सिलसिला (1981 फ़िल्म)

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सिलसिला
सिलसिला (फ़िल्म).jpg
सिलसिला का पोस्टर
निर्देशक यश चोपड़ा
निर्माता यश चोपड़ा
लेखक रोमेश शर्मा (संवाद निर्देशक)
पटकथा सागर सरहदी
यश चोपड़ा
कहानी प्रीति बेदी
अभिनेता अमिताभ बच्चन,
जया बच्चन,
शशि कपूर,
रेखा,
संजीव कुमार
संगीतकार शिव-हरि
संपादक केशव नायडू
प्रदर्शन तिथि(याँ) 14 अगस्त, 1981
समय सीमा 180 मिनट
देश भारत
भाषा हिन्दी

सिलसिला 1981 में बनी हिन्दी भाषा की रूमानी नाट्य फ़िल्म है। इसका निर्देशन यश चोपड़ा ने किया और इसमें अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, रेखा, संजीव कुमार और शशि कपूर मुख्य कलाकार हैं। यह फिल्म उस समय के तीन सितारों अमिताभ-जया-रेखा के वास्तविक जीवन के कथित प्रेम त्रिकोण से बहुत प्रेरित है, जो उस समय के प्रेम प्रसंगों में सबसे चर्चित था।[1]

अमिताभ बच्चन और रेखा की यह आखिरी फिल्म रही, जिससे इस लोकप्रिय ऑन-स्क्रीन जोड़ी का अंत हो गया और उनके प्रेम-प्रसंग की अफवाह भी खत्म हो गई।[2] यह अमिताभ बच्चन की जया बच्चन के साथ भी आखिरी फिल्म थी, जब तक कि वे 20 साल बाद करण जौहर की फिल्म कभी खुशी कभी ग़म... (2001) में एक साथ फिर दिखाई नहीं दिए। इस फिल्म के बाद, जया बच्चन ने अभिनय से संन्यास ले लिया और हज़ार चौरासी की माँ (1998) से 18 साल बाद वापसी की।

फिल्म बॉक्स ऑफिस पर व्यावसायिक रूप से असफल रही थी। हालांकि, अब वर्षों बाद, फिल्म को क्लासिक माना जाने लगा है और आज इसे यश चोपड़ा की सर्वश्रेष्ठ कृतियों में से एक माना जाता है। फिल्म की रिलीज पर फिल्म का साउंडट्रैक "सुपर-हिट" बन गया था और अब भी लोकप्रिय है।

संक्षेप[संपादित करें]

छोटी उम्र में अनाथ होने पर, भाई शेखर मल्होत्रा (शशि कपूर) और अमित मल्होत्रा (अमिताभ बच्चन) स्वतंत्र जीवन जीते हैं। शेखर भारतीय वायु सेना में दस्ते का नेता है, और अमित उभरता हुआ लेखक है। शेखर को प्यारी शोभा (जया बच्चन) से प्यार हो जाता है, जबकि अमित आकर्षक चाँदनी (रेखा) को लुभाना चाहता है। अमित को दिल्ली में एक नाटककार के रूप में पेशेवर सफलता मिलती है। वह दिल्ली के बौद्धिक अभिजात वर्ग में सफलता का आनंद लेता है। अपने शिल्प के प्रति उसकी लगन और समर्पण, चाँदनी के स्नेह को जीत लेती है और वे एक संक्षिप्त, आनंदमय प्रेमालाप साझा करते हैं।

चाँदनी के माता-पिता उसकी शादी अमित से कराने की तैयारी करते हैं। शेखर और अमित दोनों एक ही समय में शादी करने की योजना बनाते हैं, लेकिन शेखर पाकिस्तान वायु सेना (पीएएफ) के खिलाफ हवाई लड़ाई में मारा जाता है, जिससे गर्भवती शोभा पीछे रह जाती है। शोभा पर दया करते हुए, अमित उससे शादी कर लेता है और चाँदनी को उसे भूलने के लिए कहता है। यह खबर चाँदनी का दिल तोड़ देती है। वह डा. वी. के. आनंद (संजीव कुमार) से शादी कर लेती है, जो उससे प्यार करता है।

