सह-शिक्षा

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सह-शिक्षा से आभिप्राय है कि लड़के और लड़कियां दोनों ही एक साथ शिक्षा प्राप्त करें और वह भी एक ही विद्यालय मे और एक ही पाठ्यक्रम को पढ़ें।

सह-शिक्षा का समर्थन[संपादित करें]

जो लोग सह-शिक्षा का समर्थन करते हैं उनका दावा है कि सह-शिक्षा व्यक्तित्व, नेतृत्व विकास के साथ-साथ संप्रेक्षण क्षमता में सहायक है। वर्तमान युग में सह-शिक्षा आवश्यक है। सह-शिक्षा प्राप्त करने से विद्यार्थी अपने जीवन में अधिक सफल रहते हैं।[1] उनका कहना है कि हम पुरुषों और महिलाओं को हर संभव तरीके से एक साथ काम कर रहे हैं। जहां एक ऐसे समाज में रह रहे हैं, तो हम बहुत शुरुआत यानी बचपन से एक की धारणा में इस माहौल विकसित करने की जरूरत है।[2]

सह-शिक्षा का विरोध[संपादित करें]

इसके विपरीत , कुछ लोग जैसे कि हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी स्कूलों और कॉलेजों में को-एड (सह शिक्षा) की आलोचना करते हुए कहते हैं कि लड़के-लड़कियों को एक साथ पढ़ाकर जम्मू कश्मीर सरकार ' अनैतिक गतिविधियों ' को बढ़ावा दे रही है। गिलानी के अनुसार कि माता-पिता और बड़े लोगों को युवा लड़के-लड़कियों पर नजर रखनी चाहिए।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]