सदस्य वार्ता:आशीष भटनागर/पुरालेख06

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

साँचा:प्रबन्धकगतकततततण

अनुक्रम

रतन सिंह[संपादित करें]

आशीष जी, नमस्कार राजस्थानी भाषा के साहित्यकार श्री सोभाग्य सिंह जी पर एक लेख मैंने जोड़ा है लेकिन फोटो सही नहीं लगा पा रहा हूँ कृपया आप लेख देख कर संपादित करदे | सादर धन्यवाद रतन सिंह

आशीष जी नमस्कार

अब विकि पर लेख व चित्र आदि जोडना धीरे-धीरे समझ आ रहा है कोई दिक्कत आयेगी तो आपको जरुर लिखुंगा |

अभी तक निम्न लेख विकि पर जोडे है किसी मे सुधार की गुंजाईस हो तो कर देना |

http://hi.wikipedia.org/wiki/वीर_दुर्गादास_राठौड http://hi.wikipedia.org/wiki/रणथंभोर_दुर्ग http://hi.wikipedia.org/wiki/राव_जोधा http://hi.wikipedia.org/wiki/शेखावत http://hi.wikipedia.org/wiki/सोभाग्य_सिंह_शेखावत

मैने और भी कई इतिहास के लेख अपनी वेबसाईट http:rajputworld.co.in और ब्लोग http://gyandarpan.com पर लिख रखे है उन्हे भी विकि की भाषा के हिसाब से कुछ बदलाव कर जल्द ही जोडुंगा |

धन्यवाद --रतन सिंह शेखावत १७:२९, २४ मार्च २००९ (UTC)

प्रमुख चित्र[संपादित करें]

कृपया सुझाव विकिपीडिया वार्ता:प्रमुख चित्र उम्मीदवार पर देखें।--पूर्णिमा वर्मन १४:०६, २५ मार्च २००९ (UTC)

लाल लिंक[संपादित करें]

आशीष जी, ये देखियेगा जरा कि जो मैने मुद्रा स्फीति वाला समाचार मुखपृष्ठ पर लगाया है ,उसपर मुद्रा स्फीति दर कि कड़ी को विकि लाल रंग से क्यो दिखा रहा है।मैने ब्राउसर कैश भी साफ कर के देखा फिर भी कुछ नही बदला। बलकी हाल कि घटनाओं में उसे नीले लिंक से दिखा रह है।--सुमित सिन्हावार्ता ०७:०२, २७ मार्च २००९ (UTC)

मीडियाविकि:Customcssjsprotected‎[संपादित करें]

आपने उपरोक्त पृष्ठ पर लिखे गए व्यवस्था संदेश, "इस पन्ने पर दूसरे सदस्य की व्यक्तिगत वरीयताएँ होने के कारण, आपको यह पन्ना बदलने की अनुमति नहीं है।" को बदल कर "आपको यह पन्ना बदलने की अनुमति नहीं है क्योंकि इस में किसी अन्य सदस्य की व्यक्तिगत वरीयताएं होने के कारण।" कर दिया। यह वाक्य अशुद्ध है और प्रबंधक के पद पर इस प्रकार की अनुत्तरदायित्वपूर्ण भाषा का प्रयोग आपत्तिजनक है। कृपया इसे ठीक करें।--पूर्णिमा वर्मन ०८:३७, ३१ मार्च २००९ (UTC)

इसका उत्तर आपकी वार्ता में है। कृपया देखें।--आशीष भटनागरसंदेश ०९:०४, ३१ मार्च २००९ (UTC)
तकनीक का ध्यान रखने के लिए धन्यवाद। कृपया भाषा भी सही कर दें।--पूर्णिमा वर्मन ०९:०६, ३१ मार्च २००९ (UTC)

सदस्य Evian[संपादित करें]

नमस्कार! आपको हाल के परिवर्तन या मेरे योगदान एवं चौपाल द्वारा विदित ही होगा, कि मैं बहुत पहले से ही पद्म भूषण लेख एवं उसके सभी धारकों के पृष्ठ बना रहा हूं। इन पृष्ठों में यथा संभव लेकिन न्यूनतम सूचना डाली गई है। जिसमें कि धारक का नाम, पाने का वर्ष, क्षेत्र एवं सांचा ये सभि हैं। ये सभी अभी तक मेरे बनाए हुए थे, एवं १९५४ से १९९१ तक के धारकों के पेज न्मैंने ही बनाए थे। उनके लिए मैंने चौपाल पर वालंटियर मांगे, किंतु कोई आगे नहीं आया। तब मैं अकेले ही बढ़ गया। अब आपने कुछ पृष्ठ १९९२ से आगे के धारकों के बनाए हैं, जो कि मात्र य धारक हैं, इतनी ही सूचना उपलब्ध कराते हैं, और सदस्य :evian द्वारा बनाए गए अंग्रेज़ी नाम के पृष्ठों का पुनर्निर्देशन मात्र हैं।

  • एक तो अंग्रेज़ी नाम के पृष्ठोंको बिना किसी खास कारण बढ़ावा नहीं देना चाहिए। और
  • यदि किसी सदस्य ने बना भी दिए हैं तब या तो उसे चेतावनी दें, कि उन्हें हिन्दी में बनाए,
  • या कम से कम उन्हें हटा कर हिन्दी के बनाएं,व जुड़ीहुई कड़ियों को वहां निर्देशित करें।
  • यदि जुड़ी हुई कड़ियां १ ही हैं (जैसी कि इस मामले में हैं) तब आपको पता ही है, कि मैं उन्हें पहले ही बना रहा हूं। ये उस सदस्य ने मात्र पेज बढ़ाने की होड़ से ही बनाए हैं, मात्र उसकी भूल सुधार करें।

जबकि आपने सभी पृष्ठों का अनावश्यक नाम अनुवादकर मात्र एक वाक्य लिख दिया। या तो आप इस काम में आईं हैं, तो पूरा फार्मैट डालएं। अन्यथा, छोड़ दें, मैं तो कर ही रहा हूं। यह सर्व विदित ही है। आशा है, प्रबंधक होने के नाते आ चौपाल और हाल के परिवर्तन देखती ही होंगीं। अन्या पूरा फ़ार्मैट बनाएं, जिससे की लेखों में एकरूपता बनी रहे। मुझे आपकी वरिष्ठता का पूरा ध्यान है, किंतु इस काम से पद्म भूषण परियोजना में अनावश्यक व्यवधान ही पड़ेगा। मात्र इस उद्देश्य से, कि ऐसा ना हो पाए, मैं आपको सूचना दे रहा हूं। कृपया ध्यान दें और ऐसा कदापि ना समझें कि मेरा आशय ये है, कि मेरे लॆख में काम ना करें। मैंने तो पहले भी ढेरों बार आपकॊ संपादन के लिए आमंत्रित ही किया है।--आशीष भटनागरसंदेश ०१:३८, २ अप्रैल २००९ (UTC)

नमस्ते आशीष, मैंने यह सोच कर पन्ने बना दिए ताकि वार्ता पृष्ठ बेकार न जाएँ। अंग्रेजी पन्ने सिर्फ पुनर्निर्देशित इसलिए किए कि वे मुख्य पन्ने से जुड़े थे। मैंने सोचा कि आप पन्ने बनाएँगे तो सुविधा रहेगी। बाद में उन्हें हटा देंगे। मुझे नहीं लगता कि Evian ने अंग्रेज़ी पन्ने अपने आप लिखकर बनाए। वे आपके द्वारा कॉपी की गई सूची पर क्लिक कर के ही बनाए गए हैं। हर व्यक्ति अपने समय और योग्यता के अनुसार ही काम करता है। मेरे विचार से अभी किसी को मना करने का समय हिन्दी में नहीं आया जब पहले ही हम इतने पीछे हैं। आपने भी तो बहुत से पन्ने होड़ में बनाए हैं और किसी काम के नहीं। लेकिन कभी न कभी वे सही होकर मुख्य धारा में आ जाएँगे। यही सोचकर हमें Evian को काम करने देना चाहिए। अगर आपको व्यवधान होता है तो मैं उन वार्ताओं के लेख वाले पन्ने नहीं बनाऊँगी। पर आपका यह सोचना गलत है कि वार्ता पृष्ठ गहराई में गिने नहीं जाते। आप गहराई का फार्मूला देख सकते हैं। कुछ दिन पहले चौपाल पर भी इस विषय में चर्चा हुई थी। --पूर्णिमा वर्मन १५:४५, २ अप्रैल २००९ (UTC)
जो काम करता है भूल उसी से होती है जो काम ही न करे उससे क्या भूल होगी। evian जो काम कर रहे हैं वो बहुत ही महत्वपूर्ण काम है। गहराई बढ़ानी भी बहुत जरूरी है जो उनके प्रयासों से बढ़ी भी है। अन्य विकि वाले या यूं कहिए कि विकि कम्यूनिटि में गहराई का एक अलग सम्मान है यह आप भी मानिएगा और जो आदमी इतनी सिद्दत से इस विशेष काम को कई महीनों से लगातार किए जा रहा है उसकी तारीफ करनी ही चाहिए मैने भी की। पुरस्कार देना भी सर्वथा उचित था जो कि पूर्णिमा जी ने दिया। इससे उत्साह तो बढ़ता ही काम को recognition भी मिलता है। अगर इस दौरान वो कोई भूल करता है जो कि कोई भी कर सकता है मैं भी और आप भी, तो उसका अपमान या तिरस्कार न करके हमको उसको सुधारना चाहिए। --Munita Prasadवार्ता ०२:४९, ३ अप्रैल २००९ (UTC)

