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सिद्ध सिद्धान्त

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सिद्ध सिद्धान्त, शैव दर्शन की छह मुख्य परम्पराओं में से एक है। गुरु गोरखनाथ ने इसकी स्थापना की थी। इसलिये इसे "गोरक्षनाथ के शैववाद" के रूप में भी जाना जाता है।[1]

'सिद्धसिद्धान्तपद्धति' अर्थात्‌ सिद्ध योगियों के निश्चित मार्ग पर चलना । सिद्धसिद्धान्तपद्धति के लेखक गुरु गोरक्षनाथ हैं। इसमें छः अध्याय या उपदेश हैं।

1. पिण्ड उत्पति विचार 2, पिण्ड विचार 3. पिण्ड ज्ञान 4. पिण्ड धारा 5. समरसता 6. अवधूत की विशेषता

सन्दर्भ

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  1. "Siddha Siddhanta". Hinduism Today. March 1994. अभिगमन तिथि: 10 July 2017.

बाहरी कड़ियाँ

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