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सम आयन प्रभाव

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जब किसी विलयन में उपस्थित किसी आयन की मात्रा बढायी जाती है उस विलयन में उपस्थित 'अतिरिक्त' आयन अपने से विपरीत आवेश वाले आयनों से संयुक्त हो जाते हैं ताकि आयनिक गुणफल का मान उत्पाद के विलेयता गुणफल के बराबर बना रहे। इसे ही सम आयन प्रभाव या उभयनिष्‍ठ आयन प्रभाव (common ion effect) कहते हैं।

उदाहरण के लिये, कैल्सियम कार्बोनेट युक्त कठोर जल में सोडियम कार्बोनेट की थोड़ी सी मात्रा मिलाने पर कैल्सियम कार्बोनेट अवक्षेपित होकर नीचे बैठ जाता है। यह सम आयन प्रभाव के कारण होता है। यहाँ ध्यान देने योग्य है कि सोडियम कार्बोनेट अत्यन्त घुलनशील है जबकि कैल्सियम कार्बोनेट कम घुलनशील। इस कारण कठोर जल में सोडियम कार्बोनेट की बहुत कम मात्रा मिलाने पर भी बहुत सारे कार्बोनेट आयन पैदा होते हैं जो कैल्सियम कार्बोनेट के वियोजन से पैदा हुए कार्बोनेट आयनों को संयुक्त होकर कैल्सियम कार्बोनेट के रूप में अवक्षेपित होने के लिये बाध्य करते हैं। सम आयन प्रभाव: परिचय और उदाहरण सम आयन प्रभाव रासायनिक संतुलन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। यह प्रभाव तब देखा जाता है जब एक विलयन में पहले से मौजूद किसी आयन के साथ एक ही आयन को जोड़ दिया जाता है, जिससे संतुलन की स्थिति बदल जाती है। इस प्रभाव को समझने के लिए हम लै शैटेलियर का सिद्धांत प्रयोग में लाते हैं, जो बताता है कि किसी भी संतुलन को बदलने के लिए किया गया बाहरी हस्तक्षेप उस संतुलन को नई स्थिति में समायोजित करने का प्रयास करेगा।

सम आयन प्रभाव के पीछे का सिद्धांत जब किसी संतुलित रासायनिक प्रतिक्रिया में एक आयन पहले से उपस्थित होता है और उसी आयन को बाहर से और अधिक मात्रा में जोड़ दिया जाता है, तो प्रतिक्रिया का संतुलन उस दिशा में खिसकता है जिससे आयन की अतिरिक्त मात्रा को संतुलित किया जा सके। यह प्रतिक्रिया के उत्पाद या अभिकारक की सांद्रता पर निर्भर करता है।

उदाहरण 1: एसिटिक एसिड और सोडियम एसीटेट प्रतिक्रिया:

CH 3 COOH ↔ CH 3 COO − + H +

जब हम इस संतुलित विलयन में सोडियम एसीटेट ( CH 3 COONa ) जोड़ते हैं, तो सोडियम एसीटेट में मौजूद CH 3 COO −

आयन की सांद्रता बढ़ जाती है। यह 

CH 3 COOH

के विघटन को कम कर देता है, जिससे 

H +

आयन की सांद्रता भी कम हो जाती है और विलयन की अम्लीयता कम हो जाती है।

टेबल 1: सम आयन प्रभाव का प्रभाव

प्रारंभिक स्थिति सोडियम एसीटेट जोड़ने के बाद CH 3 COOH

की सांद्रता: 0.1 M	

CH 3 COOH की सांद्रता: 0.08 M CH 3 COO −

की सांद्रता: 0.1 M	

CH 3 COO − की सांद्रता: 0.3 M H +

की सांद्रता: 0.1 M	

H +

की सांद्रता: 0.05 M

उदाहरण 2: हाइड्रोजन फ्लोराइड और सोडियम फ्लोराइड प्रतिक्रिया:

HF ↔ H + + F −

जब हम हाइड्रोजन फ्लोराइड ( HF ) के संतुलित विलयन में सोडियम फ्लोराइड ( NaF ) जोड़ते हैं, तो F −

