सायर जयपाल

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

सायर जयपाल मेघवाल समुदाय के मेघवंशी जाति के व्यक्ति थे तथा पोखरन के जागीरदार राजा अजमल सिँह तंवर के घोड़ो को चराते थे| अवतारी बाबा रामदेव पीर का अवतरण (जन्म) उनके घर हुआ था। जिसे अवतार बताया गया जो एक रहस्य है।[1]

रहस्य[संपादित करें]

बाबा रामदेव के जन्म के इतिहास में इस महान रहस्य को छिपाया गया है। जिसमें बाबा रामदेव पीर का अवतार राजा अजमल तथा माता मेणादे बताया गया है। बिना मां की कोख से किसी बच्चे का जन्म हो सकता है। बाबा रामदेव का अवतार नहीँ जन्म हुआ था। जो प्रसिद्ध इतिहासकार रामचन्द्र कड़ेला ने 'अवतारवाद के शिकार लोक क्रान्तिकारी महामानव-बाबा रामसापीर' नामक अपनी कृति मे लिखा है। "सायर सुत मंगनी रा जाया, ज्यारी महिमा भारी, भेंट कियो सुत अजमलजी ने, सायर ने बलिहारी | मेघरिखा संग तंवर वंश रा, भाग जागिया भारी, दुनिया जाणे रामदेवजी ने अजमल घर अवतारी." || इस रहस्य से सबसे पहले पर्दा जोधपुर के उत्तम आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी रामप्रकाशाचार्य जी ने अपनी किताब "रामदेव गप्प पुराण" तथा "ढोल में पोल" में किया। जिसमें बाबा रामदेव का जन्म सायर मेघवंशी के घर माता मंगनी की कोख से हुआ बताया गया। प्रसिद्ध दलित लेखिका कुसुम मेघवाल ने अपनी पुस्तक 'मेघवाल बाबा रामदेव' वर्ष 2006 में एक शोध ग्रन्थ - 'रामदेव पीर' एक पुनर्विचार में प्रकाशित हुआ जिसमें एक बात समान थी। सायर जयपाल मेघवाल तथा माता मगनी देवी थे। तथा बाड़मेर जिले के उण्डू काश्मीर गांव के रहने वाले थे। उण्डू काश्मीर में बाबा रामदेव का सायर मेघवाल के घर जन्म है। डाली बाई बाबा रामदेव की सगी बहन है।

बाबा रामदेव पीर के जन्म सम्बंधित मामला राजस्थान उच्च न्यायालय में गया[कृपया उद्धरण जोड़ें] जहा से फैसला मेघवाल समुदाय के पक्ष में हुआ।[कृपया उद्धरण जोड़ें] बाबा रामदेव मेघवाल है और वे सायर मेघवाल के पुत्र है।

सन्दर्भ[संपादित करें]