सदस्य वार्ता:गंगा सहाय मीणा

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स्वागत! Crystal Clear app ksmiletris.png नमस्कार गंगा सहाय मीणा जी! आपका हिन्दी विकिपीडिया में स्वागत है।

-- नया सदस्य सन्देश (वार्ता) 05:02, 5 जून 2012 (UTC)

स्वागत[संपादित करें]

जानकार खुशी हुई की आपने इस लेख में अपनी रूचि दिखाई.लेख में कुछ सुधर की जरूरत है , जैसे की अनुक्रम की कमी। यदि आप अनुक्रम को ला सकें तो आभारी रहूँगा। धन्यवाद सिनेमास्कोप (वार्ता) 09:56, 9 जून 2012 (UTC)

पूर्ण विराम का उपयोग[संपादित करें]

हाल ही में जो लेख आपने सम्पादित किया है, उनमें पुर्ण विराम के स्थान पर दशमलव का उपयोग किया है। आपके सदस्य पृष्ठ में भी दशमलव का ही उपयोग है। हिन्दी में (।) ही पूर्ण विराम होता है एवं (.) दशमलव कहलाता है। -- आनन्द विवेक सतपथी वार्ता 01:18, 11 जून 2012 (UTC)

भाई आनंद जी, आपकी बात से मैं आधी सहमति जताता हूं. आधी इसलिए क्‍योंकि जिसे आप दशमलव (.) कह रहे हैं, वह गणित में दशमलव के तौर पर इस्‍तेमाल होता है, हिन्‍दी में अधिकांश जगहों पर पूर्णविराम के तौर पर इस्‍तेमाल होने लगा है. इसका सबसे बडा उदाहरण हिन्‍दी की सबसे मशहूर साहित्यिक पत्रिका हंस इसको पूर्णविराम के रूप में कई वर्ष पहले अपना चुकी है. ढेरों किताबों और पत्रिकाओं में यही इस्‍तेमाल हो रहा है. पिछले वर्षों में कंप्‍यूटर और इंटरनेट पर हिंदी कीबोर्ड की एकरूपता के अभाव में हिंदी भाषा में कई वर्तनीगत बदलाव आए हैं, जिन्‍हें हिंदी समाज धीरे-धीरे स्‍वीकार रहा है. जहां तक विकिपीडिया की बात है, इस बारे में अगर विकिपीडिया की कोई नीति है तो मैं उससे अनभिज्ञ हूं. मैंने देवनागरी अंकों के स्‍थान पर अंतर्राष्‍ट्रीय अंकों के इस्‍तेमाल संबंधी विषय चौपाल पर डाला है, लेकिन वहां अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. क्‍या इस मुद्दे पर भी चौपाल पर बात कर ली जाय? आपकी टिप्‍पणी के लिए शुक्रिया. गंगा सहाय मीणा (Ganga Sahay Meena) (वार्ता) 06:34, 11 जून 2012 (UTC)

परन्तु अभी यह कई समाचार पत्रों में एवं पुस्तकों में (।) का ही उपयोग हो रहा है। अत: जब तक यह हिन्दी किताबों व समाचार पत्रों में नहीं आता तब तक (।) का ही उपयोग करें। साथ ही कुछ हिन्दी लिखने वाले टूल में (।) नहीं दिया गया है। केवल शब्दों के अनुवाद किए जाने के कारण (।) के स्थान पर (.) ही लिखा जाता है। जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण गूगल अनुवादक पर देख सकते हैं। परन्तु कुछ और टूल जैसे माइक्रोसॉफ्ट का हिन्दी लिखने वाले टूल पर यह (।) आता है। चूंकि गूगल में ही अधिकांश लोग हिन्दी लिखने के टुल खोजते हैं। जिस कारण गूगल का ही टूल परिणाम में पहले दिखाई देता है। इस कारण इसका उपयोग भी अधिक किया जाता है। परन्तु इसमें (.) दबाने पर (।) के स्थान पर (.) ही दिखेगा। इस कारण अधिकांश स्थानों पर (.) लिखा होता है। हंस पत्रिका के बारे में तो मुझे कुछ ज्ञात नहीं है। फिर भी आप हो सके तो (।) का उपयोग करें। आप (.) का उपयोग भी कर सकते हैं परन्तु अभी (।) का ही उपयोग पूर्ण विराम के लिए किया जा रहा है। -- आनन्द विवेक सतपथी वार्ता 07:13, 11 जून 2012 (UTC)
भाई आनंद विवेक जी, इस मामले में विकिनीतियों को ही जान लेना उचित होगा. मुझे पूर्णविराम के रूप में फुल स्‍टॉप (.) के उपयोग में कोई खास दिक्‍कत नहीं लग रही. शेष वरिष्‍ठ साथियों की राय का इंतजार करते हैं. आपकी लिखी दोनों टिप्‍पणियों में (शीर्षक समेत) कुछ अशुद्धियां थीं, उन्‍हें ठीक कर रहा हूं, गौर फरमाइएगा. शुक्रिया. गंगा सहाय मीणा (Ganga Sahay Meena) (वार्ता) 07:40, 11 जून 2012 (UTC)

