सुफ़यान अल-सौरी
| Sufyan al-Thawri | |
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| سُفْيَان ٱلثَّوْرِيّ | |
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| धर्म | Islam |
| व्यक्तिगत विशिष्ठियाँ | |
| जन्म |
716 CE / 97 AH Khorasan, Umayyad Caliphate |
| निधन |
778 CE (aged 61–62) / 161 AH (aged 63–64) Basra, Abbasid Caliphate |
| पिता | Sa'id ibn Masruq al-Thawri[*] |
| पद तैनाती | |
| उपदि | |
अबू अब्दुल्लाह सुफ़यान इब्न सईद इब्न मस्रूक अल-सौरी (716–778 ई./97–161 हिजरी), जिन्हें आम तौर पर सुफ़यान अल-सौरी कहा जाता है, एक प्रसिद्ध सुन्नी मुस्लिम विद्वान, न्यायविद (फ़कीह), ज़ाहिद (त्यागी/संन्यासी) और हदीस के विद्वान थे।
वे सौरी फ़िक्ही मत (Sauri school of jurisprudence) के संस्थापक थे, जो इस्लामी न्यायशास्त्र के शुरुआती मतों में से एक था। उन्हें इस्लाम के आठ प्रमुख ज़ाहिदों (त्यागी संतों) में गिना जाता है।
उनका पूरा नाम था:
अबू अब्दुल्लाह सुफ़यान इब्न सईद इब्न मस्रूक इब्न हम्ज़ा इब्न हबीब इब्न मौहिबा इब्न नसर इब्न सअलबा इब्न मलकान इब्न थौर अल-सौरी अल-रबाबी अल-तमिमी अल-मुज़री अल-कूफ़ी।
काम
[संपादित करें]उनकी पुस्तकों में से सबसे प्रसिद्ध उनकी क़ुरआन की तफ़्सीर (व्याख्या) मानी जाती है, जो इस विषय पर लिखी गई सबसे प्रारंभिक तफ़्सीरों में से एक है।
इसकी एक भारतीय पांडुलिपि (मैन्युस्क्रिप्ट) अब भी सुरक्षित है, जो क़ुरआन की सूरह 52:13 तक पहुँचती है। इसे इम्तियाज़ अली अरशी ने 1965 ईस्वी में प्रकाशित किया था।
इसके अलावा, तबारी की प्रसिद्ध तफ़्सीर में भी इस पूरी तफ़्सीर से कई उद्धरण (quotes) मिलते हैं। उन्होंने अपने उम्मयद काल के विद्वानों की कई पुस्तकों को भी संरक्षित (preserve) किया।