धन्यवाद[संपादित करें]

आशीष जी बार्न सितारों से आज की सुबह जगमगा उठी धन्यवाद. आपके आशीर्वाद से भविष्य में भी इसी तरह निरंतर प्रयत्नशील रहूँगा धन्यवाद --गुंजन वर्मासंदेश ०५:१६, ३ अप्रैल २००९ (UTC)

क्या कहने[संपादित करें]

क्या कहने हैं आपकी लगन के । पिछले कुछ दिनों में तो आपने कमाल ही कर दिखाया है । यह आप ही का योगदान है कि हम काकेशियाई भाषा जॉर्जियन से स्पर्धा ले रहे हैं । यूं तो आपके रहते इसको पीछे छोड़ना कोई बड़ी बात नहीं लगती पर आपका विभिन्न क्षेत्रों में विविधता के साथ आपका योगदान प्रशंसनीय है । कृपया लगे रहें ! --अमित प्रभाकर १८:३८, ४ अप्रैल २००९ (UTC)

नहीं आशीष जी, इसमें मेरी ही गलती है कि मैं अब विकि से उतना संलग्न नहीं रह पा रहा हूँ जितना पहले था पर अब हम ४८वें स्थान आ गए हैं तो अत्यंत हर्ष हो रहा है । निरंतर आगे बढ़ना गुणवत्ता के बलिदान के मूल्य पर न हो इसकी कोशिश करता रहूंगा । --अमित प्रभाकर ०५:०७, ५ अप्रैल २००९ (UTC)
चलिए किसी की भी गलती ना मानें, तो भी अब तो कार्य सुचारु होगा, इस आशा के साथ आपको सूचना देता हूं, कि कर्तूली भाषा को हमने अभी अभी पछाड़ दिया है। उनके २८६५६ के मुकाबले हमारे २८६८३लेख हो गए हैं। आपका आगम कितना शुभ रहा है। आफ जब चाहें, तो मुझसे जीटाक पर भी वार्ता कर सकते हैं।--आशीष भटनागरसंदेश ०५:१५, ५ अप्रैल २००९ (UTC)
चौपाल पर मेरा संदेश अपनी जगह से हटाए जाने का मैं सख्त विरोध करती हूँ। कृपया उसे फिर से लगाएँ। अगर आपका संदेश मैं अपनी जगह से हटा दूँ तो आपको कैसा लगेगा?--पूर्णिमा वर्मन ०५:२५, ५ अप्रैल २००९ (UTC)

स्वप्न झड़े फूल से मीत चुभे शूल से,
लुट गए श्रृंगार सभी, बाग़ के बबूल से
और हम खड़े खड़े, बहार देखते रहे
कारवां ग़ुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे । ------गोपाल दास "नीरज"

हम जार्जियन (माफ़ कीजियेगा मैं यहाँ क़केशियाई जैसे विशेषणों का इस्तेमाल नहीं करूंगा, क्योंकि मुझे लगता है कि ये भी विवाद का एक कारण बना था ) की फतह का जश्न मनाने में लीन थे और दो वरिष्ठ प्रबंधक एक दूसरे पर टिप्पणियां कस रहे थे और नाम पाने की होड़ में एक दूसरे को भला-बुरा कह रहे थे । मैं यहाँ दोषी का निर्णय नहीं कर रहा । पर इसी बीच जॉर्जियन निकल गया । शायद मध्यकाल में इसे ही हारना कहते थे । बहुत दुःख हुआ और मुझे पूरा विश्वास है कि मुझसे अधिक दुःख आप दोनों को हुआ होगा इस बात का । खैर जो हुआ सो हुआ, हमें इस बात की सीख लेनी चाहिए कि आपसी मतभेद का वार्ताजनित हल, यथाशीघ्र निकाला जाना चाहिए । उम्मीद है कि आगे से अन्य सदस्यों को ऐसी टिप्पणियों का सिलसिला देखने को नहीं मिलेगा । आशीष जी, मैं आपका बहुत सम्मान करता हूँ (और पूर्णिमा जी का भी) और जानता हूँ कि ऐसी घटनाएं किसी घटने वाले समाज में होती ही रहती हैं, पर चाहता हूँ कि इस क्रम में जो अवांछित प्रत्योत्तर सुनने को मिले हैं उसे चौपाल और अन्य जगहों से हटा दूँ ताकि विकि के नए तथा अन्य यूज़र्स का ध्यान हमारी भिन्नमत्ता पर न जाए - क्योंकि यह विकि के भविष्य के लिए घातक है । पर इसके लिए ज़रूरी है कि आप दोनों भी अपने मतभेद भुलाकर आपसी सहयोग पूर्व की तरह ही करें । आपके पुराने बर्ताव को देखते हुए तो यही लगता है कि यह तुरंत बहाल हो जाएगा । और क्यों न हो, ऐसे मतभेदों से हमारे एकमात्र लक्ष्य विकि को तो कुछ लाभ नहीं बल्कि नुकसान ही है ।

तो यदि आप अपनी सहमति दे दें (मेल के द्वारा, या किसी और प्रकार से) तो मैं तकरार की वार्ता को हटा कर विकि को अधिक सामंजस्यपूर्ण माहौल दे दूं ।

प्रतीक्षारत, अमित प्रभाकर । (माफ़ कीजिएगा आशीष जी, मैं थोड़ा प्रयास करने के बाद भी आपकी ईमेल-आइडी नहीं ढूंढ सका, संदेश यहीं छोड़ रहा हूँ । आपका उत्तर मिलते ही इसे हटा लूंगा ) --अमित प्रभाकर १७:१०, ८ अप्रैल २००९ (UTC)

नमस्कार अमित जी! आपसे तीन शब्द मुख्यतः कहूंगा:
  • क्षमा
  • आभार
  • आश्वासन
इनका विस्तृत ब्यौरा आपको मेल के आपके प्रश्न में दे रहा हूं। हां उपरोक्त कथित सब कुछ हटाने में मेरी पूर्ण सहमति, हार्दिक इच्छा (जो कि किसी डर से दबी रही) है। मुझे लगता है, कि इन बातों का यहां उत्तर देना अच्छा होता, पर बाद में यही उचित लगा कि कुछ बातें पर्दे में ही रहें तो अत्योत्तम होगा।

सहयोग- निवेदन[संपादित करें]

प्रिय मित्र आशीष ! इस ज्ञानयज्ञ में आपकी यह सहभागिता व योगदान सराहनीय है ।विकी-जगत में, मै नवागन्तुक हूँ । सर्वोत्तम-सम्पूर्ण विकी अनुभव में आपसे सहयोग अपेक्षित है

सप्रेम

ऋषि द्विवेदी

Rishi14101975@gmil.com

लेख संपादन हेतु[संपादित करें]

भाई जी,नमस्कार शेखावाटी नाम से आज एक लेख जोड़ा है लेकिन उसे कुछ संपादित करने की जरुरत है कृपया हो सके तो विकी भाषा अनुरूप संपादित करदे | सादर रतन सिंह

महाभारत[संपादित करें]

आपका कहना बिलकुल सही है। लेकिन मैं सोच रहा हुँ की पहले जितने भी पात्र हैं उन सबके बारे में लिख लूँ, ताकि जितने भी लाल दिख रहे हैं नीले हो जाएँ, और क्युंकी साँचे में भी बदलाव करने पड़ रहे है, इसलिए सबके बारे में जो भी जानकारी मिल पा रही है, मैं लिख दे रहा हूँ, फिर सबमे साँचा भी डाल दूंगा।--रोहित रावत १८:०८ ९ अप्रैल, २००९

विमान क्षेत्र[संपादित करें]

एक शंका थी Airport का हिंदी विमानतल होगा की विमान क्षेत्र। मेरे हिसाब से विमान क्षेत्र को अंग्रेजी में airfield कहेंगे। --गुंजन वर्मासंदेश ०५:३८, १४ अप्रैल २००९ (UTC)

Airport के लिए मानक शब्द विमान क्षेत्र है इस बात पर अभी भी confusion की स्थिति हैं . अगर आप गूगल पर "विमान क्षेत्र" डालेंगे तो एक भी लिंक ऐसा नहीं मिलेगा जो की किसी हवाई अड्डे को संदर्भित हो.

