक साहस के प्रदर्शन के लिए)
  • २३वाँ वार्षिक युद्धवीर फाउण्डेशन पुरस्कार[5]

संदर्भ[संपादित करें]