सर्वर साहिब

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सरवर साहब केरल के एक प्रसिद्ध उर्दू कवि थे।

जीवन रॆखा[संपादित करें]

1916 को भारत की राज्य केरल कॆ त्रिशूर में पैदा हुए। इनका पूरा नाम सय्यद मुहम्मद था और लॆखन-नाम सरवर था। 1942 में मद्रास यूनिवर्सिटी से अदीब फ़ाज़िल की डिग्री प्राप्त की। इसके पश्चात तलाशेरी ब्रन्नन कॉलेज में अध्यापक कॆ रूप से अस्थायी त़ौर पर पढ़ाया। इसके पश्चात तलाशेरी में सेंट जोज़ेफ हाय स्कूल में २ साल तक पढ़ाया। 1944 से 1971 तक मलप्पुरम (Malappuram) सरकारी हाय स्कूल में उर्दू शिक्षक के तौर पर काम किया।

महत्वपूर्ण रचनायॆं[संपादित करें]

इन्होने सबसे पहले गंचा नामक मासिक में बच्चो के लिय बाल-कथाएँ लिखीं। जवाहर साहब बंग्लोरी के दॆहांत पर मर्सिया (विलाप गीत) भी लिखा। इनका पहला रचना समाहार अर-मुग़ाने-केरला 1970 में छपा था। 49 पद्यों वाला कविता संग्रह नवाऐ सरवर 1988 में जारी हुआ। इसके अतिरिक्त वैकम मुहम्मद बशीर, एम॰ टी॰ वासुदेव नायर आदि प्रसिद्ध साहित्यकारों की कहानियाँ उनके द्वारा उर्दू में अनुवादित करके छपी हैं।

मृत्यु[संपादित करें]

जीवन के अंतिम दिन इन्होंने एकांत में बिसारॆ। 4 सितम्बर 1994 को इन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

प्रमुख रचनाएं[संपादित करें]