यह देखिये

कृपया मार्गदर्शन करें --गुंजन वर्मासंदेश ०७:१७, १५ अप्रैल २००९ (UTC)

तुम्हारे भेजे हुए तीन में से बाद के दो लिंक्स तो खुले ही नहीं या खाली खुले हैं। और पहले वाले में तो कुछ खास मिला नहीं।
वैसे जहां भी यह संदर्भ प्रयोग होता है, अिकांश जगह हवाई अड्डा प्रयोग होता है, क्योंकि यह चालू (प्रचलित)एव आम शब्द है। दूसरे विमानतल मराठी में या मराठवाड़ा प्रभावित क्षेत्रों में प्रयोग होता है, जो कि ग्वालियर से लेकर उत्तर कर्नाटक तक जाता है। इसमें हिन्दी की शुद्धता (तत्सम नहीं कहा) नहीं मिलती, खास मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर, जहां मराठा प्रभाव नहीं है। पर पुणे निश्चित ही घोर मराठा क्षेत्र है। मैंने जो शुरु से भा०वि०प्रा० में देखा सुना पढ़ा वो बताया। हां दिल्ली में सफ़दरजंग हवाई अड्डे पर बोर्ड भी लगा है। मौका मिलते ही फ़ोटो खींच कर लगा दूंगा। पर तुम्हें जो सही लगे उसे करो, किंतु अब तक बहुत सी जगहों पर विमानक्षेत्र प्रयोग हुआ हुआ है, तो एकरूपता का भी प्रश्न है। बाकी जैसा उचित लगे, कोई अच्छा बुरा मानने वाली बात नहीं है। मैंने कहा भी था, कि ये राय/सुझाव है।तुम भी प्रबंधक बनोगे कल को। अपने निर्णय स्वयं लो। कोई बाध्य नहीं करेगा, यहां कोई विकी का मानदंड नहीं है। एक और शब्द है- विमानपत्तन; Airports Authority of India ≡ भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण

यह शब्द भी कई जगह प्रयोग होता दिखाई देगा, और सटीक भी है।किंतु सामान्य प्रचलन में नहीं है। बाकी तुम स्वयं निर्णय लो। हां जैसा कि मैंने बताया कि भाविप्रा में प्रयोग होता है, तो उसकी वेबसाइट अभि हिन्दी में अच्छी बनी नहीं है।और कार्यालीय प्रलेख तुम्हें गूगल पर सर्च करने पर मिलेंगे नहीं। अतएव इसका सपोर्ट भाविप्रा से नेट पर तो नहीं मिलेगा।--आशीष भटनागरसंदेश १०:५३, १५ अप्रैल २००९ (UTC)

वार्ता:दिल्ली[संपादित करें]

उपरोक्त पेज देखें। वहां पर दिल्ली के लिए एक नया ज्ञानसन्दूक लगा है। उसे पसंद करें, व बताएं। सही है, तो पुराना हटा कर नया लगा दूं। इसके सारे लिंक्स नीले हैं। सभी पेज बने हैं। मानचित्र आपकी पसंद का है, ना कि वही पुराना भारत के नक्शे पर एक डॉट। बताएं।--आशीष भटनागरसंदेश १७:५०, १७ अप्रैल २००९ (UTC)

नया ज्ञानसंदूक बेहतर है। उसे ही लगाना चाहिए। पर आप को सुझाव दे कर तो कोई लाभ नहीं है। आप ने मेरी वार्ता पर सुझाव मांगा और जवाब की प्रतिक्षा किए बेगैर परिवर्त कर भी लिया। खैर, परिवर्तन बेहतर ही है और आशा करती हूँ ऐसा ही भविष्य में भी हो।--Munita Prasadवार्ता ०३:४४, १८ अप्रैल २००९ (UTC)
आप नाराज ना हों। उससे पहले कृपया दिल्ली को संपादन कर के देख लें, कि वहां पर पुराना वाला ज्ञानसन्दूक भी नीचे ही सुरक्षित रखा है। पहले मैंने सोचा था, कि वार्ता पर लगा दूं, किंतु बाद में मुख्य लेख में सही स्थान पर लगा कर, पुराने वाले को कमेंट में डाल कर छिपाना ही उचित लगा।यदि प्रतीक्षा ना करनी होती तो संदेश ही क्यों देता। आपको शायद पता ना हो, कि सांचे में कुछ गलतियां थीं, जो कि वार्ता पृष्ठ पर नहीं दिखाई देतीं, जबकि मुख्य लेख में दिखाई देती हैं, क्योंकि वह एक लेख है, ना कि non-operational page जो कि वार्ता है। इसीलिए उसे वहां लगा कर देखना ही बेहतर होगा।इससे अधिक कुछ नहीं कह सकता हूं। अधिक चर्चा चैट पर कर सकते हैं। पसंद आने का धन्यवाद।--आशीष भटनागर संदेश ०७:१८, १८ अप्रैल २००९ (UTC)

सहायता के लिए धन्यवाद[संपादित करें]

प्रणाम! सलाह के लिए धन्यवाद। मुझे विकिपीडिया पर केवल संपादन का अनुभव है, अन्य माध्यमों से मैं अभी तक अवगत नहीं हूं। इसलिए मुनिता जी की वार्ता पर संदेश छोड़ा। उतार देने के लिए पुन: धन्यवाद। --प्रियंका १२:१७, २० अप्रैल २००९ (UTC)

श्रीमान् उस लेख का नाम पहले मांसाहारी था जो बिल्कूल ही उपयुक्त नहीं था। मैं जीव विज्ञान के लेख खोजते खोजते वहां पहुंची थी। देखा कि लेख का उपशीर्षक जो कि वर्तमान नाम से ही था, उसको लेख का नाम दे दिया। आपको जो सही नाम पता है वो बदल दिजिए।

--Munita Prasadवार्ता १०:०८, २९ अप्रैल २००९ (UTC)

चन्द्रशेखर वेङ्कट रामन्[संपादित करें]

चन्द्रशेखर वेङ्कट रामन् की सही नाम वर्तनी चंद्रशेखर वेंकटरमण है।--आशीष भटनागरसंदेश १५:५१, ३० अप्रैल २००९ (UTC)

चन्द्रशेखर वेङ्कट रामन् लेख पहले से था। मैं जब इसमें संपादन कर रही थी तो मुझे भी इस पर थोड़ा संदेह हुआ। परन्तु चन्द्रशेखर वेङ्कट रामन् की वर्तनी विभिन्न जगहों पर भिन्न भिन्न थी, मैं समझ नहीं पाई कि सही वर्तनी क्या है। इस लेख पर कई जानकार लोगों ने कार्य किया है इसलिए मैने बदलना उचित नहीं समझा। यदि आपके पास कुछ ठोस वजह है तो आप निःसंकोच शीर्षक बदल सकत हैं।--Munita Prasadवार्ता १५:५९, ३० अप्रैल २००९ (UTC)
ठोस वजह के लिए यह कहूंगा।
  • रामन् कोई शब्द नहीं होता, सही शब्द रमण होता है, जो कि अंग्रेज़ों से बोला नहीं जाता था, ण के कारण।तो रामन हुआ, और english में Raman को रामन और रमन और रमण कुछ भी पढ़ा जा सकता है।
  • वेङ्कट को सरल रूप में अं की मात्रा के संग लिखा जा सकता है, अन्यथा गङ्गा लिखा जाता। जो वजह गंगा के लिए है, वही वेंकट का भी समर्थन करेगी।
शेष जैसा आप चाहें। मैंने वहां बेहतर सांचा तो लगा दिया है।--आशीष भटनागरसंदेश १६:०४, ३० अप्रैल २००९ (UTC)
आप कृपया संदेश मेरी वार्ता पर ही दें मैने आपसे कोई प्रश्न नहीं पूछा है जिसका उत्तर मुझे आपकी वार्ता पर जाकर देखना होगा। वैसे इस लेख के वार्ता पृष्ठ पर भी इस बारे में किसी ने लिखा है उसको भी एक बार देखा जा सकता है।

--Munita Prasadवार्ता १६:०९, ३० अप्रैल २००९ (UTC)

आपका बहुत धन्यवाद, यही बात मैंने एकबार पूर्णिमा जी को भी कही थी कि मुझे जवाब मेरी वार्ता पर ही दें। वजह यह है कि वार्ता पर जवाब देंने पर एक संदेश फ्लैश होता है और मुझे पता चल जाता है कि किसी ने कुछ लिखा है और पढ़ लेती हूँ। जबकि आपकी वार्ता पर क्या परिवर्तन हुआ यह मुझे जल्दी पता नहीं भी चल सकता है, और कोई खाश वजह नहीं है।--Munita Prasadवार्ता १६:१९, ३० अप्रैल २००९ (UTC)

autocollapsed[संपादित करें]

आशीष जी धन्यवाद ! सांचे को autocollapsed कैसे बानाते है.मैंने देखा की IE पर अपनी आप साचे collapse हो जाते है लेकिन Fire Fox में नहीं | --गुंजन वर्मासंदेश ०५:२५, ५ मई २००९ (UTC)

आशीष जी सलाह के लिए धन्यवाद. कृपया इन चित्रों को देखिये एक internet explorerr से है और दूसरा fire fox का. {{कानपुर}} IE में तो collapsed दीखता हैं पर fire fox मैं नहीं. मैंने अंग्रेजी विकी पर टेस्ट किया है पर वहा दोनों ब्राउजर collpased सांचे दिखाते हैं --गुंजन वर्मासंदेश ०४:५५, ७ मई २००९ (UTC)

75px 75px

मैं अभी यही सोच रहा था, कि ये चित्र क्यों अपलोड किए हैं। उतने में तुम्हारा संडेश आ गया। लेकिन मैं तो फ्लॉक Flock प्रयोग करता हूं, जो कि फायरफ़ॉक्स का ही बदला रूप है। उसमं भी वही दिखता है, जो IE वाले में है, यानी कोलैप्स्ड। फायरफॉक्स मेरे पास नहीं है। सही कहूं तो मोज़िल्ला नहीं है। flock भी firefox ही है। तो अब यही कहूंगा, कि फिल्हाल तो IE या flock ही प्रयोग कर लो। पता नहीं क्या सेटिंग बदलनी होगी, या अंदरूनी कमी है। हां चित्र चाहो तो हटा देना। या सांचा:delete लगा देना।--आशीष भटनागरसंदेश ०५:०७, ७ मई २००९ (UTC)

विभिन्न देशों के झंडे/पताकाएँ[संपादित करें]

आशीष भटनागर जी आपसे एक विनम्र निवेदन है की आप सारे देशों और अन्य आश्रय क्षेत्रों के झंडों वाले साँचें बना दे क्योंकि इसमें आपको महारथ प्राप्त है। मैंने बहुत प्रयास किया लेकिन ये वाले साँचे मुझसे नहीं बन पा रहे हैं। एक बार सभी देशों के झंडे साँचो में आ जाएगें तो वे सभी लेख सुंदर लगेंगे जिन पर इनका संदर्भ लिया गया है जैसे एशियाई खेल २००६। इस लेख पर बहुत देशों के झंडे नहीं है और यह लेख बहुत अच्छा नहीं लग रहा है। --रोहित रावतसंदेश २०:३५ १० मई, २००९ (IST)

