सुब्हान रज़ा खान
सुब्हान रज़ा खान एक भारतीय इस्लामी विद्वान हैं। वे बरेली, भारत में अपने परदादा अहमद रज़ा खान की दरगाह, बरेली दरगाह के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। वे मंज़र-ए-इस्लाम मदरसे के चेयरपर्सन हैं। इसके अलावा, वे उर्दू भाषा में प्रकाशित होने वाली आला हज़रत मासिक पत्रिका के संपादक भी हैं, जो दरगाह से प्रकाशित होती है। उनके बेटे अहसान रज़ा खान को वर्तमान में बरेली दरगाह का प्रमुख बनाया गया है।[1][2][3]
सक्रियता
[संपादित करें]तालिबान और वहाबी विचारधारा के बहिष्कार की अपील
साल 2014 में बरेली दरगाह में उर्स-ए-रज़वी के मौके पर लाखों सुन्नी मुसलमानों की मौजूदगी में बरेलवी उलेमाओं ने तालिबान द्वारा किए जा रहे आतंकवाद और वहाबी विचारधारा की निंदा की। उन्होंने कहा कि दुनिया को एकजुट होकर इस्लाम के नाम पर निर्दोष लोगों की हत्या के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए। उलेमाओं को तालिबान और वहाबियों के खिलाफ एक अभियान चलाना चाहिए।[4]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Malik, Jamal (2007-11-27). Madrasas in South Asia: Teaching Terror? (अंग्रेज़ी भाषा में). Routledge. ISBN 978-1-134-10763-6.
- ↑ Sanyal, Usha (2020-06-12). Scholars of Faith: South Asian Muslim Women and the Embodiment of Religious Knowledge (अंग्रेज़ी भाषा में). Oxford University Press. ISBN 978-0-19-909989-4.
- ↑ Muslim India (अंग्रेज़ी भाषा में). Muslim India. 2007.
- ↑ "Clerics oppose the appointment of son as new Sajjadanasheen of Dargah Ala Hazrat". The Times of India. 2014-11-25. आईएसएसएन 0971-8257. अभिगमन तिथि: 2025-10-15.