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सलीम चिश्ती की दरगाह

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शेख सलीम चिश्ती की समाधि।

शेख सलीम चिश्ती की समाधि भारत के आगरा जिले में नगर से 35 किलो मीटर दूर फतेहपुर सीकरी शहर में, ज़नाना रौजा के निकट, दक्षिण में बुलन्द दरवाजे़ की ओर मुख किये हुये, जामी मस्जिद की भीतर स्थित है। शेख सलीम चिश्ती एक सूफी संत थे उन्होंने अकबर और उसके बेटे को आशीर्वाद दिया था कि भविष्य में सलीम, जहांगीर के नाम से पहचाना जाएगा। जून १५७३ में अकबर ने गुजरात विजय के साथ इस क्षेत्र को भी जीत लिया तो इसका नाम फतेहपुर सीकरी रखा गया[1] और अकबर ने इस समाधि का निर्माण संत के सम्मान में वर्ष 15८० और 15८१ के बीच करवाया। आज यह समाधि वास्तुकला और धर्म निरपेक्षता का अनुपम उदाहरण है जहाँ इसके दर्शनार्थ विभिन्न समुदायों के लोग आते हैं।

वास्तुशिल्प

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समाधि लगभग १ मीटर ऊँचे मंच पर निर्मित है जिसका प्रवेश द्वार पांच सीढ़ी ऊपर है। मुख्यद्वार पर चार खंभे हैं जिनसे पारंपरिक गुजराती शैली के अत्यंत कलात्मक सर्पाकार शिल्प ऊपर जाते हुए छत को सहारा देते हैं। इनके बीच निर्मित जाली में ज्यामितीय आकारों के साथ बेलबूटों की आकर्षक नक्काशी है। खंभों के नीचे के भाग घंटे की भांति लंबाकार हैं जबकि ऊपरी सिरे पर अर्धचक्र बनाया गया है।[2] मुख्य समाधि के चारो ओर संगमरमर की जाली लगाई गई है, जो बारीक काम के कारण देखने में हाथीदांत के समान लगती है। समाधि अर्द्ध गोलाकार गुंबद वाले मुख्य कक्ष में स्थित है जिसकी अष्टकोमी कुर्सी काले और पीले रंग के मोजै़क संगमरमर से बनी है। इस पर एक आबनूस छत्र संलग्न है, जो आमतौर पर हरे कपड़े का होता है। मुख्य कक्ष का दरवाजा़ जटिल अराबेस्क आधार पर बना है और इस पर कुरान से छंद लिखे गये हैं।

सन्दर्भ

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  1. "मोहब्बत की इबादत होती है जहां" (एचटीएमएल). भास्कर. 25 अप्रैल 2009 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: ५ मई २००९. {{cite web}}: Check date values in: |access-date= (help)
  2. "टोंब ऑफ़ सलीम चिश्ती" (एचटीएम). टूरिज्म वेब इंडिया. अभिगमन तिथि: ५ मई २००९. {{cite web}}: Check date values in: |access-date= (help)