साँचा वार्ता:मेल एक्स्प्रेस

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यह पृष्ठ साँचा:मेल एक्स्प्रेस पन्ने के सुधार पर चर्चा करने के लिए वार्ता पन्ना है। यदि आप आप अपने संदेश पर जल्दी सबका ध्यान चाहते हैं, तो यहाँ संदेश लिखने के बाद चौपाल पर भी सूचना छोड़ दें।

यह वार्ता चौपाल से यहां स्थानांतरित की गई है।

मैंने भारतीय रेल की सभी (उपलब्ध) शताब्दी एक्स्प्रेस, जनशताब्दी एक्स्प्रेस मेल एक्स्प्रेस ट्रेन, गरीब रथ, संपर्क क्रांति राजधानी एक्स्प्रेस आदि रेलगाड़ियों के लेख बनाए हैं, व कुछ मेल एक्स्प्रेस बाकी हैं। वे भी जल्दी ही बन जाएंगे। इसके बाद पैसेंजर गाड़ियां भी बन जाएंगीं। लेकिन अन्य सभी गाड़ियों के सांचे तो बन गए। किंतु साँचा:मेल एक्स्प्रेस १६०० गाड़िओं के कारण अत्यधिक लंबा हो गया है। सभी प्रबंधकों एवं सदस्यों से सुझाव अपेक्षित हैं, कि इन मेल एक्स्प्रेस गाड़ियों को किस प्रकार वर्गीकृत किया जाए। जिससे कि यह सांचा अलग अलग वर्गों/श्रेणियों में बंट कर छोटा बन पाए।

इन्हें ट्रेन संख्या के आधार पर बांट पाना बेकार होगा, क्योंकि किसी को भी कोई गाड़ि संख्या से पता या याद नहीं होती है। इन्हें शहर के नाम से बांटें, तो बहुत से वर्ग बन जाएंगे, व प्रत्येक गाड़ी दो वर्गों में जाएगी। इन्हें नाम के वर्णक्रम में बांटें तो कई गाड़ियों के एक से अधिक नाम भी हैं। और कई गाड़ियों के एक से मिलते हुए नाम हैं, जैसे ४२२९ एवं ४२३० को लखनऊ मेल एवं दिल्ली मेल कहा जाता है, एवं ४२०७ एवं ४५५५ दिल्ली एक्स्प्रेस हैं।

कृपया सुझाव दें। एवं शीघ्रातिशीघ्र दें। --आशीष भटनागरसंदेश ०५:४०, २३ मई २००९ (UTC)