आयन की सांद्रता बढ़ जाती है। यह 

HF

के विघटन को कम कर देता है, जिससे 

H +

आयन की सांद्रता भी कम हो जाती है और विलयन की अम्लीयता कम हो जाती है।

प्रयोग: सम आयन प्रभाव का अवलोकन उद्देश्य: सम आयन प्रभाव का अध्ययन करना

आवश्यक सामग्री:

एसिटिक एसिड (0.1 M) सोडियम एसीटेट (0.1 M) pH मीटर ब्यूरेट फ्लास्क प्रक्रिया:

100 mL एसिटिक एसिड का एक विलयन तैयार करें। इस विलयन का pH मापें। धीरे-धीरे सोडियम एसीटेट का विलयन जोड़ें और प्रत्येक 10 mL के बाद pH मापें। परिणाम दर्ज करें। परिणाम:

टेबल 2: pH में परिवर्तन

सोडियम एसीटेट जोड़ा (mL) pH 0 2.9 10 3.2 20 3.5 30 3.8 40 4.1 50 4.4 सम आयन प्रभाव के अन्य उदाहरण सोडियम क्लोराइड और हाइड्रोक्लोरिक एसिड: NaCl ↔ Na + + Cl −

जब 

HCl

जोड़ते हैं, तो 

Cl −

आयन की सांद्रता बढ़ जाती है, जिससे 

NaCl के विघटन पर प्रभाव पड़ता है। मैग्नेशियम हाइड्रोक्साइड और मैग्नेशियम क्लोराइड: Mg(OH) 2 ↔ Mg 2 + + 2 OH −

जब 

MgCl 2 जोड़ते हैं, तो Mg 2 +

आयन की सांद्रता बढ़ जाती है, जिससे 

Mg(OH) 2

के विघटन पर प्रभाव पड़ता है।

सम आयन प्रभाव का उदाहरण: अमोनियम क्लोराइड सम आयन प्रभाव को समझने के लिए अमोनियम क्लोराइड (NH 4 Cl) का उदाहरण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस उदाहरण में, हम अमोनियम हाइड्रोक्साइड (NH 4 4​OH) के संतुलन पर NH 4 Cl जोड़ने का प्रभाव देखेंगे।

रासायनिक संतुलन अमोनियम हाइड्रोक्साइड एक कमजोर क्षार है और जल में निम्नलिखित संतुलन स्थापित करता है:

NH 4 OH ↔ NH 4 + + OH −

जब हम इस संतुलन में अमोनियम क्लोराइड (NH 4 Cl) जोड़ते हैं, तो NH 4 + ​ आयन की सांद्रता बढ़ जाती है। सम आयन प्रभाव के कारण, अतिरिक्त NH 4 + आयन NH 4 ​OH के आयनीकरण को दबा देते हैं, जिससे OH −

आयन की सांद्रता कम हो जाती है और विलयन की क्षारीयता घट जाती है।

प्रयोग: अमोनियम क्लोराइड का प्रभाव उद्देश्य: अमोनियम क्लोराइड के अतिरिक्त से अमोनियम हाइड्रोक्साइड के संतुलन पर सम आयन प्रभाव का अध्ययन करना।

आवश्यक सामग्री:

अमोनियम हाइड्रोक्साइड (0.1 M) अमोनियम क्लोराइड (0.1 M) pH मीटर ब्यूरेट फ्लास्क प्रक्रिया:

100 mL अमोनियम हाइड्रोक्साइड का एक विलयन तैयार करें। इस विलयन का pH मापें। धीरे-धीरे अमोनियम क्लोराइड का विलयन जोड़ें और प्रत्येक 10 mL के बाद pH मापें। परिणाम दर्ज करें। परिणाम: टेबल 1: pH में परिवर्तन

अमोनियम क्लोराइड जोड़ा (mL) pH 0 11.0 10 10.5 20 10.0 30 9.5 40 9.0 50 8.5 निष्कर्ष सम आयन प्रभाव रासायनिक संतुलन की स्थिति में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है। यह प्रभाव विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं में देखा जा सकता है और इसका प्रयोग करके विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित किया जा सकता है। इस प्रभाव का अध्ययन और समझ कई वैज्ञानिक और औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]