सीधी कार्यवाही दिवस

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सीधी कार्यवाही दिवस (डायरेक्ट एक्शन डे ) अथवा प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस १६ अगस्त १९४६ [1]को मुस्लिम लीग द्वारा अलग इस्लामिक राष्ट्र के लिए चलाया जाने वाला हिंसक आंदोलन था।

भारत की आजादी से पहले हिन्दू धर्म और मुस्लिम धर्म के लोगों के बीच फूट डालो और राज करो की नीति के कारण बहुत अविश्वास हो चुका था और कुछ मुस्लिम नेताओं ने समझ लिया था कि एक बड़े कदम उठाने पर उनका एक बड़ी आबादी पर प्रभाव हो जायेगा और फिर उनको सत्ता मिल जायेगी और फिर उन्होंने मारकाट करने वाले इस आतंकवादी हमले करने के कदम की ओर उकसाया और फिर मुसलमानों द्वारा हिन्दूओ के जान और माल पर हमले किए गए। १६ अगस्त, १९४६ को मुस्लिम लीग द्वारा घोषित प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस पर हजारों लोगों की मौत हो गई थी। पूरे देश दंगों की आग में जल उठा था। मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदू और हिंदूओं के इलाकों में मुसलमानों की हत्या आम बात हो गई थी। इस बीच, ब्रिटेन के वाइसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने ३ जून,१९४७ को ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य के विभाजन की घोषणा की।

पृष्ठभूमि[संपादित करें]

हिंसा के लिए जिम्मेदार नेता[संपादित करें]

16 अगस्त 1946 को मो° जिन्ना द्वारा मुस्लिमों को सीधी कारवाई करने का निर्देश दिया गया, जिसमे सिर्फ बंगाल में मुस्लिमों ने 20000 हिंदुओं को मार डाला था। सड़को पर बिखरी हुई हिंदुओं की लाशों को गिद्ध नोचते थे। इतिहास में ये दिन "प्रत्यक्ष कार्यवाही" दिवस के रूप में दर्ज है।

घटनाक्रम[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

कलकत्ता दंगा

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. https://navbharattimes.indiatimes.com/photomazza/national-international-photogallery/-/photomazaashow/3368223.cms स्वतन्त्रता की यात्रा