जी हाँ जब मैने इस साँचे को देखा था तो मुझे भी लगा था कि यह बहुत लंबा और कुछ अव्यस्थित सा है। इसके लिए मेरे कुछ सुझाव इस प्रकार हैं:
(१) इसे हिन्दी वर्ण माला के अनुसार क्रमित किया जाए। एक-एक अक्षर ना भी करें तो समूह में कर सकते हैं जैसे अ-उ तक फिर ऊ-ओ तक ऐसे। इससे सभी अक्षरों में लिखने से बचा जा सकेगा और अक्षर स्मूह तो जाहिर सी बात है अक्षरों से कम ही होंगे। या
(२) इन रेलगाड़ियों को इनके उद्गम स्थल (शहर) के नाम पर वर्गीकृत कर दिया जाए, और शहरों के नाम हिन्दी वर्णमाला क्रम से हो। वैसे ये अधिक उपयुक्त भी होगा क्योंकि हर किसी को रेलगाड़ी का नाम या संख्या तो याद नहीं होगी लेकिन शहर के नामानुसार कोई भी ये देख सकता है कि कहाँ से कौन सी रेलगाड़ी लगती है। या
(३) रेलवे जोन के अनुसार भी वर्गीकृत कर सकतें है। वैसे भी भारत में शायद रेलवे के ९ ही जोन हैं। इन सभी जोनों के अनुसार यहाँ से आरंभ होने वाली रेलगाड़ियों के नामों को वर्गीकृत कर दिया जाए। या
(४) राज्यों के अनुसार भी वर्गीकरण किया जा सकता है।
मेरे अनुसार तो राज्यों या जोनों के अनुसार ठीक रहेगा क्योंकि शहर तो बहुत सारे हैं लेकिन राज्य भी अधिकतम २८ ही हैं। रोहित रावत ०९:२२, २३ मई २००९ (UTC)
आशीष जी मेरे सु़झाव भी रोहितजी से मेल खाते है| अगर आप को ICAO का सांचा याद हो, इस सांचे मे भी वर्ण माला के अनुसार विमानक्षेत्रो को वर्गीकृत किया गया था| इस परियोजना के लिये हार्दिक शुभकामनाए --गुंजन वर्मासंदेश १०:३४, २३ मई २००९ (UTC)
आप लोगोँ के सुझाव देने का धन्यवाद, किंतु इन से यह निष्कर्ष निकलता है, कि
यदि ज़ोन के अनुसार बांटें, तो, एवं यदि राज्यों या शहरों के अनुसार बांटें तो भी प्रत्येक गाड़ी अपने उद्गम एवं गंतव्य के अनुसार दो-दो जगहों पर नाम आएगा। यदि नाम के आधार पर बांटें, तो गाड़ियों के नाम भी एक से अधिक हैं, जैसे लखनऊ-दिल्ली मेल या दिल्ली लखनऊ मेल।
हां यदि और कोई उपाय नहीं निकलता है, तब राज्यों के अनुसार ही बांटेंगे। क्योंकि ज़ोन का आइडिया सभी लोगों को नहीं होगा।
पर यदि कोई और बेहतर उपाय मिल पाए, तो पहले उसे देखते हैं। आगे भी सुझाव अपेक्षित हैं। विमानक्षेत्रों और गाड़ियों की संख्या में बहुत ही फर्क है। ये १६०० तो वे ९०। आगे यदि संभव हो तो चौपाल पर ही वार्ता जारी रखें, : लगा कर।--आशीष भटनागरसंदेश १३:४१, २३ मई २००९ (UTC)
मेरे विचार में ज़ोनों के आधार पर वर्गीकृत करने पर एकमात्र समस्या ये रह जाएगी हर गाड़ी दो ज़ोन्स में आएगी । इससे निजात के लिए उस ज़ोन का प्रयोग किया जा सकता है जिससे इसका अप नंबर आरंभ होता है । जैसे गाड़ी संख्या ५५२३ और ५५२४ को ५५२३ के उद्गम ज़ोन के अनुसार ही रखें । नाम के आधार पर बाँटना भी बुरा नहीं और अधिक मान्य नामों का प्रयोग करने, और अप-डाउन क्रम में रखने से एकाधिक नामों की समस्या को दूर किया जा सकता है । थोड़ी रिसर्च की जरूरत है यहाँ, पर काम अत्यधिक मुश्किल नहीं । भारतीय रेल:एक दृष्टि में पुस्तिका से पूर्ण जानकारी मिल सकती है । राज्यों के अनुसार या शहरों के मुताबिक सजाने से यह अत्यधिक बड़ा लगेगा । एक बात और, काम की शुरुआत की मैं सराहना करता हूँ ।--अमित प्रभाकर ०७:५७, २४ मई २००९ (UTC)
मित्रवर, हमको इनको कई भागों में बाँट देना चाहिये, जैसे कि उत्तरी रेलवे, पश्चिमी रेलवे आदि। अन्यथा इसका प्रयोग काफी मुश्किल सा होगा। आप साँचा:एन एफ एल देखिये। उससे आपको संदाजा लगेगा कि मैं किस बारे मेई बात कर रहा हूँ। मनीष वशिष्ठवार्ता
उपरोक्त सुझावों में से ज़ोन के अनुसार बांटने वाला सुझाव सर्व सहमति वाला प्रतीत होता है। मेरे विचार से गाड़ियों को उनके उद्गम ज़ोन के हिसाब से बांट सकते हैं। इसके फायदे ये होंगे:
  • अधिकतम १६ ही भाग होंगे, जो कि एक सांचा संभाल सकता है।
  • राज्य २५ होंगे, किंतु ज़ोन मात्र १६ ही हैं।
  • बाद में चाहें तो एक सांचा राज्यों के हिसाब से भी बनाया जा सकता है।
  • इसके लिए मेरा बनाया हुआ साँचा:भारत के जिले देखें। साँचा:एन एफ एल का रूप इस के साथ सम्मिलित कर सकते हैं।
तो अंतिम निर्णय ज़ोन के हिसाब से तय करें क्या? एक अंतिम मुहर वांछित है।--आशीष भटनागरसंदेश १४:४७, २४ मई २००९ (UTC)
ज़रूर.... --अमित प्रभाकर १६:४१, २५ मई २००९ (UTC)