साधारण गेहूँ
| साधारण गेहूँ | |
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| वैज्ञानिक वर्गीकरण | |
| Unrecognized taxon (fix): | ''ट्रिटिकम'' |
| जाति: | Template:Taxonomy/''ट्रिटिकम''एस्टिवम |
| द्विपद नाम | |
| Template:Taxonomy/''ट्रिटिकम''एस्टिवम एल. | |
| पर्यायवाची | |
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साधारण गेहूँ (ट्रिटिकम एस्टिवम) एक कृषित गेहूँ प्रजाति है।[1] इसे ब्रेड गेहूँ भी कहा जाता है। विश्व में उत्पादित गेहूँ का लगभग 95% भाग इसी प्रजाति का है;[2] क्षेत्रफल की दृष्टि से (सन् 2009 के अनुसार) यह सबसे अधिक उगाई जाने वाली फसलों में से एक है और आर्थिक दृष्टि से सर्वाधिक मूल्य देने वाला अनाज है।
वर्गीकरण
[संपादित करें]मानव चयन के कारण गेहूँ के अनेक रूप विकसित हुए हैं। इस विविधता ने नामकरण में भ्रम उत्पन्न किया है, क्योंकि नामकरण आनुवंशिक तथा आकारिक विशेषताओं दोनों पर आधारित रहा है।
सामान्य किस्मों की सूची
[संपादित करें]वंशावली
[संपादित करें]ब्रेड गेहूँ एक एलोहेक्साप्लॉइड है, अर्थात इसमें विभिन्न प्रजातियों से प्राप्त छह गुणसूत्रीय सेट होते हैं। इनमें से चार सेट ट्रिटिकम तुर्गिडम (एमर गेहूँ, जो स्वयं एक टेट्राप्लॉइड है) से और दो एजीलॉप्स टॉशीआई नामक जंगली डिप्लॉइड बकरीघास से प्राप्त हुए हैं। जंगली एमर का उद्भव दो डिप्लॉइड—जंगली ट्रिटिकम उरार्टु और एजीलॉप्स स्पेल्टोइड्स—के बीच एक पूर्ववर्ती संकरण से हुआ।[4][2]
मुक्त-दंवनी गेहूँ का स्पेल्ट से घनिष्ठ संबंध है। एजीलॉप्स टॉशीआई से प्राप्त जीन ब्रेड गेहूँ को अधिक शीत-सहिष्णु बनाते हैं, जिसके कारण इसका व्यापक उत्पादन समशीतोष्ण क्षेत्रों में होता है।
खेती
[संपादित करें]इतिहास
[संपादित करें]साधारण गेहूँ का प्रथम घरेलूकरण प्रारंभिक होलोसीन काल में पश्चिम एशिया में हुआ और वहाँ से यह उत्तर अफ्रीका, यूरोप तथा पूर्वी एशिया तक फैला।रोमन कालीन समाधियों (100 ईसा पूर्व–300 ईस्वी) में नग्न गेहूँ की प्रजातियाँ पाई गई हैं।[5]
16वीं शताब्दी में स्पेनी मिशनों के माध्यम से गेहूँ उत्तर अमेरिका पहुँचा। सन् 1870 के दशक में प्रेयरी क्षेत्रों के उपनिवेशीकरण के पश्चात उत्तर अमेरिका प्रमुख निर्यातक बना। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रूस से निर्यात रुकने पर कैनसस में उत्पादन में तीव्र वृद्धि हुई।
आधुनिक औद्योगिक रोटी निर्माण के लिए यह प्रजाति अत्यंत उपयुक्त सिद्ध हुई और इसने जौ तथा राई जैसी अन्य अनाज प्रजातियों का स्थान ले लिया।
पादप प्रजनन
[संपादित करें]आधुनिक किस्में छोटे तनों के लिए विकसित की गई हैं, जो आरएचटी बौनेपन जीनों के कारण संभव हुआ।[6] ये जीन पौधे की जिबरेलिक अम्ल के प्रति संवेदनशीलता घटाते हैं। सन् 1960 के दशक में नॉर्मन बोरलॉग ने जापान की नोरिन 10 किस्मों से इन जीनों को आधुनिक गेहूँ में सम्मिलित किया। छोटे तने आवश्यक हैं क्योंकि अधिक उर्वरकों के प्रयोग से लंबे तने गिर सकते हैं।
अन्य रूप
[संपादित करें]ट्रिटिकम कॉम्पैक्टम (संपीड़ित गेहूँ) साधारण गेहूँ से निकट संबंध रखता है, किंतु इसकी बालियाँ अधिक सघन होती हैं। इसके रैचिस खंड छोटे होते हैं, जिससे स्पाइकलेट निकट स्थित होते हैं। सामान्यतः इसे उपप्रजाति (ट्रिटिकम एस्टिवम उपप्रजाति कॉम्पैक्टम) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।[उद्धरण चाहिए]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Brenchley, R. (2012). "Analysis of the bread wheat genome using whole-genome shotgun sequencing". Nature. 491 (7426): 705–10. डीओआई:10.1038/nature11650. पीएमआईडी 23192148.
- 1 2 मेयेर, के॰एफ॰एक्स॰ (2014). "A chromosome-based draft sequence of the hexaploid bread wheat (Triticum aestivum) genome" (PDF). साइंस. 345 (6194) 1251788. डीओआई:10.1126/science.1251788. पीएमआईडी 25035500. एस2सीआईडी 206555738.
- 1 2 Sanità di Toppi, Luigi; Castagna, Antonella; Andreozzi, Emanuele; Careri, Maria; Predieri, Giovanni; Vurro, Emanuela; Ranieri, Annamaria (मई 2009). "Occurrence of different inter-varietal and inter-organ defence strategies towards supra-optimal zinc concentrations in two cultivars of Triticum aestivum L." Environmental and Experimental Botany (अंग्रेज़ी भाषा में). 66 (2): 220–229. डीओआई:10.1016/j.envexpbot.2009.02.008.
- ↑ Mondal, Suchismita; Rutkoski, Jessica E.; Velu, Govindan; Singh, Pawan K.; Crespo-Herrera, Leonardo A.; Guzmán, Carlos; Bhavani, Sridhar; Lan, Caixia; He, Xinyao (2016-07-06). "Harnessing Diversity in Wheat to Enhance Grain Yield, Climate Resilience, Disease and Insect Pest Resistance and Nutrition Through Conventional and Modern Breeding Approaches". Frontiers in Plant Science. 7. डीओआई:10.3389/fpls.2016.00991. आईएसएसएन 1664-462X. पीएमसी 4933717. पीएमआईडी 27458472.
{{cite journal}}: CS1 maint: unflagged free DOI (link) - ↑ Rottoli, Mauro (2011). "Plant offerings from Roman cremations in northern Italy". Vegetation History and Archaeobotany. डीओआई:10.1007/s00334-011-0293-3.
- ↑ "Rht dwarfing genes in wheat". Theoretical and Applied Genetics. डीओआई:10.1007/s00122-002-1048-4.