सामूहिक पूजन

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यूरोप के स्लोवाकिया देश में एक ईसाई पादरी सामूहिक पूजन समारोह का संचालन करते हुए

सामूहिक पूजन (अंग्रेज़ी: liturgy) किसी धार्मिक समुदाय के लोगों द्वारा अपनी मान्यताओं के अनुसार पारम्परिक व औपचारिक रूप से मंदिर या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर एकत्रित होकर पूजा समारोह में भाग लेने की क्रिया को कहते हैं। कई धार्मिक सम्प्रदायों में इसका बहुत महत्व होता है। मसलन कैथोलिक ईसाई मत में "मॉस" (mass) प्रचलित है जिसमें अनुयायी किसी गिरजे में सभा बनाकर एक पादरी के नेतृत्व में पूजा करते हैं। इसी तरह आर्य समाज में हवन और अन्य हिन्दू समुदायों में सामूहिक पूजा, भजन व कीर्तन होता है।[1]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Baldovin, John F., SJ (2008) Reforming the Liturgy: a Response to the Critics. The Liturgical Press