शोभा एक कार दुर्घटना में अपने बच्चे को खो देती है। कोई बच्चा उन्हें एक साथ बांधने के लिए अब नहीं होता है और अमित और शोभा अलग होने लगते हैं। अमित को चाँदनी मिल जाती है और वे चुपके से अपने प्रेम-प्रसंग को फिर से जागृत करते हैं। लेकिन इस चक्कर की गोपनीयता खतरे में होती है। पुलिस निरीक्षक (कुलभूषण खरबंदा) जो शोभा का चचेरा भाई है, चाँदनी के साथ अमित के चक्कर का पर्दाफाश करने के लिए दृढ़ होता है। जल्द ही, अमित फैसला करता है कि वह अब शोभा से अपनी प्रेमहीन शादी को जारी नहीं रख सकता है और चाँदनी के साथ सुलह करना चाहता है। यह खबर शोभा को पता चलती है, वह मानती थी कि अगर उसका प्यार सच्चा है तो वह उसके पास लौट आएगा।

इसी तरह, चाँदनी के पति डॉ. आनंद को चाँदनी की बेवफाई के बारे में पता चलता है। डॉ. आनंद एक व्यावसायिक यात्रा पर निकलते हैं और चाँदनी को आश्वासन देते हैं कि वह जल्द ही वापस आएंगे। अमित और चाँदनी एक नए जीवन की शुरुआत करने के लिए शहर छोड़ देते हैं। लेकिन डॉ. आनंद का प्लेन क्रैश हो जाता है, जिससे प्रेमी जो हेलिकॉप्टर से भाग रहे थे, मलबे वाली जगह पर पहुँचते हैं। डॉ. आनंद को बचाते समय अमित का सामना शोभा से होता है। उसे पता चलता है कि वह उसके बच्चे की माँ बनने वाली है। जब डॉ. आनंद को मलबे से बचाया जाता है, तो चाँदनी को अपने पति के लिए अपने प्यार का एहसास होता है। फिल्म का अंत अमित और शोभा के विवाह में खुशी दिखाकर होता है।

मुख्य कलाकार[संपादित करें]

संगीत[संपादित करें]

इसका संगीत पक्ष भी रोचक था तथा इस फ़िल्म में संगीत किसी फ़िल्मी संगीतकार के बजाय प्रसिद्ध बांसुरीवादक हरिप्रसाद चौरसिया तथा प्रसिद्ध संतूरवादक पंडित शिव कुमार शर्मा ने दिया था। फ़िल्म के गाने उस समय बहुत हिट हुए थे और आज भी सुने जाते हैं। फ़िल्म में कुल 7 गाने थे -

सभी शिव-हरि द्वारा संगीतबद्ध।

क्र॰शीर्षकगीतकारगायकअवधि
1."नीला आसमाँ सो गया" (I)जावेद अख्तरअमिताभ बच्चन4:34
2."लड़की है या शोला"राजेन्द्र कृष्णकिशोर कुमार, लता मंगेशकर3:58
3."नीला आसमाँ सो गया" (II)जावेद अख्तरलता मंगेशकर5:28
4."देखा एक ख्वाब"जावेद अख्तरकिशोर कुमार, लता मंगेशकर5:20
5."रंग बरसे भीगे चुनरवाली"हरिवंश राय बच्चनअमिताभ बच्चन6:06
6."सर से सरके"हसन कमालकिशोर कुमार, लता मंगेशकर5:41
7."जो तुम तोड़ो पिया"मीरा बाईलता मंगेशकर3:35
8."खुद से जो वादा किया"निदा फाजलीपामेला चोपड़ा4:06
9."ये कहाँ आ गये हम"जावेद अख्तरअमिताभ बच्चन, लता मंगेशकर7:34

नामांकन और पुरस्कार[संपादित करें]

प्राप्तकर्ता और नामांकित व्यक्ति पुरस्कार वितरण समारोह श्रेणी परिणाम
अमिताभ बच्चन फिल्मफेयर पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार नामित
जया बच्चन फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार नामित
शिव-हरि फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक पुरस्कार नामित

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "अमिताभ-रेखा और जया की असल जिंदगी का 'सिलसिला' इन्होंने पर्दे पर उतारा". एनडीटीवी इंडिया. 27 सितंबर 2017. अभिगमन तिथि 13 मार्च 2019.
  2. चौहान, शिवांगी (31 जनवरी 2019). "जब रेखा से टकराए अमिताभ बच्चन, न तो एक-दूसरे को देखा न ही की आपस में बात, वो 4 मौके जब आमने सामने आए दोनों". दैनिक भास्कर. अभिगमन तिथि 13 मार्च 2019.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]