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सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना

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सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना
विशिष्टताएँ
लम्बाई 4,114 मील (6,621 kमी॰)
(लागत: ₹9,802 करोड़)
स्थिति पूर्ण
संचालन प्राधिकरण उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग
इतिहास
पूर्व नाम घाघरा नहर परियोजना
मूल स्वामी उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग
अधिनियम तिथि 1972
निर्माण आरम्भ 1978
प्रथम उपयोग तिथि 1978 (1978)
पूर्ण होने की तिथि 2021
Geography
आरम्भबिन्दु सरयू बैराज, बहराइच
(originally घाघरा नदी)
(नानपारा बैराज से सरयू नहर (इमामगंज राजवाहा) शुरू)
अंतबिन्दु नौ जिले (बहराइच, गोंडा, आदि)
शाखाएँ इंदिरा नहर
गंतव्य राप्ती नहर

सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना उत्तर प्रदेश, भारत की एक प्रमुख सिंचाई परियोजना है, जिसका उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश के नौ जिलों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और बाढ़ नियंत्रण करना है। यह परियोजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत कार्यान्वित की गई और इसे 2012-13 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा प्राप्त हुआ।[1] परियोजना का औपचारिक उद्घाटन 11 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बलरामपुर, उत्तर प्रदेश में किया गया।[1]

यह परियोजना पांच नदियों—घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा, और रोहिणी को नहरों के माध्यम से जोड़ती है, ताकि जल संसाधनों का इष्टतम उपयोग हो।[2] यह 14.04 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता सृजित करती है और लगभग 29 लाख किसानों को लाभ पहुँचाती है।[3] यह बहराइच और अन्य क्षेत्रों में नेपाल से आने वाले पानी के कारण होने वाली बाढ़ के जोखिम को भी कम करती है।[4]

परियोजना के मुख्य तथ्य

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परियोजना का खाका 1972 में बनाया गया था लेकिन परियोजना की शुरुआत 1978 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई, जब राम नरेश यादव (कांग्रेस) मुख्यमंत्री थे। इसे शुरू में घाघरा नहर परियोजना कहा जाता था।[5] 1980 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के समर्थन से परियोजना को बल मिला। 1980-1990 के दशक में बहराइच और गोंडा में कुछ नहरें और बैराज बने, जैसे बहराइच में खंड 3, 4, और 7, जो 1995 से कार्यशील हैं।[4] बजटीय कमी और समन्वय की कमी के कारण यह दशकों तक अधूरी रही। 1996-97 में Accelerated Irrigation Benefits Programme (AIBP) और 2012-13 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिलने के बाद, 2016 में PMKSY के तहत इसे गति मिली और समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया।[1]

नहर प्रणाली और संरचना

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परियोजना का आधार घाघरा नदी है, जिससे मुख्य नहरें निकलती हैं। बहराइच की ओर जाने वाली नहर को स्थानीय स्तर पर इंदिरा नहर और सीतापुर की ओर जाने वाली नहर को शारदा नहर कहा जाता है।[2] नहर प्रणाली 6,623 किलोमीटर तक विस्तृत है, जिसमें शाखा नहरें और उप-नहरें शामिल हैं।[4]

प्रमुख संरचनाएं

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  • सरयू बैराज: बहराइच में स्थित, घाघरा नदी से पानी को नहरों में डायवर्ट करता है।[2]
  • राप्ती बैराज: राप्ती नदी से पानी का प्रबंधन करता है।[2]
  • मुख्य नहरें: सरयू मुख्य नहर, सरयू लिंक चैनल, राप्ती मुख्य नहर, और राप्ती लिंक चैनल।[4]

शाखा नहरें: बहराइच में सरयू नहर (इमामगंज राजवाहा), खंड 4, और 7, जो 1990 के दशक से कार्यशील हैं।[4]

परियोजना को तीन चरणों में लागू किया गया:

  • चरण-I (प्री-AIBP): 1978 से शुरू, जिसमें बहराइच और गोंडा में सरयू बैराज और कुछ नहरों का निर्माण हुआ।[5]
  • चरण-II (AIBP): 1996-97 से तेजी, जिसमें 9.31 लाख हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता सृजित हुई।[1]
  • चरण-III (PMKSY-राष्ट्रीय परियोजना): 2016 के बाद नहरों का विस्तार और आधुनिकीकरण।[2]

विशेषताएं

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  • जल प्रबंधन: पांच नदियों को जोड़कर जल संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन।[2]
  • आधुनिकीकरण: नहरों की लाइनिंग, नए वितरण चैनलों का निर्माण, और पुराने ढांचों की मरम्मत।[4]
  • नवाचार: भूमि अधिग्रहण विवादों का समाधान और समयबद्ध पूर्णता।[1]
  • सहयोग: केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयास।[1]
  • कृषि: 14.04 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, जिससे किसानों की आय और उत्पादकता में वृद्धि।[3]
  • बाढ़ नियंत्रण: नेपाल से आने वाले पानी के प्रबंधन से बहराइच और अन्य क्षेत्रों में बाढ़ का जोखिम कम।[4]
  • आर्थिक विकास: पूर्वी उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास और समृद्धि।[1]

बहराइच में प्रारंभिक कार्य

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बहराइच में सरयू नहर के कुछ हिस्से, जैसे खंड 3, खंड 4, और खंड 7, 1990 के दशक में बनकर तैयार हो गए थे और 1995 से कार्यशील हैं।[4]

उद्घाटन

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11 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलरामपुर में परियोजना का उद्घाटन किया, जिसे "पूर्वांचल के विकास का इंजन" बताया गया।[1]

सांस्कृतिक महत्व

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सरयू नदी, जिसके नाम पर यह परियोजना है, अयोध्या में पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है और रामायण से जुड़ी पवित्र नदी है।[2] परियोजना ने इस क्षेत्र की नदियों के जल का उपयोग करके कृषि और सांस्कृतिक विकास में योगदान दिया है।

चुनौतियां

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  • विलंब: चार दशक तक परियोजना अधूरी रही, जिससे लागत बढ़ी।[5]
  • भूमि अधिग्रहण: कुछ क्षेत्रों में विवादों ने प्रगति को प्रभावित किया।[4]
  • रखरखाव: नहरों के नियमित प्रबंधन की आवश्यकता।[2]

इसके रखरखाव और विस्तार से सतत कृषि विकास और बाढ़ नियंत्रण में सुधार की उम्मीद है।[1]

  1. 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 "PM inaugurates Saryu Nahar National Project". PIB. अभिगमन तिथि: 27 मार्च 2025.
  2. 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 "सरयू नहर परियोजना". IDUP. अभिगमन तिथि: 27 मार्च 2025.[मृत कड़ियाँ]
  3. 1 2 3 "Saryu Canal Project is now operational". ThePrint. अभिगमन तिथि: 27 मार्च 2025.
  4. 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 "Saryu Nahar Project Report" (PDF). Forest Clearance. अभिगमन तिथि: 27 मार्च 2025.
  5. 1 2 3 "Saryu Nahar Project Details" (PDF). eParlib. अभिगमन तिथि: 27 मार्च 2025.