आपके बताए गए एशियाई खेल के लेख पर उपस्थित सभी देशों के झंडे तैयार हैं। इसके अलावा अन्य भी लगभग सभी देशों के सांचे तैयार हैं। किंतु उनके लघुरूप जैसे {{IRQ}} Flag of Iraq.svg इराक के सभी सांचे तैयार नहीं हैं, क्योंकि उनसे संबंधित कोई ऐसा लेख अभी तक बना नहीं है, जहां की वे सारे प्रयोग हुए हों। हां, जो भी मिलते गए, मैंने बना डाले। सभी एक स्थान पर प्रयोग हों, तो उनकी पूरी सूची उपलब्ध होगी। खैर, आगे कभी भी कोई इस प्रकार का लघुरूप का सांचा मिलेतो उसमें {{पताका |ईराक}} की तरह पाठ डाल देना, जिस देश का भी हो।--आशीष भटनागरसंदेश ०२:५१, ११ मई २००९ (UTC)

नया प्रत्याशी / सुझाए चित्र[संपादित करें]

आशीष जी एक नया चित्र जोड़ा है , कृपया देख लें। --गुंजन वर्मासंदेश ०३:४८, १२ मई २००९ (UTC)

धन्यवाद[संपादित करें]

एशियाई खेल २००६ को पूरा करने और सभी देशों की पताकओं के साँचों के लिए धन्यवाद। रोहित रावत १०:११, १२ मई २००९ (UTC)रोहित

चित्रगुप्त[संपादित करें]

आदरणीय आशीष जी, मेरे पास भगवान चित्रगुप्त से सम्बधित चित्रगुप्त चालिसा, कायस्थ दोहावली एव़ं रामायण की तर्ज पर चित्रगुप्तायण है । जो मेरे पिताजी द्वारा रचित है । वे पुस्तक छपवाना चाहते थे मगर ३०-०४-२००७ को पीलिया की बिमारी ने उनको हम लोगों से हमेशा के लिये दूर कर दिया। मै उसे आपकी चित्रगुप्त वाली जानकारी मे जोड़ना चाहता हूँ । कृपया मर्गदशन करें ।

प्रिय मित्र, आपकी इच्छा अवश्य पूरी होगी। किंतु उससे पूर्व २-३ बातें बताता हूं।
  • आप संदेश के बाद --~~~~ अवश्य लिखा करें, जो कि हस्ताक्षर होता है। सेव करने के बाद स्वतः हस्ताक्षर बन जाता है। वरना मुझे कैसे पता चलेगा, कि ये किसका संदेश है, व किसे उत्तर दूं?
  • क्या आप के पास इन प्रलेखों की सॉफ्ट कॉपी है? यानि टाइप कर कम्प्यूटर में सेव की हुई, ना हो तो आप हिन्दी में टाइप कर (युनिकोड में) या यहीं मैं लेख के लिंक बना देता हूं, वहां टाइप कर सेव कर दें। उनकी एडिटिंग और विकिकरण मैं स्वयं कर दूंगा। फिर इन लेखों के लिंक सभी कायस्थ संबंधित लेखों में डाल देंगे। या कोई साँचा बना देंगे, जैसे साँचा:हिन्दू धर्म, साँचा:हिन्दू धर्म सूचना मंजूषा साँचा:जैन धर्म, इत्यादि हैं। अभी तो कायस्थ विषय पर इतने लेख नहीं हैं। आप ये लेख बना दें: चित्रगुप्त चालीसा, कायस्थ दोहावली एव़ं चित्रगुप्तायण, तो मैं प्रतीक्षारत हूं इन लेखों का। --आशीष भटनागरसंदेश १०:५८, १३ मई २००९ (UTC)

चित्रगुप्त[संपादित करें]

आदरणीय आशीष जी, नमस्कार। मेरे पास भगवान चित्रगुप्त से सम्बधित चित्रगुप्त चालिसा, कायस्थ दोहावली एव़ं रामायण की तर्ज पर चित्रगुप्तायण सभी प्रलेखों की सॉफ्ट कॉपी है जो क्रति देव हिन्दी फाँन्ट मे टाइप कर कम्प्यूटर में सेव की हुई है जिसे(युनिकोड में)किस तरह परिवर्तित करना है मै नही समझ पा रहा हूँ क्योकि कापी करके पेस्ट करने मे उसकी लेंगवेज बदल जाती है । कृपया मर्गदशन करें । --Sachin Shrivastava ११:०२, १५ मई २००९ (UTC) सचिन श्रीवास्तव, सतना म०प्र०।--संदेश ११:०२, १५ मई २००९ (UTC)

सचिन जी! एक बात तो यह, कि हर बार इतना आदर ना दें। मात्र नमस्कार से काम चल सकता है। मुझे शर्म सी महसूस होती है। दूसरा कृतिदेव फॉण्ट को आपको युनिकोड में बदलना होगा, तभी काम चलेगा। उसके लिए फाण्ट कन्वर्टर आते हैं नेट पर। fontsuvidha.com पर मिलेंगे, जो कि १५००/- का है। इसके अलावा निःशुल्क भी मिलते हैं, जिन्हें आप सर्च कर लें। इस समय मेरे पास कोई है नहीं। मुझे स्वयं आवश्यकता है। इस बारे में पूर्णीमा जी से राय ले सकते हैं। और विकिपीडीया पर भीएक लॆख है, जिसमें देवनागरी के बारे में सहायता की गई है। वो आपके लाग इन करने से पहले सबसे ऊपर लिखा आता है। कृपया वहां देख लें। यदि मुझे कुछ मिलता है, तो अवश्य बताऊंगा। आपका--आशीष भटनागरसंदेश ११:१२, १५ मई २००९ (UTC)

साँचा:मेल एक्स्प्रेस[संपादित करें]

जी हाँ जब मैने इस साँचे को देखा था तो मुझे भी लगा था कि यह बहुत लंबा और कुछ अव्यस्थित सा है। इसके लिए मेरे कुछ सुझाव इस प्रकार हैं:

(१) इसे हिन्दी वर्ण माला के अनुसार क्रमित किया जाए। एक-एक अक्षर ना भी करें तो समूह में कर सकते हैं जैसे अ-उ तक फिर ऊ-ओ तक ऐसे। इससे सभी अक्षरों में लिखने से बचा जा सकेगा और अक्षर स्मूह तो जाहिर सी बात है अक्षरों से कम ही होंगे। या

(२) इन रेलगाड़ियों को इनके उद्गम स्थल (शहर) के नाम पर वर्गीकृत कर दिया जाए, और शहरों के नाम हिन्दी वर्णमाला क्रम से हो। वैसे ये अधिक उपयुक्त भी होगा क्योंकि हर किसी को रेलगाड़ी का नाम या संख्या तो याद नहीं होगी लेकिन शहर के नामानुसार कोई भी ये देख सकता है कि कहाँ से कौन सी रेलगाड़ी लगती है। या

(३) रेलवे जोन के अनुसार भी वर्गीकृत कर सकतें है। वैसे भी भारत में शायद रेलवे के ९ ही जोन हैं। इन सभी जोनों के अनुसार यहाँ से आरंभ होने वाली रेलगाड़ियों के नामों को वर्गीकृत कर दिया जाए। या

(४) राज्यों के अनुसार भी वर्गीकरण किया जा सकता है।

मेरे अनुसार तो राज्यों या जोनों के अनुसार ठीक रहेगा क्योंकि शहर तो बहुत सारे हैं लेकिन राज्य भी अधिकतम २८ ही हैं। रोहित रावत ०९:२३, २३ मई २००९ (UTC)

आशीष जी मेरे सु़झाव भी रोहितजी से मेल खाते है| अगर आप को ICAO का सांचा याद हो, इस सांचे मे भी वर्ण माला के अनुसार विमानक्षेत्रो को वर्गीकृत किया गया था| इस परियोजना के लिये हार्दिक शुभकामनाए --गुंजन वर्मासंदेश १०:३४, २३ मई २००९ (UTC)
आप लोगोँ के सुज़ाव देने का धन्यवाद, किंतु इन से यह निष्कर्ष निकलता है, कि
यदि ज़ोन के अनुसार बांटें, तो, एवं यदि राज्यों या शहरों के अनुसार बांटें तो भी प्रत्येक गाड़ी अपने उद्गम एवं गंतव्य के अनुसार दो-दो जगहों पर नाम आएगा। यदि नाम के आधार पर बांटें, तो गाड़ियों के नाम भी एक से अधिक हैं, जैसे लखनऊ-दिल्ली मेल या दिल्ली लखनऊ मेल।
हां यदि और कोई उपाय नहीं निकलता है, तब राज्यों के अनुसार ही बांटेंगे। क्योंकि ज़ोन का आइडिया सभी लोगों को नहीं होगा।
पर यदि कोई और बेहतर उपाय मिल पाए, तो पहले उसे देखते हैं। आगे भी सुझाव अपेक्षित हैं। विमानक्षेत्रों और गाड़ियों की संख्या में बहुत ही फर्क है। ये १६०० तो वे ९०। आगे यदि संभव हो तो चौपाल पर ही वार्ता जारी रखें, : लगा कर।--आशीष भटनागरसंदेश १३:३९, २३ मई २००९ (UTC)

साँचा:मेल एक्स्प्रेस[संपादित करें]

