सुरेन्द्र मोहन पाठक का जन्म १९ फ़रवरी १९४० को खेमकरण, अमृतसर, पंजाब में हुआ था। विज्ञान में स्नातक की उपाधि लेने के पश्चात इन्होने ने भारतीय दूरभाष उद्योग में नौकरी करने लगे। पढने के शौक़ीन आप बचपन से ही थे। आपने अपनी युवावस्था तक कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय लेखकों को पढ़ा था।
सन १९६० में, अपने कार्य-काल के दौरान ही सुरेन्द्र मोहन पाठक ने मात्र २० वर्ष की उम्र में ही प्रसिद्द अंतराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त उपन्यासकार इयान फ्लेमिंग रचित जेम्स बांड के सीरीज और जेम्स हेडली चेज (James Hadley Chase) के उपन्यासों का अनुवाद करना प्रारंभ कर दिया। सुरेन्द्र मोहन पाठक के द्वारा अनुवादित उपन्यासों की मांग लगातार भारतीय हिंदी-भाषी बाजार में बढ़ने लगी।
सन १९५९ में, आपकी अपनी कृति, प्रथम कहानी “५७ साल पुराना आदमी”मनोहर कहानियां नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई। सन १९६९ आपका पहला पूर्ण उपन्यास “ऑपरेशन बुडापेस्ट” आया। “ऑपरेशन बुडापेस्ट” आपके द्वारा लिखी गयी ३० वीं कृति थी। आपका पहला उपन्यास “पुराने गुनाह नए गुनाहगार”, सन १९६३ में “नीलम जासूस” नामक पत्रिका में छपा था। सन १९६३ से सन १९६९ तक विभिन्न पत्रिकाओं में आपके उपन्यास छपते रहे।
सुरेन्द्र मोहन पाठक का सबसे प्रसिद्द उपन्यास “असफल अभियान” और “खाली वार” था जिसने पाठक जी को प्रसिद्धि के सबसे ऊँचे शिखर पर पहुंचा दिया। इसके पश्चात आपने अभी तक पीछे मुड़ कर नहीं देखा है। "पैंसठ लाख की डकैती" नामक उपन्यास का अंग्रेजी में अनुवाद भी प्रकाशित हुआ तथा यह खबर टाईम मैगज़ीनमें भी प्रकाशित हुई थी। यह खबर भी आई थी कि इस उपन्यास की लगभग ढाई करोड़ प्रतियाँ बिकी थीं।[1]
श्री सुरेन्द्र मोहन पाठक जी की कृतियों का प्रारंभ “सुनील” श्रृंखला के पहले उपन्यास “पुराने गुनाह नए गुनाहगार” से होता है। आपने इस श्रृंखला के अंतर्गत लगभग १२० उपन्यासों की रचना की है। एक ही किरदार पर आधारित उपन्यासों की रचना करने वाले, आप विश्व के प्रथम लेखक हैं।[उद्धरण चाहिए] सुनील, राजनगर नामक काल्पनिक शहर के एक काल्पनिक दैनिक अखबार “ब्लास्ट” का खुशमिजाज, ईमानदार, सच्चा खोजी-पत्रकार है। राजनगर समुद्र तट के किनारे बसा एक शहर है। सुनील हमेशा मजलूम और समय के सताए हुए लोगों की सहायता करता है जो किसी कारण से जुर्म के झूठे जाल में फंस जाते हैं। सुनील हमेशा निर्दोष इंसानों की सहायता के लिए निःस्वार्थ भाव से तैयार रहता है। वहीँ अधिकतर कहानियों उसे मुसीबतजदा हसीनाओं की सहायता करते दिखाया गया है, जिसमे वह भी फंसता-फंसता बचता है। अपने प्रिय मित्र रमाकांत मल्होत्रा (जो की नगर के प्रतिष्ठित क्लब “यूथ क्लब” के मालिक हैं) और उसके कर्मचारियों की सहायता से कई केस हल करता है। सुनील श्रृंखला के उपन्यासों में “प्रभुदयाल” नामक एक ईमानदार इंस्पेक्टर का भी किरदार है, जिसके साथ सुनील का छत्तीस का आंकड़ा चलता है। सुनील प्रायः पुलिस की तहकीकात से २ कदम आगे की तहकीकात करता है और प्रभुदयाल इन्ही आदतों से सुनील से परेशान रहता है। सुनील श्रृंखला के उपन्यासों की सबसे बड़ी खासियत, उसमें प्रस्तुत की गयी मर्डर-मिस्ट्री और हाजिरजवाबी होती है।
सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के सुधीर सीरीज का मुख्य किरदार सुधीर कोहली नामक प्राइवेट डिटेक्टिव है। सुधीर सीरीज के उपन्यास मुख्यतः प्रथम वाचक में होते हैं। सुधीर, सुनील का एक विपरीत किरदार है। सुधीर, दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर देवेन्द्र यादव की सहायता से कई केस को हल करता है, जो समय के अनुसार अपने आप को ईमानदार और बईमान बना लेता है। सुधीर सीरीज के एक उपन्यास का अंग्रेजी में भी अनुवाद किया गया है जिसका नाम “The last goal” है।
सुरेन्द्र मोहन पाठक जी का सबसे प्रसिद्द श्रृंखला विमल है। विमल नामक किरदार पाठक जी के उपन्यासों में कई नामों से जाना जाता है। विमल एक रॉबिनहुड सरीखा किरदार है जो कानून से भागता फिरता है। विमल एक ऐसा किरदार है जिसने जुर्म का समूल नाश करने की कसम खाई है। पाठक जी के सभी श्रृंखलाबद्ध उपन्यासों में इस उपन्यास का बेसब्री से इंतज़ार किया जाता है और पसंद किया जाता है। विमल न तो प्राइवेट डिटेक्टिव है और न पुलिस ऑफिसर, वह सात राज्यों में वांटेड मुजरिम है।
श्री सुरेन्द्र मोहन पाठक ने श्रृंखलाबद्ध उपन्यासों के अलावा कई ऐसे उपन्यास लिखे हैं जिन्हें थ्रिलर श्रेणी के अन्दर लिया जाता है। साथ ही आपने कई जोक-बुक भी लिखे हैं जिसमे आपने कई चुटकुलों का संग्रह किया है।