साँचा वार्ता:मारीशस के हिन्दी विद्वान

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इस साँचे को जल्दी में न हटाया जाय। हममें से अधिकांश को इन विद्वानों के बारे में कुछ भी पता नहीं है। अब देखिये न-

प्रा. वासुदेव विष्णुदयाल ने अकेले ही मारीशस में हिन्दी की इतनी सेवा की जितनी शायद कोई संस्था करती। जमाना के संपादक के अतिरिक्त उन्होंने लगभग ५०० पुस्तकें हिन्दी तथा अन्य भाषाओं में लिखीं।

५०० पुस्तकें लिखने वाला मामूली आदमी है? जिन विद्वानों के बारे में कुछ नहीं लिखा है, अच्छा यह होगा कि उनके बारे में जानकारी जुटाने का प्रयत्न किया जाय और लिखा जाय। हो सकता है किसी ने समय की कमी के कारण सबके बारे में चार-पाँच लाइने नहीं लिख सका।

--अनुनाद सिंह (वार्ता) 14:23, 5 अप्रैल 2016 (UTC)