मित्रवर, हमको इनको कई भागों में बाँट देना चाहिये, जैसे कि उत्तरी रेलवे, पश्चिमी रेलवे आदि। अन्यथा इसका प्रयोग काफी मुश्किल सा होगा।

आप साँचा:एन एफ एल देखिये। उससे आपको संदाजा लगेगा कि मैं किस बारे मेई बात कर रहा हूँ। मनीष वशिष्ठवार्ता

आपके संदेश को अन्य संदेशों के साथ रख दिया है, चौपाल पर; जिससे कि पूरी चर्चा एक साथ रह पाए। बाद में इस चर्चा को सांचा:मेल एक्स्प्रेस के वार्ता पृष्ठ पर रख देंगे। आशा है आप सहमत होंगे।--आशीष भटनागरसंदेश १४:३९, २४ मई २००९ (UTC)

अति महत्वपूर्णः हिन्दी विकिपीडिया मुखपृष्ठ्[संपादित करें]

आज के मुखपृष्ठ पर आज का आलेख वाले स्थान पर खाली स्थान आ रहा है, संपादक कृपया इसे देखें और शीघ्र सुधार करें। रोहित रावत ०७:२३, ३१ मई २००९ (UTC)

असभय भाषा: तुरंत हटाया जाए[संपादित करें]

मम्मि की चाटना, इस लेख को तुरंत हटाकर इसके लिखने वाले को हिन्दी विकिपीडिया पर प्रतिबंधित कर दिया जाए। रोहित रावत १३:३९, १ जून २००९ (UTC)

आपका कहना ठीक है कि १-२ सक्रिय प्रबंधकों को बताने से चल जाता है लेकिन यह कैसे पता चले की कौनसा प्रबंधक सक्रिय है? मैने इतने सारे प्रबंधकों को इसलिए सूचित किया था ताकि जो भी पहले देख ले वह तुरंत कार्यवाही करे। रोहित रावत १५:३९, १ जून २००९ (UTC)

नमस्कार[संपादित करें]

आशीष जी नमस्कार !! बहुत दिनो के बाद विकि पर लौटा हू। आपको पहले कि तरह सक्रिय पा कर अतयंत प्रसन्ता हुई। प्रमुख चित्र के प्रत्याशी देखे, सभी चित्र अनुपम है एवम उनसे जुडी कडीया बहुत ही ज्ञानवर्धक है| सभी चित्रो मे से मुझे ३३ सप्ताह वाला चित्र प्रमुख चित्र के लायक नही लगा। पहला तो यह इमारत लोकप्रिय नही है, दुसरा photography के हिसाब से भी मुझे यह चित्र सामान्य लगा। कृपया इस चित्र को सम्मलीत करने का कारण से मुझे अवगत कराएंगे। धन्यवाद --गुंजन वर्मासंदेश ०४:४३, २ जून २००९ (UTC)

आज का आलेख[संपादित करें]

आशीष जी यह बडा दुखद है की हिन्दी विकि के प्रमुख योगदानकर्ता शुब्ध हो कर विकि को छोड़ कर चले गये है। मुझे दुख इस बात का है की आप लोग इतने वरिष्ठ सदस्य हो कर भी आपसी सामंजय नही बैठा पाये। खैर, जैसा की अंग्रेजी कहावत है The show must go on मेरे कुछ सुझाव

--गुंजन वर्मासंदेश ०७:५४, ६ जून २००९ (UTC)

मेरे पास तो फिलहाल एक ही लेख का सुझाव है: उड़न तस्तरी। यह लेख मैनें ही बनाया था। यदि इसमें कुछ कमी हो तो बताइए मैं दूर करने का पूरा प्रयास करुंगा।

और एक महत्वपूर्ण बात, जैसा की मैंने चौपाल पर भी पढ़ा कि कुछ प्रमुख योगदानकर्ता छोड़कर चले गए हैं, इसलिए मैं हिन्दी विकि पर संपादक का काम भी करना चाहूँगा ताकि हिन्दी विकि पर काम सुचारु रूप से चलता रहे। संपादक बनने के लिए कहाँ आवेदन करना होता है और पूरी प्रकिया क्या है, कृपया मुझे बताने का कष्ट करें। धन्यवाद रोहित रावत ०८:३३, ६ जून २००९ (UTC)

आज का आलेख-हिन्दी वर्तनी मानकीकरण १२ जून[संपादित करें]

वर्तनी का अर्थ भाषा में किसी शब्द को वर्णों से व्यक्त करने की क्रिया को कहते हैं। हिंदी भाषा का पहला और बड़ा गुण ध्वन्यात्मकता है, जिससे इसमें उच्चरित ध्वनियों को व्यक्त करना बड़ा सरल है। हिंदी में वर्तनी की आवश्यकता काफी समय तक नहीं समझी गई; जबकि अंग्रेजी व उर्दू आदि अन्य कई भाषाओं में इसका महत्त्व था। किंतु क्षेत्रीय व आंचलिक उच्चारण के प्रभाव, अनेकरूपता, भ्रम, परंपरा के निर्वाह आदि के कारण जब यह लगा कि एक ही शब्द की कई वर्तनियाँ मिलती हैं तो इनको व्यक्त करने के लिए किसी सार्थक शब्द की तलाश हुई। इस कारण से मानकीकरण की आवश्यकता महसूस की गई। इस अर्थ में वर्तनी शब्द मान्य हो गया और केंद्रीय हिंदी निदेशालय, ने इस शब्द को मान्यता दी, एवं एकरूपता की दृष्टि से कुछ नियम भी स्थिर किए हैं। हिन्दी भाषा के, कई राज्यों की राजभाषा स्वीकृत हो जाने के फलस्वरूप भारत के भीतर और बाहर हिन्दी सीखने वालों की संख्या में पर्याप्त वृद्धि हो जाने से हिन्दी वर्तनी की मानक पद्धति निर्धारित करना आवश्यक और कालोचित लगा, ताकि हिन्दी शब्दों की वर्तनियों में अधिकाधिक एकरूपता लाई जा सके। तब शिक्षा मंत्रालय ने १९६१ में हिन्दी वर्तनी की मानक पद्धति निर्धारित करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति द्वारा हिन्दी भाषा के मानकीकरण की सरकारी प्रक्रिया का प्रारंभ किया। इस सतत प्रक्रिया के मुख्य निर्देश तय हो चुके हैं जो भारत के सभी सरकारी कार्यालयों में प्रसारित किए गए हैं। इनका अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु भी संस्थान कार्यरत है। विस्तार में...
यहां संदेश लिखें--आशीष भटनागरसंदेश ०३:३७, ८ जून २००९ (UTC)
मेरे विचार में तो लेख उत्तम है, छोटा करने की क्या आवश्यकता है? इतनी तो जानकारी किसी भी लेख में होनी चाहिए। रोहित रावत ०४:१५, ८ जून २००९ (UTC)

कर्ण[संपादित करें]

जी अभी भी लेख विकास क्रम में है। कुछ शीर्षक और उपशीर्षक अभी भी रहते हैं। सन्दर्भों की चिंता ना करें, जब लेख पूरा होने की अवस्था में पहुंचेगा तो मैं सन्दर्भ और बाहरी कड़ियाँँ भी लगा दूँगा। रोहित रावत १५:०३, १२ जून २००९ (UTC)

मेरे द्वारा बनाए गए लेख[संपादित करें]

निम्नलिखित सूची मेरे द्वारा बनाए गए लेखों की है:

मुझे जितना याद था उतने लेख तो मैंने आपको बता दिए हैं, यह संख्या इससे भी कहीं अधिक है। और मैंने उन लेखों का तो उल्लेख तक नहीं किया जो इस विकिपीडिया के कई महानुभवों द्वारा एक-एक पंक्ति के बनाए गए जिसमें कई प्रबंधक और वरिष्ठ प्रबंधक भी शामिल हैं, जैसे कर्ण, शिखंडी, राकेश शर्मा, सहदेव, जरासंध इत्यादि।

और जहाँ तक प्रश्न आपके द्वारा यह कहने का है की मेरे संपादनों की संख्या कैसे बढ़ी है तो मैं आपको यह बता दूँ की मैंने पिछले कुछ दिनों में जो सदस्य और लेख वार्ता पृष्ठ बनाएँ हैं वो इसलिए नहीं की मेरे संपादनों की संख्या बढ़ेगी बल्कि मैंने हिन्दी विकि के संपादनों और अलेख पृष्ठों को बढ़ाने के लिए वे पृष्ठ बनाएं हैं। आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे की मैंने हिन्दी विकि पर वार्ता पृष्ठ लगाने के अतिरिक्त कुछ किया ही नहीं और मैं प्रबंधक बनने के लिए मरा जा रहा हूँ। और वैसे भी इन्हीं वार्ता पृष्ठों को लगाने से हिन्दी विकि की गहराई ९ से १३ पहुँची है। यदि केवल मेरे लेख संपादनों की संख्या भी देखी जाए तो मैं ३ महीनों के अल्प समय में सातवें स्थान पर हूँ। विभिन्न भाषाओं के लेखों की सूची वाले पृष्ठ के हिन्दी संस्करण पर भी ७०% भाग मैंने ही अनुवादित कर हिन्दी में लिखा था। इस पृष्ठ पर मैं ही निरंतर अद्यतित सूची लगाता रहता हूँ। यानी की मैं केवल एक स्थान पर ही सक्रिय नहीं हूँ।

