सिकरवार

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सिकरवार राजपूतों का एक वंश है, जो राजस्थान के सीकर जिले से संबंधित है, सन् 823 ई॰ में आगरा के पास ख्वाण सिंह सिकरवार ने विजयपुर सिकरी की स्थापना की, इंटरनेट पर मिले साक्ष्यों और 'धामदेव प्रदीपिका' नामक किताब से पता चलता है कि विजयपुर सिकरी के राजा "राव जयराम सिंह सिकरवार" के तीन पुत्र थे, राजा कामदेव सिंह सिकरवार, राजा धामदेव राव सिकरवार और विराम सिंह सिकरवार है|

"राजा कामदेव सिंह सिकरवार ने अपना निवास स्थान मध्यप्रदेश के मुरैना जिले को बनाया| इनके वंशजों को "चम्बल घाटी का सिकरवार" कहा जाता है| "राजा रतन सिंह" के सेनापति "गोरा सिंह" और "बादल सिंह", इसी वंश के लड़ाके थे| इनके बारे में कहा जाता है कि सर कटने के बाद भी इन्होंने खिलजी की सेना को धुल चटाया था| चम्बल का प्रसिद्ध बांका " रमेश सिंह सिकरवार" को गरीबों का मसीहा माना जाता है|

"राजा धामदेव राव सिकरवार" , "राणा सांगा केे प्रिय मित्र थे| बाबर के खिलाफ खानवा के युद्ध में इन्होंने राणा सांगा की मदद की थी| इनकी और राणा सांगा की सम्मिलित शक्ति के आगे बाबर की सेना हताश होने लगी थी, तब बाबर ने धोखे से वार करके राणा सांगा की जान ले ली, इससे उनके सहयोगी सिकरवारों का मनोबल टूट गया| सिकरवारों के राजा "बाबा धामदेव राव" ने अपनी प्रजा की रक्षा के लिए वहाँ से अपने लोगों के साथ हटने का फैसला लिया|उस रात कुलदेवी मां कामाख्या उनके सपने में आईं और उन्हें काशी की ओर प्रस्थान करने का आदेश दिया तब बाबा धामदेव राव चलते चलते पूर्वी उत्तर प्रदेश के वर्तमान गहमर गांव के जगह पर पहुँचे, यहाँ क्रुर चेरु शाषक शशांक का राज था, उसे हराने के पश्चात ये जगह उन्हें दैवीय प्रतित हुई| यहाँ उन्होंने अपनी कुलदेवी माँ कामख्या का मंदिर स्थापित किया और अपने लोगों के साथ यहीं बस गये| वर्तमान में सिकरवार राजपूत गहमर के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लगभग 84 गांवो में निवास करते हैं|

संदर्भ[संपादित करें]

धामदेव प्रदीपिका