सरदार बज्जर सिंह राठौड

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

बज्जर सिंह राठौर, एक राजपूत योद्धा थे | वे सिक्खो के दसवे गुरू श्री गोविंद सिंह जी के गुरू थे, जिन्होने उनको अस्त्र-शस्त्र चलाने मे निपुण बनाया था। बज्जर सिंह जी ने गुरू गोविंद सिंह जी को ना केवल युद्ध की कला सिखाई बल्कि उनको बिना शस्त्र के द्वंद युद्ध, घुड़सवारी, तीरंदाजी मे भी निपुर्ण किया। उन्हे राजपूत-मुगल युद्धो का भी अनुभव था और प्राचीन भारतीय युद्ध कला मे भी पारंगत थे। वो बहुत से खूंखार जानवरो के साथ अपने शिष्यों को लडवाकर उनकी परिक्षा लेते थे। गुरू गोविंद सिंह जी ने अपने ग्रन्थ बिचित्तर नाटक मे इनका वर्णन किया है। सरदार बज्जर सिंह राठौड उनके द्वारा आम सिक्खो का सैन्यिकरण किया गया जो पहले ज्यादातर किसान और व्यापारी ही थे और भारतीय गटखा का प्रशिक्षण भी दिया, ये केवल सिक्ख ही नही बल्की पूरे देश मे क्रांतिकारी परिवर्तन साबित हुआ।

बज्जर सिंह राठौड जी की इस विशेषता की तारीफ ये कहकर की जाती है कि जो कला सिर्फ राजपूतों तक सीमित थी उन्होंने मुग़लो से मुकाबले के लिये उसे खत्री सिक्ख गुरूओ को भी सिखाया, जिससे पंजाब में हिन्दुओ की बड़ी आबादी जिसमे आम किसान, मजदूर, व्यापारी आदि शामिल थे, इनका सैन्यकरण करना संभव हो सका।

गुरु गोबिंद सिंह का जीवन और समय[संपादित करें]

'अमरदीप एस दहिया' द्वारा, "खालसा के संस्थापक: द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ गुरु गोबिंद सिंह" - में एक लेख मिलता है, जिसमें लिखा गया है कि -

सबसे महत्वपूर्ण योगदान बज्जर सिंह, एक राजपूत द्वारा किया गया था। वे एक विशेषज्ञ घुड़सवार और योद्धा थे। वह युवा गुरु को एक कुशल घुड़सवार, विशेषज्ञ तलवारबाज के रूप में ढालने में जिम्मेदार थे, जो लांस, धनुष और तीर, मस्कट और माचलॉक जैसे हथियारों से निपटने में समान रूप से कुशल थे। बज्जर सिंह एक कुशल रणनीतिज्ञ भी थे और यह सुनिश्चित करते थे कि गुरु गोबिंद सिंह, एक उल्लेखनीय सैन्य रणनीतिकार के रूप में विकसित हों।

[1]

पारिवारिक पृष्टभूमि[संपादित करें]

बज्जर सिंह जी सूर्यवंशी राठौड राजपूत वंश के शासक वर्ग से संबंध रखते थे। वो मारवाड के राठौड़ राजवंश के वंशज थे |

वंशावली

राव सीहा जी

राव अस्थान

राव दुहड

राव रायपाल

राव कान्हापाल

राव जलांसी

राव चंदा

राव टीडा

राव सल्खो

राव वीरम देव

राव चंदा

राव रीढमल

राव जोधा

राव लाखा

राव जोना

राव रामसिंह प्रथम

राव साल्हा

राव नत्थू

राव उडा

राव मंदन

राव सुखराज

राव रामसिंह द्वितीय

सरदार बज्जर सिंह (अपने वंश मे सरदार की उपाधि लिखने वाले प्रथम व्यक्ति)

इनकी पुत्री भीका देवी का विवाह आलम सिंह चौहान (नचणा) से हुआ जिन्होंने गुरू गोविंद सिंह जी के पुत्रो को शस्त्र विधा सिखाई।[2][3] 1710 ई° के चॉपरचिरी के युद्ध में इन्होंने भी बुजुर्ग अवस्था में बन्दा सिंह बहादुर के साथ मिलकर वजीर खान के विरुद्ध युद्ध किया और अपने प्राणों की आहुति दे दी।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Amardeep S. Dahiya (2014). Founder of the Khalsa: The Life and Times of Guru Gobind Singh. Hay House. पपृ॰ 291–299. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-317-1358-7.
  2. Bhalla, Sarup Das, Mahima Prakash. PATIALA, 1971
  3. Kuir Singh, GurbiJas Patshahi 10. Patiala, 1968
  1. https://www.sikhiwiki.org/index.php/Alam_Singh_Nachna - Alam Singh Nachna
  2. https://sikhbookclub.com/Book/Bachitar-Natak - Bachitra Natak By Guru Gobind Singh Ji
  3. https://everipedia.org/wiki/lang_en/Sardar_Bajjar_Singh_Rathore/amp - Everipedia's Article On Bajjad Singh Rathore