और जहाँ तक मेरे सब्र करने की बात है तो मुझे प्रबंधक ना भी बनाया जाए तो मुझे कोई अपत्ति नहीं होगी क्योंकि कौनसा यहाँ प्रबंधक बनकर कोई वेतन मिलना है। मैं तो जैसा आलोचक जी ने भी कहा था हिन्दी भाषा को अपना योगदान देने और अपने भाषा प्रेम के कारण योगदान दे रहा हूँ, और यदि मैं किसी चीज़ में योगदान दे रहा होता हूँ तो मेरा मानना यह है की वह चीज़ पूरी तरह उभर कर आए और योगदान सार्थक हो। मैंने हिन्दी विकि में बहुत सी कमियां देखीं तो प्रबंधक बनने की इच्छा प्रकट कर दी।

वैसे भी आपको और अन्य प्रबंधकों को यह समझ होनी चाहिए थी की हिन्दी विकि पर प्रबंधकों की संख्या बढ़ाई जाए क्योंकि जितने अधिक प्रबंधक होंगे उतना ही किसी एक पर दबाव कम रहेगा और विकिपीडिया का स्तर सुधरेगा। हिन्दी विकि पर उत्पात मचाने वाले भी कई लोगों के बारे में मैंने आपको सूचित किया था उनपर प्रतिबंध लगाने के लिए। अब बाकी मुझे नहीं पता की इस विकि पर प्रबंधक बनने के लिए और किन और कितने गुणों की आवश्यकता होती है। और यदि आप केवल समय पर जा रहें तो मुझे लगता है यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण पैमाना होगा किसी को प्रबंधक बनाने के लिए।

आगे जैसी आपकी और अन्य प्रबंधकों की इच्छा। मेरा ई-मेल पता है rohitrawatom@hotmail.com रोहित रावत २०:४६, १८ जून २००९ (UTC)

भटनागर जी मैंने आपकी बात को बिल्कुल अन्यथा नहीं लिया और यह मैं भी देख रहा हूँ की आपका योगदान अन्य प्रबंधकों की तुलना में बहुत अधिक है। लेकिन मैंने जो कुछ भी आपको लिखा वह इसलिए की मेरे योगदानों की कहीं अनदेखी ना हो जाए। और मुझे ज्ञात है की आपने बहुत पहले ही मुझे एक बर्न स्टार भी दिया था जिसका मैं आभार प्रकट करता हूँ।

मैंने अन्य प्रबंधकों या सदस्यों पर टिप्पणी इसलिए की थी की जब मात्र एक-एक लेख बनाकर भी लोग प्रबंधक बन गए हैं (यह टिप्पणी आप पर नहीं हैं, क्योंकि आप ने बहुत अधिक लेख बनाएँ है और इसलिए यदि कोई लेख छोटे रह भी जाएँ तो उस पर मुझे कुछ आपत्ति नहीं है), तो मैंने तो जो लेख बनाए हैं वे इन एक पंक्ति वाले लेखों से अच्छे हीं हैं, जबकि उन लेखों पर बहुत कुछ लिखा जा सकता था।

और जहाँ तक मेरे किसी लेख के आज का लेख बनने का प्रश्व है तो मेरे शायद ३-४ लेख मुखपृष्ठ पर इस विभाग में आएँ हैं, लेकिन मुझे इस पर भी कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि लेख तो ज्ञान बढ़ाने का साधन है नाकि मैं लेखों को मुखपृष्ठ पर लाने के लिए बनाता हूँ।

और सबसे महत्वपूर्ण बात ये की मैंने प्रबंधक बनने का प्रस्ताव इतना शीघ्र इसलिए रख दिया क्योंकि मुझे हिन्दी विकि मैं बहुत ही त्रुटियां दिखाई दीं। साथ ही मैंने केवल एक सदस्य होकर भी बहुत बार वह काम किया है जिसकी आशा किसी प्रबंधक से की जाती है जैसे किसी नए सदस्य के प्रश्नों का उत्तर देना, किसी उत्पाति की शिकायत दर्ज कराना (आपको याद ही होगा की किसी लेख में एक सदस्य ने गंदी भाषा का प्रयोग किया था जिसके बारे में मैंने आपको सूचित किया था), किसी अन्य के लेख को पूर्ण बनाने के लिए योगदान देना। कई बार जब मैं एक नाम के कई लेख देखता हूँ तो उनका विलय कर देता हूँ ताकि एक लेख सम्पूर्ण हो जाए, और कई बार एक नाम के कई लेखों को देखकर एक को डिलीट करने का प्रयास करता हूँ तो याद आता है की यह काम और अधिकार प्रबंधकों का है, जैसे फ़्रांसीसी भाषा नाम के दो लेख बने हुए है और किसी एक को तो हटाना ही पड़ता है ना। जैसे मैंने किसी एक फ़्रांसीसी भाषा वाले लेख पर आगे लिखना आरंभ कर दिया और जब बहुत कुछ लिखा जा चुका था तो मैंने अन्य भाषों के विकियों पर उसका लिंक देने का काम आरंभ किया तो पता लगा कि किसी अन्य फ्रांसीसी भाषा के लेख की कड़ी पहले से ही वहाँ पर दे रखी है। लेकिन वह वाली कड़ी विश्व की प्रमुख भाषाएं वाले साँचे में नहीं था और फ़िर बहुत काम करना पड़ा सभी भाषाओं से उस कड़ी को हटा कर उस लेख की कड़ी लगाने पर जिसे मैंने बढ़ाया था।

मुझे लगा की अन्य प्रबंधकों को भी मेरा यह योगदान दिखाई देगा। लेकिन मुझे लगता है कि आपके अतिरिक्त किसी को भी इस विकि पर प्रबंधक का कार्य सम्भालने मे रुचि नहीं है। अभी दो प्रबंधकों ने तो अपना योगदान इसलिए रोक दिया है क्योंकि उन्हें कुछ सदस्यों की बात बुरी लग गई है। और मैं आपकी प्रशंसा ही करता हूँ कि आपने मेरे प्रबंधक निवेदन के लिए सक्रियता दिखाई और मेरा मार्गदर्शन करने का काम किया, क्योंकि यही बात दर्शाती है कि कौन कितना सक्रिय है।

मैंने यह बात कभी नहीं कही कि मेरे लेख पूर्ण हैं या वे ही सर्वश्रेष्ठ हैं। आखिर कमियां तो हर लेख में ही होती हैं, लेकिन जब भी मेरे किसी लेख को आज का लेख बनाने के लिए चुना गया और उसपर सम्पादन करके पूर्ण करने के लिए कहा गया ताकि वह मुखपृष्ठ पर लगाने योग्य हो सके तो मैंने कभी भी सुधार करने से मना नहीं किया।

मुझे मेरे लेखों के निर्वाचित होने से अधिक चिंता हिन्दी विकि के स्तर को सुधारने की है ताकी यह विकि भी विश्व की प्रमुख विकियों के समकक्ष लेखों की संख्या में ना सही, गुणवत्ता में तो ठहरे। अंग्रेज़ी और अन्य प्रमुख विकिपीडियाओं पर लोग केवल योगदानों के लिए ही नहीं बल्कि अन्य कई कामों जैसे उत्पातियों को रोकना, लेखों को पूर्ण बनाना, बेकार के लेखों के बारे में प्रबंधकों को बताना आदि काम करके भी प्रबंधक बने हैं। अंग्रेज़ी विकि पर तो लगभग १०० से अधिक प्रबंधक रोलबैक करने के लिए ही है और उनका लेखों में कोई बहुत योगदान नहीं है। उस विकि पर लेखों की संख्या के साथ-२ प्रबंधकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है और तभी उस विकि का स्तर इतना आगे है। बाकि आपको यदि मेरी बात बुरी लगी तो क्षमाप्रार्थी हूँ और मेरा मार्गदर्शन करने के लिए एक बार फिर धन्यवाद। रोहित रावत ०६:१५, १९ जून २००९ (UTC)

बाकी जैसा आपका निर्देश है मैं समय मिलते ही कर दूँगा। रोहित रावत ०६:१७, १९ जून २००९ (UTC)

चित्र अपलोड किए गए[संपादित करें]

भटनागरजी मैंने दोनो चित्र अपलोड कर दिए हैं। कृपया देख लीजिए और बताइए। रोहित रावत ०५:१४, २१ जून २००९ (UTC)

प्रबन्धक पद के लिये निवेदन की प्रक्रिया[संपादित करें]

आशीष जी, कृपया ध्यान दीजिए, ये निम्न वाक्य विकिपीडिया:प्रबन्धक पद के लिये निवेदन पृष्ठ पर लिखें हैं जिसे शायद आपने पढ़े नहीं होंगे या आपका ध्यान शायद नहीं गया होगा। मैं इसे नीचे दे रही हूँ। इसके अनुसार नया नामांकन हमेशा ऊपर ही रहना चाहिए।


ध्यान दें: प्रबन्धक पद के लिये जिस सदस्य को नामित किया जा रहा है, उसे यह प्रस्ताव स्वीकार होना जरूरी है। अतः यदि आप किसी को प्रबन्धक के लिये नामित करते हैं तो सम्बन्धित सदस्य के वार्ता पृष्ट पर उनके लिये भी संदेश लिख दीजिये और उनसे आग्रह कीजिये कि यदि वे इस प्रस्ताव से सहमत हैं तो इस पृष्ठ पर अपनी सहमति प्रकट करें। इसके साथ ही ध्यान रखें कि नये नामांकन का प्रस्ताव सबसे उपर ही लिखें। --Munita Prasadवार्ता ०७:३५, २१ जून २००९ (UTC)

पुरालेख[संपादित करें]

