सदस्य वार्ता:विन्ध्य प्रकाश मिश्र

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स्वागत! Crystal Clear app ksmiletris.png नमस्कार विन्ध्य प्रकाश मिश्र जी! आपका हिन्दी विकिपीडिया में स्वागत है।

-- नया सदस्य सन्देश (वार्ता) 13:32, 25 मई 2018 (UTC)

धन्यवाद[संपादित करें]

आपका शुक्रिया विन्ध्य प्रकाश मिश्र (वार्ता) 15:17, 6 अगस्त 2018 (UTC)

अनुरोध[संपादित करें]

मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि निम्नलिखित जानकारी को वाक्य रूप देकर 'छंद' पृष्ठ पर लिखें

रमणीयक छंद◆

विधान~ [ रगण नगण भगण भगण रगण] ( 212 111 211 211 212 ) 15वर्ण,4 चरण दो-दो चरण समतुकांत]

आप संकट सबै हरते रघुनाथ जू। नित्य ही जगत जापत है गुणगाथ जू।। नेति नेति कहके सब देव मना रहे। "सोम"नाथ बिगड़े सब काज बना रहे।।

                      ~शैलेन्द्र खरे"सोम"

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  ♢पुटभेद छंद♢

शिल्प~ [रगण सगण सगण सगण सगण लघु गुरु] (212 112 112 112 112 1 2) 17 वर्ण प्रति चरण, 4 चरण,2-2 चरण समतुकान्त।

श्री रमापति जू मनभावन के गुण गाइये। जो मिले नित कर्म करे उसमें सुख पाइये।। कीजिये अभिमान नही अपना मन साधिये। "सोम"उत्तम काम यही,हरि को अवराधिये।।

                             ~शैलेन्द्र खरे"सोम"

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°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° ◆रसना छंद◆

विधान~ [ नगण यगण सगण नगण नगण लघु गुरु] ( 111 122 112 111 111 1 2 ) 17वर्ण, यति{7-10} वर्णों पर,4 चरण दो-दो चरण समतुकांत]

नमन सियानाथ, सदा चरण कमल चहौं। हृदय करो बास, प्रभो बरनत गुन रहौं।। प्रभु सुमिरौं नित्य,जहाँ गुजर बसर करौं। चरणन में "सोम", मनै कबहुँक नहिं डरौं।।

                              ~शैलेन्द्र खरे"सोम"

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विधान~ [ नगण नगण सगण गुरु गुरु] ( 111 111 112 2 2 ) 11वर्ण,4 चरण दो-दो चरण समतुकांत]

प्रिय रघुपति परिणीता जू। चतुर सब तरह सीता जू।। चरण कमल चित धारौं मैं। अपलक नयन निहारौं मैं।।

           ~शैलेन्द्र खरे"सोम"

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विधान~ [ नगण भगण लघु गुरु] ( 111 211 1 2) 8 वर्ण,4 चरण दो-दो चरण समतुकांत]

अब सुधार हिय को। सुमिरि राम सिय को।। मन मनावत जबै। सुफल कारज सबै।।

     ~शैलेन्द्र खरे"सोम"

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 ♧रत्नकरा छंद♧

विधान~ [ मगण सगण सगण] ( 222 112 112 ) 9वर्ण, 4 चरण, दो-दो चरण समतुकांत।

आओ हे मनभावन जू। राजौ आ हिय आँगन जू।। कान्हा केशव श्याम लला। प्यारी है सुखधाम कला।।

Dr Samkiv Kumar (वार्ता) 11:33, 7 जनवरी 2019 (UTC)

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-रोहित(💌) 21:13, 25 फ़रवरी 2021 (UTC)