साँचा:आज का आलेख १६ नवंबर २०१०

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अखरोट का तेल
आवश्यक वसीय अम्ल (अंग्रेज़ी:असेन्शियल फैटी एसिड, ई.एफ.ए) जिसे प्रायः विटामिन-एफ भी कह देते हैं, वसीय अम्ल (फैटी एसिड) से बना होता है। इसीलिए इसका नाम विटामिन-एफ पड़ा है। ये दो प्रकार के होते हैं - ओमेगा-३ तथा ओमेगा-६। इस विटामिन का मुख्य कार्य शरीर के ऊतकों का निर्माण और उनकी मरम्मत करना होता है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ.डी.ए.) विटामिन-एफ को अपने दिन के पूरे कैलोरी भुक्तक्रिया (इन्टेक) में से एक से दो प्रतिशत ग्रहण करने का सझाव देता है।इसके अलावा, शरीर के चयापचय, बालों तथा त्वचा के लिए भी विटामिन-एफ काफी लाभदायक होते हैं।[1] शरीर में जब भी कहीं चोट लगती है तो उससे त्वचा के ऊतकों को काफी हाणि पहुंचती है। विटामिन-एफ इन ऊतकों की मरम्मत कर उन्हें ठीक करते हैं। केवल दो प्रकार के आवश्यक वसीय अम्ल होते हैं: अल्फा-लिनोलेनिक अम्ल जो एक ओमेगा-३ वसीय अम्ल एवं लिनोलेनिक अम्ल जो एक ओमेगा-६ वसीय अम्ल है। [2][3][4] कुछ शोधकर्ता गामा लिनोलेनिक अम्ल (ओमेगा-६), लॉरिक अम्ल (संतृप्त वसीय अम्ल), एवं पामिटोलेइक अम्ल (एकलसंतृप्त वसीय अम्ल) को कुछ स्थितियों सहित आवश्यक मानते हैं। [5]  विस्तार में...
  1. विटामिन-एफ|हिन्दुस्तान लाइव|२२ जून, २०१०|सारांश जैन
  2. वाइटनी एली एण्ड रॉल्फ़्स एसआर उंडरस्टैण्डिंग न्यूट्रीशन, ११वां संस्करण, कैलीफोर्निया, थ्यॉमसन वैड्सवर्थ, २००८, पृ.१५४
  3. एनिग मैरी जी। नो योर फ़ैक्ट्स बेथीस्डा प्रेस, २००५।पृ.२४९
  4. बर्र, जी.ओ। बर्र एम.एम एण मिलर, ई। १९३०। "On the nature and role of the fatty acids essential in nutrition" (पीडीएफ़). जे.बायोल. कैम. ८६ (५८७) अभिगमन तिथि:१७ जनवरी, २००७
  5. एनिग २००५, पृ.२४९