सामग्री पर जाएँ

सिंती

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
दक्षिणी जर्मनी के सिंती लोगों को नाजी शासन के दौरान निर्वासित किया गया

सिंती (रोमानी: Sinti) एक जातीय समूह है, जो मुख्यतः यूरोप में निवास करता है और व्यापक रूप से रोमा समुदाय का एक उपसमूह माना जाता है। ऐतिहासिक एवं भाषाई साक्ष्यों के आधार पर माना जाता है कि सिंती लोगों की उत्पत्ति उत्तर-पश्चिमी भारत से हुई थी।

सिंती समुदाय आज मुख्य रूप से जर्मनी, इटली और फ्रांस में पाया जाता है, हालांकि वे यूरोप के अन्य देशों तथा अमेरिका में भी निवास करते हैं। उनकी भाषा को सिंती या सिंतेदिखेस कहा जाता है, जो रोमानी भाषा का एक रूप है और इसमें कई शब्द संस्कृत तथा अन्य भारतीय भाषाओं से मिलते हैं।

उत्पत्ति

[संपादित करें]

भाषाई और सांस्कृतिक समानताओं के आधार पर यह माना जाता है कि सिंती लोगों का मूल भारतीय उपमहाद्वीप से है। वे मध्यकाल में विभिन्न कारणों से यूरोप की ओर प्रवास कर गए।

यूरोप में सिंती समुदाय का पहला लिखित उल्लेख 15वीं शताब्दी में मिलता है, विशेषकर जर्मनी और इटली में।

जनसंख्या और वितरण

[संपादित करें]

अनुमानों के अनुसार, विश्वभर में सिंती लोगों की संख्या लगभग 2 लाख के आसपास है। वे मुख्यतः निम्न देशों में पाए जाते हैं:

मध्यकालीन यूरोप में सिंती समुदाय को सामाजिक भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उन्हें अक्सर समाज के मुख्यधारा से अलग रखा गया और कई स्थानों पर उनके निवास एवं आवागमन पर प्रतिबंध लगाए गए।

नाजी काल में उत्पीड़न

[संपादित करें]

नाज़ी जर्मनी के शासनकाल (1933–1945) में सिंती और रोमा समुदाय को नस्लीय आधार पर गंभीर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। हजारों लोगों को आउशवित्स जैसे यातना शिविरों में भेजा गया और बड़ी संख्या में उनकी हत्या कर दी गई। इस घटना को रोमा और सिंती होलोकॉस्ट (Porajmos) के रूप में जाना जाता है।

सिंती समुदाय की भाषा रोमानी भाषा का एक रूप है, जिसमें भारतीय भाषाओं, विशेष रूप से संस्कृत और प्राकृत के शब्दों का प्रभाव देखा जाता है। यह भाषा आज विलुप्त होने के खतरे में मानी जाती है।

यह भी देखें

[संपादित करें]

सन्दर्भ

[संपादित करें]