भटनागरजी मैंने अपने वार्ता पृष्ठ पर लंबे होते मेरे वार्ता पृष्ठ को छोटा करने के लिए पुरालेख साँचा लगा दिया है लेकिन मेरे वार्ता पृष्ठ पर यह वैसा नहीं दिख रहा है जैसा यह आपके वार्ता पृष्ठ या चौपाल पर दिखतअ है, अर्थात संख्याएँ नहीं दिख रहीं है। क्या कुछ और भी साँचे लगाने पड़ेगें मुझे? कृपया मेरी सहायता कीजिए। धन्यवाद। रोहित रावत २०:५८, २५ जून २००९ (UTC)

पुरालेख सहायता के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद भटनागरजी। रोहित रावत ०४:४७, २६ जून २००९ (UTC)

सरल हिन्दी विकी[संपादित करें]

मुझे 'सिम्पल इंग्लिश' की तरह 'सरल हिन्दी' विकि शुरू करने का सुझाव कई कारणों से उपयुक्त नहीं लग रहा है-

  • अंग्रेजी में 'सिम्पल इंग्लिश' का आन्दोलन १९२१ से ही चल रहा है। हिन्दी में ऐसा नहीं है। इसके बावजूद भी मेरी दृष्टि में सिम्पल इंग्लिश विकिपिडिया अनावश्यक कार्य है। क्योंकि इसमें लोग जो लिखते हैं वह वास्तव में 'सिम्पल इंग्लिश' में होता ही नहीं।
  • 'सिम्पल इंग्लिश' और 'इंग्लिश' में लेखों में शब्दों की संख्या का अन्तर महत्वपूर्ण नहीं है। 'सिम्पल इंग्लिश' उस अंग्रेजी को कहते हैं जिसका वाक्य विन्यास सरल हो और जिसकी 'शब्दावली' में से कठिन शन्दोंको निकाल दिया गया हो। 'सिम्पल इंग्लिश' की शब्दावली में एक हजार से कम शब्द हैं।
  • हिन्दी अपनी मूल प्रवृति से ही सरल भाषा है। हिन्दी तब कठिन होती है जब अंग्रेजी का अनुवाद करते समय अंग्रेजी वाक्य का ही ढ़ांचा हिन्दी में भी यथावत रखा जाता है। (जैसे- "मैं नहीं जाऊंगा", उसने कहा। इसके बजाय यह वाक्य हिन्दी की प्रकृति के अनुकूल है - उसने कहा, "मैं नहीं जाऊंगा"। )
  • हिन्दी (या कोई भी भाषा) एक और कारण से कठिन होती है - वाक्य को बहुत लम्बा बनाने से। जो बात तीन-चार सरल वाक्यों में कही जानी चाहिये उसे एक ही वाक्य में कहने की कोशिश से भाषा जल्दी समझ में नहीं आती।
  • हिन्दी विकि में अब भी लेखों की बहुत कमी है। 'सरल हिन्दी' की एक विकि बनाने से हम सबका प्रयास दो भागों में बंट जायेगा।

अनुनाद सिंह ०८:४८, २६ जून २००९ (UTC)

डोडो[संपादित करें]

आशीष जी सुप्रभात. डोडो को आज के आलेख के लिए चुनने का धन्यवाद। आजकल मै periodic table ({{ज्ञानसन्दूक तत्व}}और elements के लेख बनाने में व्यस्त था इसीलिए किसी भी वार्ता में सम्मलित नहीं हुआ.। वैसे मैंने आज के आलेख कुछ और लेख भी सुझाये थे जिस में से नालंदा विश्वविद्यालय , अभिज्ञान शाकुन्तलम् और मैक्सिम गोर्की को थोड़े सुधरो के बाद आज के आलेख लाया बनाया जा सकता है। --गुंजन वर्मासंदेश ०४:१६, २९ जून २००९ (UTC)

रामेश्वरम तीर्थ लेख के वार्ता पृष्ठ पर मैंने कुछ सुझाव दिए कृपया उन्हें भी देख ले। --गुंजन वर्मासंदेश ०४:१६, २९ जून २००९ (UTC)
एक बार लेख किरण बेदी भी देख लीजिये धन्यवाद --गुंजन वर्मासंदेश ०४:००, ३० जून २००९ (UTC)

आज का आलेख[संपादित करें]

नमस्कार! मैं काम कर रही हूँ। जो भी आवश्यकता होगी आपको सूचित करूँगी। कृपया अपनी मर्जी से लेखों का चयन अब बंद कर दें। --Munita Prasadवार्ता ०५:१०, २ जुलाई २००९ (UTC)

नमस्कार! बात पाठ के कम या ज्यादा होने की नहीं है बात यह है कि लेआउट के साथ क्या मैच होता है। जिसको अधिक पढ़ना है वह लिंक क्लिक कर के भीतर पढ़ सकता है मुखपृष्ठ का लेआउट आपके साँचों ने खूब बिगाड़ा था अब वैसा नहीं करना है। प्रमुख चित्र का साँचा अभी भी असंतुलित है। --Munita Prasadवार्ता १५:१३, ३ जुलाई २००९ (UTC)
मेरे हिसाब से मेरे उत्तर में कोई आपत्तिजनक बात नहीं थी। आपको बुरा लगा तो क्षमा चाहती हूँ। ठीक है अगर आपके हिसाब से आपका साँचा सही था। मुझे अपना वाला यह ठीक मालूम होता है। पहले भी इतना पाठ ही साँचे में जाता था। इसमें आपत्ति की कोई बात नहीं है।--Munita Prasadवार्ता १५:२९, ३ जुलाई २००९ (UTC)
कृपया पत्तदकल से लाल श्रेणियों को हटा दीजिए।--Munita Prasadवार्ता ०८:५८, ८ जुलाई २००९ (UTC)
पत्तदकल २१५ शब्दों का है। यदि आपके पास कुछ सामग्री हो तो कृपया इसे थोड़ा सा बढ़ा दीजिए जिससे कि यह लेख आज के आलेख के उपयुक्त बन सके। धन्यवाद।--Munita Prasadवार्ता १४:४१, ९ जुलाई २००९ (UTC)
धन्यवाद जी। --Munita Prasadवार्ता ०४:४३, ११ जुलाई २००९ (UTC)

अफ़्रीका[संपादित करें]

हां, ठीक है वो अनुवाद आप कर दीजिए। वो काम आप हम सबसे बेहतर कर भी सकते हैं। आप कर दीजिए मैं जलवायु, वनस्पति आदि पर ही अभी काम कर रही हूँ। चित्रों को आप लगा रहे हैं उसमें से एक मैं पहले ही लेख में प्रयोग की हूँ आप उसको हटा कर कोई अन्य चित्र लगा दीजिएगा।--Munita Prasadवार्ता ०५:४८, १५ जुलाई २००९ (UTC)

