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सदोम और अमोरा

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सदोम और अमोरा (1852), जॉन मार्टिन द्वारा चित्रकला

इब्राहीमी धर्मों में, सदोम और अमोरा दो नगर थे जिन्हें परमेश्वर ने उनकी दुष्टता के लिए नष्ट कर दिया था।[1] उनकी कहानी उत्पत्ति बाढ़ कथा के समानांतर है; दोनों में मनुष्य के पाप परमेश्वर के क्रोध को उकसाता है।[2][3] उनका उल्लेख अक्सर इब्रानी बाइबिल, नए नियम और क़ुरान में मानव दुष्टता और दिव्य दंड के प्रतीक के तौर से किया गया है।[4]

इब्राहीम और लूत की कहानियों में सदोम और अमोरा को "तराई के नगर" नाम से जाने जाते हैं, जिन्होंने राजा कदोर्लाओमेर के ख़िलाफ़ विद्रोह किया था। बाद में परमेश्वर ने उन्हें अपनी दुष्टता हेतु नष्ट कर दिया। लूत और उसकी बेटियाँ नगर से भाग पाएँ, जबकि लूत की पत्नी पीछे की ओर देखी और नमक का खंबा बन गई।

बाइबिल के अन्य ग्रंथ सदोम और अमोरा को व्यभिचार, अहंकार, अनातिथ्य और ग़रीबों का अत्याचार जैसे पापों के प्रतीक बताते हैं। मत्ती, लूक़ा, याक़ूब और प्रकाशित वाक्य सहित नए नियम नगरों को दिव्य निर्णय की चेतावनी कहती है; कुछ व्याख्याएँ यौन अपराधों को उजागर करती हैं, जबकि अन्य हिंसा, अन्याय और अनातिथ्य पर ज़ोर देती हैं।

इस्लाम में, लूत की कहानी समलैंगिकता का पाप एवं ईश्वर की अवज्ञा के नतीजे पर ज़ोर देती है।

बाइबिल में

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लूत और कदोर्लाओमेर

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सदोम और अमोरा "तराई के नगरों" में से थे, जिनका पहला उल्लेख इब्राहीम और उसके भतीजे लूत के बीच भूमि के झगड़े में किया गया है। झगड़े को सुझाने के लिए, लूत जॉर्डन घाटी में बसा और "अपना तंबू सदोम के निकट खड़ा किया"।[5] इस समय दोनों नगर अलग थे। उत्पत्ति 14:2 कहता है कि सदोम का राजा बेरा था और अमोरा का राजा बिर्शा था।[6]

सदोम और अमोरा एलाम के राजा कदोर्लाओमेर के शासन में थे, बाद में जिसके ख़िलाफ़ उन्होंने विद्रोह किया था। सिद्दीम के युद्ध में कदोर्लाओमेर ने उन्हें हराकर लूत समेत कई बँधुओं को अपने साथ लेकर गया। फिर इब्राहीम ने 318 पुरुषों की सेना लेकर उसे हराकर, लूत और दोनों नगरों को आज़ाद कर दिया था।

नगरों का विनाश

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बाद में, परमेश्वर ने इब्राहीम को कहा कि वह सदोम और अमोरा को नष्ट करेंगे, क्योंकि वह जानते थे कि वह "यहोवा के मार्ग में अटल बने रहेगा",[7] और कि सदोम और अमोरा पाप बहुत पापी थे। इब्राहीम ने उन्हें पूछा “क्या तू सचमुच दुष्‍ट के संग धर्मी का भी नाश करेगा?"[8] उसने फिर परमेश्वर के साथ मोल-भाव किया, और अंत में परमेश्वर ने वादा किया कि यदि सदोम में 10 धर्मी मिलें वह उस नगर को बख़्शेंगे।

परमेश्वर ने दो स्वर्गदूतों को सदोम में भेजा। वे साँझ को लूत के घर पहुँचें और चौक में रात बिताने की अनुमति माँगे, पर लूत ने उन्हें अपने घर में आने की विनती की।[9] बाद में, सदोम के सभी पुरुषों ने घर को घेर लिया और लूत को पुकारकर उसके अतिथियों को माँगने लगे ताकि वे उनके साथ भोग करें।[10] लूत उन्हें अपनी दो कुँवारी बेटियाँ ले जाने को कहा ताकि वे "जैसा अच्छा लगे वैसा व्यवहार उनसे करें", लेकिन उन्होंने बेटियों को इंकार करके लूत के साथ उनसे भी अधिक बुराई करने की धमकी दी। उस समय स्वर्गदूतों ने लूत को बचाकर उन पुरुषों को अंधा कर दिया।[11]

फिर उन्होंने लूत और उसके परिवार को सदोम से भागने को कहा, क्योंकि वे उसे अपने अत्याचार के नष्ट करने वाले थे।[12] अगले सुबह, क्योंकि लूत देर करता रहा, स्वर्गदूतों ने उसके, उसकी पत्नी और दोनों बेटियों के हाथ पकड़कर उन्हें नगर के बाहर ले गया, तथा उन्हें बिना पीछे देखे पहाड़ तक भागने को कहा। लूत ने कहा कि पहाड़ बहुत दूर है और सोअर की ओर भाग देने को कहा। फिर परमेश्वर ने सदोम और अमोरा पर गंधक और आग बरसाई तथा नगरों, पूरे तराई, और उनके सारे निवासियों को भूमि की सारी उपज समेत नष्ट कर दिया।[13] लूत और उनकी दो बेटियाँ नगर के विनाश से बच पाएँ, पर उसकी पत्नी स्वर्गदूतों की चेतावनी को ध्यान ना देकर पीछे देखी और नमक का खंबा बन गई।[14]

सन्दर्भ

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  1. Greene 2004, p. 294.
  2. "उत्पत्ति 19:1-28". YouVersion.
  3. Schwartz 2007, p. 465-466.
  4. Jackson 2014, p. 119.
  5. "उत्पत्ति 13:12". YouVersion.
  6. "उत्पत्ति 14:2". YouVersion.
  7. "उत्पत्ति 18:19". YouVersion.
  8. "उत्पत्ति 18:23". YouVersion.
  9. "उत्पत्ति 19:1-4". YouVersion.
  10. "उत्पत्ति 19:5". YouVersion.
  11. "उत्पत्ति 19:11". YouVersion.
  12. "उत्पत्ति 19:13". YouVersion.
  13. "उत्पत्ति 19:24-25". YouVersion.
  14. "उत्पत्ति 19:26". YouVersion.