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-- नया सदस्य सन्देश (वार्ता) 11:28, 20 मार्च 2018 (UTC) Non Poisonous Air Water & Meals विश्व हिन्दी दिवस पर महामहिम राष्ट्रपति ने की सुनवाई 18 अप्रैली माँग विदेश मंत्रालय के हवाले

मथुरा,

    ‘ईश्वर के घर देर है पर अंधेर नहीं’ की मिसाल उस वक्त सच में तब्दील हो गई जब महामहिम राष्ट्रपति ने डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में वर्ष 2015 से जारी 18 अप्रैली विश्व हिन्दी दिवसीय आन्दोलन पर सुनवाई करते हुए मामले को विदेश मंत्रालय के हवाले सौंपा।

संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं 18 अप्रैली विश्व हिन्दी दिवसीय आन्दोलन के सूत्रधार डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने बताया कि महामहिम ने यह सुनवाई गैर ऐतिहासिक 10 जनवरीय विश्व हिन्दी दिवस के विरोध में सौंपे गये ज्ञापन के सिलसिले में की है जिस पर विदेश मंत्रालय से 18 अप्रैल को विश्व हिन्दी दिवस स्वीकार करने का अनुरोध किया गया है। बताते चलें कि 18 अप्रैली विश्व हिन्दी दिवस की माँग महामना मदनमोहन मालवीय के नाम भारतरत्न की घोषणा से शुरू हुई थी जिसे वर्ष 2015 में मथुरा से आन्दोलन शुरू करने के पश्चात् 22 जून को प्रधान मंत्री के नाम प्रेषित महामना स्मारक परियोजना में शामिल किया गया था। मगर जब सरकार ने उसी वर्ष व्यापमं और ललित मोदी विवादों के चलते संसद न चलने के आरोपों की सफाई में परियोजना का दुरूपयोग करते हुए दसवां विश्व हिन्दी सम्मेलन भोपाल में आयोजित कराया और बाकी बिन्दुओं की अनदेखी करते हुए टी0 वी0 सीरियल, वांङमय प्रकाशन और प्राइमरी कक्षाओं में महामना पर अध्याय समावेशन तक नजरअन्दाज किया। तब वह मुहिम जो धर्मान्तरण के मसले पर कांग्रेस की खिलाफत में शुरू हुई थी, उसने एकाएक सरकार की ओर रूख कर लिया। आगे कहा कि सरकार का यह नजरिया सिर्फ महामना, बनारस और हिन्दी के ही खिलाफ नहीं था बल्कि न्यस्त स्वार्थों के लिए राष्ट्रीय इतिहास का दुरूपयोग करना देशद्रोह से कम जुर्म भी नहीं जान पड़ा। लिहाजा आन्दोलन के दूसरे वर्ष 18 अप्रैल 2017 के दिन नई दिल्ली क्षेत्र में धरना प्रदर्शन के पश्चात् प्रधान मंत्री के नाम सौंपे गये ज्ञापन में इस्तीफे की माँग भी की गई।

डॉ0 शर्मा ने खुलासा किया कि 18 अप्रैल 1900 से महामना मदनमोहन मालवीय के हाथों यूनाइटेड प्रविंस में विजय का परचम फहराते सरकारी काम-काज और न्यायालयों की भाषा के दर्जे पर कायम हुई हिन्दी के शताब्दीपर्यंत संघर्ष की उपेक्षा स्वयं में देशद्रोह है और उस पर 114 वर्षों बाद उसका राजनीतिक दुरूपयोग करना, उससे भी बड़ा जुर्म है जिसे मौजूदा सरकार ने अंजाम दिया है।

डॉ0 शर्मा ने खुलासा किया कि मुहिम की शुरूआत भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा, केन्द्रीय संस्कृति राज्य मंत्री महेश शर्मा से व्यक्तिगत विरोध अभिव्यक्ति के पश्चात् हुई थी जिसके बारे में प्रधान मंत्री से भी संपर्क बनाने का प्रयास किया गया। मगर पी0 एम0 ओ0 ने कोई सुनवाई नहीं की। आगे कहा कि पी0 एम0 ओ0 का वही रवैया अब तक बना हुआ है और उसने महामहिम के साथ सौंपे गये ज्ञापन का जवाब अब तक नहीं दिया है। --Parakhtimessharma (वार्ता) 11:06, 3 मई 2018 (UTC)डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्माविश्व हिन्दी दिवस पर महामहिम राष्ट्रपति ने की सुनवाई

20180उच्चायुक्त मॉरीशस सरकार को सौंपा ज्ञापन413 151204.jpg

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  1. शर्मा, सुरेश शर्मा. "विश्व हिन्दी दिवस पर महामहिम राष्ट्रपति ने की सुनवाई".