समग्र शिक्षा
समग्र शिक्षा[1] और विकास
[संपादित करें]समग्र शिक्षा (Holistic Education) एक शैक्षणिक दृष्टिकोण है जो व्यक्ति के बहुआयामी विकास पर केंद्रित होता है। इस दृष्टिकोण में शिक्षा को केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित न मानकर बौद्धिक, भावनात्मक, सामाजिक, शारीरिक तथा नैतिक आयामों के संतुलित विकास की प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है।[2] समग्र शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में जीवन-कौशल, आत्म-जागरूकता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना है।
परिभाषा[3]
[संपादित करें]समग्र शिक्षा एक शैक्षणिक दर्शन है जिसमें सीखने को एक समग्र अनुभव माना जाता है। इसमें विद्यार्थी को एक पूर्ण व्यक्तित्व के रूप में समझा जाता है, जिसकी बौद्धिक क्षमताओं के साथ-साथ भावनात्मक और सामाजिक आवश्यकताओं को भी महत्व दिया जाता है।[4]
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
[संपादित करें]समग्र शिक्षा की अवधारणा विभिन्न दार्शनिक और शैक्षणिक परंपराओं [5]से प्रभावित रही है। जॉन ड्यूई और मारिया मोंटेसरी जैसे शिक्षाविदों के विचारों को अनुभवात्मक और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा के संदर्भ में समग्र शिक्षा से जोड़ा जाता है।[6]
समग्र विकास के प्रमुख आयाम
[संपादित करें]संज्ञानात्मक विकास
[संपादित करें]तार्किक सोच, आलोचनात्मक विश्लेषण, समस्या-समाधान तथा रचनात्मक विचारों के विकास को संज्ञानात्मक आयाम माना जाता है।
भावनात्मक विकास
[संपादित करें]आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन, आत्म-विश्वास और भावनात्मक बुद्धिमत्ता का विकास इस आयाम का हिस्सा है।
सामाजिक विकास
[संपादित करें]सहयोग, सहानुभूति, संवाद कौशल तथा सामाजिक जिम्मेदारी जैसे गुण सामाजिक विकास से जुड़े होते हैं।
शारीरिक विकास
[संपादित करें]स्वास्थ्य, शारीरिक गतिविधियाँ, खेल तथा सक्रिय जीवनशैली को समग्र शिक्षा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
रचनात्मक और नैतिक विकास
[संपादित करें]कला, संस्कृति, नैतिक मूल्य और आत्मचिंतन रचनात्मक एवं नैतिक विकास के प्रमुख घटक हैं।[7]
शैक्षणिक विशेषताएँ
[संपादित करें]समग्र शिक्षा में विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण, अनुभवात्मक सीखना, बहु-विषयक दृष्टिकोण तथा जीवन-कौशल आधारित शिक्षा पर जोर दिया जाता है।[8]
समकालीन शिक्षा में महत्व
[संपादित करें]समकालीन शिक्षा नीतियों में समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बहुआयामी और समग्र शिक्षा को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है।[9]
आलोचनाएँ
[संपादित करें]कुछ शिक्षाविदों के अनुसार समग्र शिक्षा को लागू करने में संसाधनों, प्रशिक्षित शिक्षकों तथा वैकल्पिक मूल्यांकन पद्धतियों से संबंधित चुनौतियाँ हो सकती हैं।
संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ Miller, John P. (2018-09-14), "Holistic Education", International Handbook of Holistic Education, Routledge, pp. 5–16, ISBN 978-1-315-11239-8, अभिगमन तिथि: 2026-02-11
- ↑ Holistic education. Wikipedia.
- ↑ Siska, Erlin (2018-12-23). "BRAND DEFINATION-ERLIN SISKA". doi.org. अभिगमन तिथि: 2026-02-11.
- ↑ Forbes, S. (2003). Holistic Education: An Analysis.
- ↑ "Tradition!". Tradition!. 2016. डीओआई:10.5040/9781682660249.
- ↑ Dewey, John. Experience and Education.
- ↑ Snowber, Celeste (2018-09-14), "Embodied Inquiry in Holistic Education", International Handbook of Holistic Education, Routledge, pp. 232–239, ISBN 978-1-315-11239-8, अभिगमन तिथि: 2026-02-11
- ↑ Educational Research on Holistic Learning.
- ↑ Ministry of Education, Government of India. National Education Policy 2020.