सुझाव[संपादित करें]

मैने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के लेख को इस कारण देवनागरी अँक में नही लिखा कि इसका ही उपयोग सही है अथवा इसका सभी लेखो पर उपयोग कर हिंदी के हित में काम किया। खोजें और बदलें टुल के द्वारा देवनागरी को अन्तर्राष्ट्रीय अँक में परिवर्तित करना अत्यन्त सहज हो जाता है। यदि देवनागरी अंक में लेख को लिखा जाए तो देवनागरी से अन्तर्राष्ट्रीय बिना किसी त्रुटि के किया जा सकता है। परन्तु अन्तर्राष्ट्रीय अँक को देवनागरी में बदलने से जालपृष्ठ के पते व कुछ कोड भी काम नही करते जिससे लेख में शब्द आदि इधर उधर दिखाई देते। मेंरा दोनो अंको के उपयोग से सहमत हुँ। परन्तु चर्चा में किसी भी अंक को विकिपीडिया में उपयोग हेतु चुना जाता है तो इस से उस अँक को परिवर्तित करने का कार्य सरल हो जाएगा। फिर भी में आपसे क्षमाप्राथि हुँ। एवम् मेरा सुझाव है कि यदि आप (।) के उपयोग से सहमत है तो इसका उपयोग करें। धन्यवाद-- आनन्द विवेक सतपथी वार्ता 02:33, 16 जून 2012 (UTC)

भाई आनंद विवेक जी, मैं आपके खडी पाई (।) के उपयोग के सुझाव से सहमत हूं और मेरे भावी संपादनों में इसका ध्‍यान रखूंगा। यह जानकर प्रसन्‍नता हुई कि अंतर्राष्‍ट्रीय अंकों से आपका कोई विरोध नहीं है। आपका बताया तकनीकी कारण महत्‍वपूर्ण हो सकता है लेकिन विकिपीडिया का आम पाठक तकनीक की इतनी गहराई में नहीं जाता। वह गूगल में सर्च करता है और अपने काम का पृष्‍ठ खोलकर पढने लगता है। इसलिए मेरा तो यही सुझाव है कि अंतर्राष्‍ट्रीय अंक लिखने में कोई बुराई नहीं है. गंगा सहाय मीणा (Ganga Sahay Meena) (वार्ता) 03:27, 16 जून 2012 (UTC)

वाक्यों की समाप्ति के सन्दर्भ में[संपादित करें]

