सांचोर

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स्रोत- वाल्मीकि रामायण

सांचौर
—  शहर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य राजस्थान
सांसद देवजी एम. पटेल
विधायक सुखराम बिश्नोई
नगर पालिका अध्यक्ष निता मेघवाल
जनसंख्या 25,881 (1) (2001 के अनुसार )
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• 140 मीटर (459 फी॰)

निर्देशांक: 24°36′N 72°00′E / 24.6°N 72°E / 24.6; 72 सांचोर राजस्थान राज्य का एक एतिहसिक कस्बा है। यह कस्बा प्राचीनकाल मे 'सत्यपुर' के नाम से जाना जाता था।

जो जालौर ज़िले में स्थित है। प्राचीन काल में यह क़स्बा 'सत्यपुर' के नाम से विख्यात था। इसका जैन ग्रंथ ‘विविधतीर्थ कल्प’ में जैनतीर्थ के रूप में वर्णन है।

  • जैन तीर्थंकर महावीर का एक प्राचीन मन्दिर यहां स्थित है। प्राचीन काल में सत्यपुर जैनों का महत्वपूर्ण स्थान था।[1]
  • 'विविधतीर्थ कल्प' के अनुसार यहां 24वें तीर्थंकर महावीर का एक मंदिर था, जिसे किसी मुसलमान सुल्तान ने गुजरात पर आक्रमण के समय तोड़ना चाहा था।
  • मालवा के राजा ने भी सत्यपुर पर आक्रमण किया था, किंतु उसकी सेना को 'ब्रह्मशांति' नामक यक्ष ने परास्त कर दिया था और इस प्रकार सत्यपुर की रक्षा हुई थी।
  • जैन स्तोत्र 'तीर्थमालाचैत्यवंदन' में भी इस नगर का उल्लेख है।
  • प्राचीन सत्यपुर ही वर्तमान सांचोर है। प्राकृत ग्रंथों में इसे 'सच्चैर' कहा गया है-

'वंदे सत्यपुरे च बाहडपुरे राडद्रहे बायडे'

  • महावीर स्वामी के शिष्य द्वारा रचित 'जगचिंतामणि चैत्यवंदन' में भी इसका नामोल्लेख है।
  • भारत का राष्ट्रीय राजमार्ग-67 इस कस्बे से होकर गुजरता है। सभी ब्लॉक मुख्यालय बस सेवा द्वारा जुड़े हुए हैं।


प्रमुख व्यक्ति 1 देवजी एम पटेल वर्तमान सासंद 2 सुखराम विश्नोई विधायक एवम वन एवं पर्यावरण मंत्री तथा खाद्य व उपभोक्ता मामले स्वतन्त्र प्रभार राजस्थान सरकार 3 जीवाराम चौधरी पूर्व विधायक BJP, निर्दलीय 4 हीरालाल विश्नोई पूर्व विधायक कांग्रेस

दूरियाँ[संपादित करें]

राष्ट्रीय राजमार्ग 67 इस क़स्बे से होकर गुजरता है। सभी ब्लॉक मुख्यालय बस सेवा से जुड़े हुए हैं। नजदीकी रेलवे स्टेशन भीनमाल और रानीवाड़ा है जो क्रमशः 60 और 40 km दूर है ।

व्यापार[संपादित करें]

यह पर लोगो का मुख्य कार्य कृषि है । और यहां रीको एरिया माखपुर में बड़े बड़े स्टील, लोहे,व पानी के RO प्लांट भी है। यहां पर बाबा रघुनाथपुरी मेला माखपुरा भी विख्यात है।यह पर पूरे राजस्थान से पशुपालक ऊंट,बेल,घोड़े आदि बेचने व खरीदने आते है।यह मेला हर साल चेत्र महीने में लगता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]