सलाह दर सलाह (व्यंग्य आलेख)- सुनीता काम्बोज

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सलाह एक ऐसी चीज है जिसे बाँटने के लिए हर कोई  बेचैन रहता है । कोई बात चली नहीं कि सामने वाले ने अपनी सलाह  दे डाली । आप किसी को भी अपनी समस्या सुनाइए फिर देखिए अनेक प्रकार की सलाह से आपकी झोलियाँ पल भर में भर दी जाती हैं  । सलाह का आदान प्रदान का प्रचलन अति प्राचीन है । इस संसार मे  स्वयं में,  हर कोई स्वंयम्भू है, हर कोई अपना ज्ञान झाड़कर सलाह का अमृत बाँटना चाहता है ।

दरअसल आजकल सलाह देने वाली की संख्या,सलाह  लेने वालों की अपेक्षा ज्यादा है । इसलिए हर किसी का मनोरथ सिद्ध नहीं हो पाता । परन्तु जो लोमड़ी की तरह चालक होते हैं, वह सामने वाले कि दुखती रग पर हाथ रख कर  सलाह देने का कार्य सम्पन्न कर डालते हैं ।

सलाह ऐसा नशा है जो  सलाही स्वयं को सलाह देने से हरगिज नहीं रोक सकता । अगर कभी व्यक्ति बहुत  परेशान है तो सलाही अपनी वफादारी साबित करने को मैदान में कूद पड़ता है । सलाह देकर जो सकूँन मिलता है वह केवल सलाह देने वाला ही जान सकता है ।

पिछले दिनों मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं था इसलिए सभी चाहने वाले हाल चाल पूछने आने लगे । अब सलाह का सिलसिला जोरों पर था । निशुल्क अनेक प्रकार की सलाह पाकर हमारे स्वास्थ्य में भी सुधार होने लगा । परसों हमारे एक रिश्तेदार सपरिवार घर पर पधारे  बातचीत के दौरान

मेरा  दुख देख कर उनके  अंदर का सलाही डॉक्टर अंगड़ाइयाँ लेने लगा ।  उन्होंने कई घरेलू नुस्खे और कई डॉक्टरों के बारे में जानकारी दे डाली । बातचीत करते-करते पता चला उन्हें भी  कई वर्षों से शुगर और बी. पी. की बीमारी है  ।  अपनी तकलीफों को नजरअंदाज करके किस प्रकार वह  समाज सेवा  कर रहे है यह देख मन गदगद हो गया । उन दिनों के अनुभव से मुझे यह महसूस हुआ कि किस प्रकार हर व्यक्ति के अंदर  ज्योतिष , शिक्षक, लेखक, कवि, डॉक्टर ,वकील छिपा हुआ है । दूसरों की समस्या देख कर ही उस को बाहर आने का अवसर मिल पाता है ।

कई बार सलाह दे कर भी आदमी अनेक समस्याओं से घिर जाता है। अगर सामने वाले ने सलाह मान ली और उसका काम बनने की बजाय बिगड़ गया तो सलाही व्यक्ति मुसीबत में फँस सकता है अगर इस रास्ते पर आनंद  है तो छल छंद भी है

एक तो अपनी कीमती सलाह से दूसरों के जीवन मे उजाला करो और ऊपर से ताने भी सुनों, यही भलाई करने का शिला मिलता है ।

कई बार सलाही व्यक्ति परेशानी में आने के बावजूद भी सलाह देना नहीं छोड़ता । उसे हर हाल में समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करना ही है । कर्मयोगी का रास्ता कब आसान रहा है।

जनहित के लिए कुछ रुसवाई हिस्से भी आए तो इसमें सलाही का क्या कसूर।

उसे हर हाल में सलाह देकर समाज को दिशा प्रदान करनी ही है।

कुछ लोग सलाह देने के साथ- साथ सुरक्षा कवच भी धारण करके रखते है सलाह देकर वह तुरंत चेतावनी भी दे देते है कि भाई- सुनना सबकी ,करना अपने मन की ।

इससे सामने वाला एक दम सावधान की स्तिथि में आ जाता है ।

सलाह देने के लिए कोई विशेष अनुभव की आवश्यकता नहीं । यह तो अंतर्ज्ञान से उत्पन्न होने वाला गुण है। जिसका तीसरा नेत्र खुल जाए वह अच्छा सलाही बन जाता है। बहुत नकारा व्यक्ति भी सलाही बन सकता है औऱ बहुत व्यस्त व्यक्ति  भी ।

आपको अपनी सलाह की शक्ति का लोहा मनवाने के लिए ऐसे लोगो की तलाश करनी चाहिए जिन्हें सलाह की जरूरत हो । ऐसे लोगों को सलाह देकर सलाह की तौहीन मत कीजिए जो खुद बहुत बड़े सलाहकार हैं। इस गुण में निखार आने के बाद आप श्रेष्ठ सलाही बन सकते हैं । सलाही बहुत अधिक दिनों तक सलाह दिए बैगर नहीं रह सकता ,वह अक्सर सलाह देने के लिए शिकार ढूँढता रहता है। जैसे ही कोई असहाय जाल में फँसा उसे तुरंत सलाह का टॉनिक पिया दिया । कुछ सलाह देने वाले प्रसिद्धि पाते है तो कुछ के हाथ केवल अपयश ही आता है

जिस सलाही का तीर निशाने पर लग जाए फिर उसकी दसों उंगलियाँ घी में होती है ।

अच्छा सलाही बनने के लिए नियमित अभ्यास की आवश्यकता होती है । सलाह देने से पहले उसके परिणामों पर  भी गौर कर ले तो हार का ठीकरा आपके सर पर फूटने की बजाय किसी और के सिर पर फूट जाता है ।

सलाह लेना और देना एक कला भी है। न हर किसी से सलाह देने बनती है न हर कोई हर किसी से सलाह ले सकता है। कई लोग ऐसे कहते मिल जाएँगे कि हमें कोई ढंग से सलाह देने वाला ही नहीं मिला ,और ऐसा भी कि मुझसे किसी ने सलाह ली ही नहीं । सलाह देने वाले अक्सर लोगो का इंतजार करते मिलते हैं कि कोई तो आए , जक मुझसे सलाह ले ।

किसी को सलाह देने से पहले उसकी समस्या को बहुत ध्यान से सुनना चाहिए । अगर समस्या का कोई सिर पैर नहीं हो तो भी सलाह देने में जल्दबाजी कदापि मत कीजिए । अंत मे मेरी एक सलाह को गाँठ बाँध लीजिए ।

की सलाह को केवल गाँठ बाँधकर मत रखिए । उस पर विचार करके अमल कीजिए ।

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लेखिका -सुनीता काम्बोज (प्रभा श्री पत्रिका नए अप्रैल 2019 अंक में प्रकाशित)