मीणा जी आप हिन्दी विकि को अपना योगदान देनें के लिए आए हैं इसके लिए आप प्रशंसा के पात्र हैं। लेकिन एक समस्या है जिसे आपको सुधारना चाहिए और वह यह कि हिन्दी भाषा में वाक्यों की समाप्ति बिन्दू से ना होकर पूर्णविराम से होती है। आप इस बात पर ध्यान मत दीजिए कि कौन सी पत्रिका या पत्र कैसे हिन्दी को बिगाड़ने पर लगे हुए हैं। यदि कोई लोकप्रिय पत्रिका या समाचार पत्र हिन्दी के वाक्यों को बिन्दू से समाप्त करने लगे तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह बात सही हो गई है। इन पत्रिकाओ में लिखने वाले स्वयं कुछ खास हिन्दी नहीं जानते हैं। हिन्दी में वाक्य समाप्ति यदि पूर्णविराम से हो रही है तो ऐसा करने वालों ने कुछ सोच समझ कर ही ऐसा प्रावधान किया होगा। दरसल ये जो लोग हिन्दी के वाक्यों को बिन्दू से समाप्त कर रहे हैं ये किसी जयचँद से कम नहीं है, बस अन्तर इतना है कि उस समय के जयचँद ने अपने निहित स्वार्थ के लिए एक विदेशी का साथ दिया और आज के ये भाषाई जयचँद भी विदेशी कमपनियों का साथ दे रहे हैं हिन्दी का स्वरूप बिगाड़ने में। इन लोगों को धिक्कारा जाना चाहिए नाकी इनका पालन किया जाना चाहिए। यदि आप हिन्दी लिखने के लिए गूगल ट्राँस्लिटरेशन का उपयोग करते हैं तो पूर्णविराम की समस्या कैसे सुलझाई जाए के लिए मेरा चौपाल पर लिखी वार्ता देखिए जो अभी पृष्ठ से अन्त में है। और जहाँ तक गूगल अनुवाद का प्रश्न है तो यह बता दूँ कि शुरुआत में गूगल की हिन्दी में उपलब्ध सेवाओं में जो हिन्दी लिखी होती थी उसमें वाक्य पूर्णविराम से ही समाप्त होते थे। लेकिन पिछले १-२ वर्षों से देखने में आ रहा है कि पूर्णविराम को हटा कर सब स्थानों पर एक बिन्दू डाल दिया गया है। अब यह जानबूझकर किया गया है या अज्ञानता में पता नहीं लेकिन हिन्दी के वाक्यों की बिन्दू से समाप्ति बिलकुल गलत है। गूगल अनुवाद का चीनी और जापानी भाषा सेवा का उपयोग करें, उसमे अभी भी वाक्यों की समाप्ति उसी चिह्न से होती है जो चीनी और जापानी भाषा में प्रयुक्त होता है। यह देखें जीमेल का चीनी [1] और जापानी [2] पृष्ठ। वाक्यों के अन्त में देखें पता चल जाएगा कि हिन्दी में ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है।

आशा करता हूँ कि आप इस वार्ता को अन्यथा नहीं लेंगे। धन्यवाद। रोहित रावत (वार्ता) 17:12, 17 जून 2012 (UTC)

भाई रोहित रावत जी, स्‍वागत के लिए शुक्रिया। पूर्णविराम का मसला खत्‍म हो चुका है, इसके लिए आप चौपाल देख सकते हैं। इसके बाद किये संपादनों में मैंने कहीं भी फुल स्‍टॉप के साथ वाक्‍य खत्‍म नहीं किया है। यहां तक तो बात ठीक है लेकिन इस प्रक्रिया में आपने इतना लंबा उपदेश दिया है, इसका निहितार्थ समझ से बाहर है। बात-बात में जयचंद को घुसेडना ठीक नहीं है। दूसरी बात, आपकी 'हंस' के लेखकों के बारे में यह टिप्‍पणी काफी 'केजुअल' है- इन पत्रिकाओं में लिखने वाले स्‍वयं कुछ खास हिन्‍दी नहीं जानते हैं। विकिपीडिया के एक वरिष्‍ठ संपादक से 'हंस' के लेखकों (जो समकालीन हिंदी साहित्‍य के आधार हैं) के बारे में ऐसी टिप्‍पणी की उम्‍मीद नहीं की जाती। आशा है आप भी इस वार्ता को अन्‍यथा नहीं लेंगे। गंगा सहाय मीणा (Ganga Sahay Meena) (वार्ता) 18:08, 17 जून 2012 (UTC)

ब्राह्मणवाद पृष्ठ को शीघ्र हटाने का नामांकन[संपादित करें]

नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ ब्राह्मणवाद को विकिपीडिया पर पृष्ठ हटाने की नीति के मापदंड व2 के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।

व2 • परीक्षण पृष्ठ

इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है। यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये प्रयोगस्थल का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो देवनागरी में कैसे टाइप करें पृष्ठ देखें।

यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।

सुयश द्विवेदी (वार्ता) 13:55, 13 अप्रैल 2018 (UTC)