आशीष जी वो अफ़्रीका का बायोम वाला चित्र भूप्रकृति के साथ मेल नहीं खाता है। ऐसा करते हैं कि मै जलवायु के बाद अफ्रीका की वनस्पति, एक अनुभाग बनाऊँगी उसमें उसको लगा देंगे।
--Munita Prasadवार्ता १५:५८, १५ जुलाई २००९ (UTC)
आशीष जी जलवायु एवं जलवायु के प्रदेश वाले अनुभाग के लिए कोई चित्र नहीं मिल रहा है। कोई नजर में हो तो लगा दीजिए ना।
--Munita Prasadवार्ता १६:०१, १५ जुलाई २००९ (UTC)
साँचा इतना बढ़िया बना है एवं इतनी मेहनत की है आपने उसपर कि तारीफ के लिए शब्द नहीं हैं। साँचा की सबसे बड़ी खाशियत तो मुझे ये लगी कि इतना बड़ा होने के बावजूद भी एक दिन में पूरा नीला नीला हो गया। इतिहास वाला चित्र परफेक्ट है हां मेरे पास मैटर नहीं है इतिहास के लिए पर शायद धीरे-धीरे अनूदित हो जाएगा, गुंजन जी भी अफ़्रीका पर काम कर रहे हैं।। हां, जलवायु के लिए कोई उपयुक्त चित्र मिले तो लगा दीजिएगा। बायोम वाले चित्र को बाद में वनस्पति में लगा देंगे फिलहाल रहने देते हैं। --Munita Prasadवार्ता १६:३२, १५ जुलाई २००९ (UTC)
अफ़्रीका का भौतिक मानचित्र वाला चित्र लाग कर अच्छा ही किया आपने।--Munita Prasadवार्ता १६:३५, १५ जुलाई २००९ (UTC)
पर वो ड्रेकेन्सबर्ग पर्वत वाला चित्र थोड़ा नीचे लाना होगा इथियोपिया के पठार वाले चित्र के जस्ट ऊपर या जस्ट नीचे। वो पूर्व एवं दक्षिण के उच्च पठार अनुभाग का चित्र है।--Munita Prasadवार्ता १६:३८, १५ जुलाई २००९ (UTC)
अफ़्रीका में सब ठीक-ठाक लग रहा है बस जनवायु वाले अनुभाग के लिए चित्र मिल नहीं रहा है। जो सांचा आपने लगाया है उसके दाहिने तरफ के खाली स्थान में चार चित्र हैं अच्छा है पर नीचे का बाकी स्थान खाली लग रहा है वहाँ कुछ सम्बन्धित चित्र लगा देंगे जिससे पूरा भरा हुआ लगे। क्या कहते हैं। कामन पर एक एटलस है अफ़्रीका का वहां से कुछ मदद मिल सके शायद और ऊपर सबसे जो चित्र है उसमें चार चित्र हैं एक साथ। उसमें कुछ और चित्र डाल कर लेख में कहीं और डाल देंगें। अच्छा लगेगा।--Munita Prasadवार्ता ०४:५९, १६ जुलाई २००९ (UTC)
आप अफ़्रीका के इतिहास का अनुवाद जरूर कीजिए मैं नहीं कर रही हूँ। वैसे भी मुझे यह बहुत कठिन काम लगा। मैं उसके भूगोल एवं जीव विज्ञान से सम्बन्धित हिस्से पर ही काम कर रही हूँ एवं करने की इच्छा रखती हूँ। हां मुझे कुछ मैटर मिला या कहीं कुछ सुधार कर सकती हूँ ऐसा लगा तो अवश्य करूंगी।--Munita Prasadवार्ता १७:२९, १६ जुलाई २००९ (UTC)
आशीष जी एक काम करते हैं आप अनुवाद का काम अफ़्रीका का इतिहास में कीजिए। वही मुख्य लेख है। बाद में संक्षेप करके उसको अफ़्रीका में लगा देगें। उतना विस्तृत इतिहास अफ़्रीका लेख में नहीं लिख कर उसको अफ़्रीका का इतिहास लेख में लिखते हैं। गुंजन जी और मैं दोनो ही इस पर काम कर रहे हैं।--Munita Prasadवार्ता ०५:०६, १७ जुलाई २००९ (UTC)
अफ़्रीका के इतिहास की तरह क्या भू-प्रकृति को भी संक्षेप में लिख दिया जाए क्या? आपका क्या विचार है निर्वाचित होने की दिशा में ये कैसा कदम होगा?--Munita Prasadवार्ता १५:४५, १७ जुलाई २००९ (UTC)
अफ़्रीका को देखने का समय अभी मेरे पास नहीं है आप ने जो संदेश दिया उसका मतलब भी पूरा समझ में नहीं आया मुझे। खैर आप जो करना चाहते हैं करें, सुधार हम विचार कर करसकते हैं। अफ़्रीका में मैटर काफी है बस चतुराई से उसे सजा लेगें तो निर्वाचित हो जाएगा, इतिहास में कुछ मैटर कम है। वो आप और गुंजन जी देख लीजिए। मुझे समय मिलेगा तो देखूंगी ही। हां एक बात वो आज का आलेख में आर्मेनिया को जो सुझाव दिया था आपने वो मैंने चयनित करके लगा दिया है। पर चयनित होने के बद जो अनुच्छेद आपने अचानक जोड़ा है उसमें वर्तनी एवं वाक्य रचना की अशुद्धियाँ हैं यदि समय मिले तो दूर कर दें।--Munita Prasadवार्ता ०५:०७, १८ जुलाई २००९ (UTC)
आशीष जी पहले से एक श्रेणी है अफ़्रीका एवं आपने एक नई बना दी है अफ्रीका। आपकी नयी बनाई श्रेणी में दस लेख एवं पाँच उपश्रेणियाँ भी बन गई हैं। पूरानी श्रेणी में 119 लेख एवं 10 उपश्रेणियाँ हैं। मैं नई श्रेणी के सभी लेखों एवं उपश्रेणियों को पूरानी श्रेणी में डाल रही हूँ। कृपया इसका ध्यान रखिएगा कि ऐसा दुबारा नहीं हो क्योंकि इस काम को करने में बेकार की ऊर्जा एवं समय नष्ट हो रहा है। धन्यवाद।--Munita Prasadवार्ता १६:०५, १८ जुलाई २००९ (UTC)
ये क्या जी आपने प्रवेशद्वार भी उसी में बना दिया है। अब उसमें श्रेणी कहां डाला है आपने वो मुझसे ढूड़े भी नहीं मिलेगा इस काम को आप ही कीजिए एवं कृपया REDIRECT नहीं कीजिएगा। उससे कोई लाभ नहीं होगा उल्टा पुल्टा रिजल्ट आता है।--Munita Prasadवार्ता १६:०८, १८ जुलाई २००९ (UTC)
भू-प्रकृति की अंग्रेजी physical feature होना चाहिए। किताबों में तो यही लिखा है।--Munita Prasadवार्ता ०२:१८, १९ जुलाई २००९ (UTC)

अफ़्रीका लेख में जो इतिहास अनुभाग है उसके दो अनुच्छेद करते हैं। पहले में प्राचीन अफ़्रीका का इतिहास हो तथा दूसरे में आधुनिक का। इस प्रकार इतिहास बड़ा भी नहीं होगा और सब कभर भी हो जाएगा। हां दोनो ही अनुच्छेद बड़े-बड़े रखते हैं क्योंकि लेख की लम्बाई भी तो रखनी है। क्या कहते हैं?--Munita Prasadवार्ता ०९:२७, १९ जुलाई २००९ (UTC) मैं कुछ और बदलाव की हूँ उसपर भी कमेन्ट दीजिएगा।--Munita Prasadवार्ता ०९:२९, १९ जुलाई २००९ (UTC)

आज का आलेख[संपादित करें]

हां जी अर्मेनिया को कल के लिए चयनित कर लिया गया है।--Munita Prasadवार्ता १५:३५, १७ जुलाई २००९ (UTC)

मैं भीमबेटका पाषाण आश्रय पर काम कर रही हूँ। आधे घंटे में शायद हो जाए।--Munita Prasadवार्ता १७:२०, १८ जुलाई २००९ (UTC)
ठीक है जी। OK.--Munita Prasadवार्ता १७:३३, १८ जुलाई २००९ (UTC)
भीमबेटका पाषाण आश्रय नाम आपको कहीं मिला कि आपने अंग्रेजी नाम का अनुवाद स्वयं किया है। अन्यथा न लीजिएगा मुझे नहीं मिला इसीलिए पूछ रही हूँ।--Munita Prasadवार्ता १७:४२, १८ जुलाई २००९ (UTC)
बांद्रा-वर्ली समुद्रसेतु का चित्र देखिए। अभी लगाई हूँ। कैसा है?--Munita Prasadवार्ता ०३:०२, १९ जुलाई २००९ (UTC)

वो बांद्रावर्ली समुद्र सेतु के संवाद की बात कर रहे हैं न? तो कुछ नहीं करना है क्या करना है। कहिए। वो एक आइपी का संदेश है वही ना।--Munita Prasadवार्ता १३:००, १९ जुलाई २००९ (UTC)

आप आज सारी रात ऑनलाइन हैं क्या?

--Munita Prasadवार्ता १५:२६, १९ जुलाई २००९ (UTC) नहीं जी ऐसी कोई बात नहीं बस कल के आलेख के लिए दक्षिणी अमेरिका तैयार कर रही हूँ। आप थोड़ा देख लीजिएगा।--Munita Prasadवार्ता १५:४५, १९ जुलाई २००९ (UTC)

आप सही कहते हैं भारत पर ही अधिकांश काम होना चाहिए यही हमारी पहचान बननी चाहिए। दक्षिणी अमेरिका एक महाद्वीप है एवं इसपर मात्र दो पंक्तियाँ लिखी हुई थी जिसके कारण ही इसको मैंने शूरू किया। इतने बड़े महाद्वीप जिसमें सैकड़े देश हैं मात्र दो पंक्तियाँ मुझे अजीब लगा तो लिखने बैठ गई। इसको आज रात तैयार कर लेते हैं। फिर बाकी आपकी बात का समर्थन है।--Munita Prasadवार्ता १५:५७, १९ जुलाई २००९ (UTC)

मैं खाना खाने जा रही हूँ यदि आपको समय मिले तो इसको ठीकठाक करके कलके लिए लगा दीजिए। चित्र दीर्घा में पहले तीन चित्र प्राकृति सोन्दर्य के लिए तथा बाकी के तीन वहां के मानवीय विकाश को दर्शाने के लिए सोची हूँ। देख लीजिएगा।--Munita Prasadवार्ता १६:२८, १९ जुलाई २००९ (UTC)

मेरे ऊपर वाले संदेश पर शायद आपने ध्यान नहीं दिया या शायद व्यस्त हैं। दक्षिणी अमरीका को देख लीजिए। कुछ कमी बेशी हो तो। मैं चली सोने अब आपकी मर्जी जिसको डालना है डालिए या फिर सुबह देखेंगे। शुभरात्रि।

--Munita Prasadवार्ता १७:५८, १९ जुलाई २००९ (UTC) वाह बहुत खूब बढ़िया है जी।--Munita Prasadवार्ता १८:०४, १९ जुलाई २००९ (UTC)

पूरालेख[संपादित करें]

आशीष जी सुप्रभात। अब जरा पूरालेख को कष्ट दीजिए, यह पन्ना 124 किलोबाइट्स का हो गया है। डायल अप कनेक्शन हो तो लोड होने में काफी समय लगेगा।--Munita Prasadवार्ता ०३:३६, २० जुलाई २००९ (UTC)

दो सुझाव[संपादित करें]

हिन्दी विकी के मुख्यपृष्ठ पर मैंने दो सुझाव दिए थे।

1. मुख्यपृष्छ पर प्रमुख चित्र में इंफोसिस की एक बिल्डींग दिखाई गई है। इसके कैप्शन में लिखा गया है कि इंफोसीस भारत की सबसे बड़ी IT Company है, जो कि ग़लत है। इंफोसीस दूसरी सबसे बड़ी IT Company है, सबसे बड़ी IT Company of India is TCS :-)

2. विकिमीडिया में हर सप्ताह एक article आता है, जिसे विश्व की अधिकतम् भाषाओं में अनुवाद करने का आग्रह किया जाता है। ऐसा इसलिए ताकि दूसरी भाषाओं की भी पृष्ठ संख्या ज़्यादा हो। यहाँ देखें - m:Translation requests । इस पर ध्यान दिया जा सकता है।