सदस्य:Soail Rajesh

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प्रधानाचार्य राजेश सोयल


हजा्रो वर्ष पुरानी हिन्दु परम्परा के अनुसार एक शिक्षक का स्थान हमारे समाज मे सर्वोपरि माना गया है, इसी धारणा के अन्तर्गत एक शिक्षक ही समाज निर्माण मे अपनी एक अहंम भूमिका निभाता है जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण आज के इस आधुनिक [[वैज्ञानिक युग]] में भी अति उन्नत पाश्चात्य देशो में भारतीय शिक्षकों की अत्यधिक बढ़ती माँग है। हिन्दु धर्म के अनुसार हजारों सालों के तप के बाद ही कोई [[जीव आत्मा]] शिक्षक बनती है। वैदिक काल में तो गुरु का स्थान हमारे माता-पिताभगवान से भी ऊपर माना गया है, आज के इस नये दौर मे भी किसी हद तक ये परम्परा अभी भी हमारे समाज का एक अभिन्न अंग है। कई वर्षो के अनुभव के पश्चात ही कोई शिक्षक प्रधानाचार्य बननें लायक होता है, और मेरा ये सफ़र सन् 1987 में शुरु हुआ जब सर्वप्रथम मैं गवर्नमैन्ट स्कूल में बतौर सी0 टीचर कार्यरत हुआ, त्दोपरान्त सन् 1990 मे मैनें ड्गशाई (हि0प्र0)में आर्मी पब्लिक स्कूल (जो की पूर्णतया आवासीय स्कूल है) बतौर सी0 टीचर व हाऊस मास्टर ज्वाईन किया, एक सफ़ल अध्यापन कार्य क्या होता है इसे सही माइनें मे मैंने इसी स्कूल से सीखा, सुबह-2 छ: बजे उठ कर हाऊस मास्टर की हैसियत से बच्चों के साथ पी0टी0 के मैदान में जाना,समय-2 पर आवासीय बच्चों का ध्यान रखना सचमुच मुझे वैदिक काल के आश्रम की याद दिलाता रहता था स्कूल की विभिन्न गतिविधियों में छात्र व छात्राओं का सलंग्न रहना उनके ऊज्ज्वल भविष्य के लिये अति आवश्यक होता है दोपहर के खानें के बाद प्रत्येक छात्र को किसी न किसी खेल में हिस्सा लेना आवश्यक होता है और फ़िर शाम को स्कूल परिसर मे फ़िर से सन्धया शिक्षण शुरु होता था, करीब 2 घण्टें पढ़ने के पश्चात शाम का खाना सभी लोग इकट्ठे डाईनिंग् हाल मे खाते थे। इसके पश्चात किसी कारण वश मुझे चण्ड़ीग़ड आना पडा जहाँ मैने चण्ड़ीग़ड का सबसे उन्नत दर्जे का सैं0सटीफ़न काँनवेंन्ट स्कूल 1995 में ज्वाईंन किया जो मेरे अध्यापन कार्य में एक मील का पत्थर साबित् हुआ, मेरी हाऊस-मास्टर शिप यहाँ भी जारी रही,यहाँ मिस्टर हेरौल्ड क़ार्वर (जो की ब्रतानियां मूल के प्रिंसिपल के साथ-2 स्कूल के मालिक भी थे) की देखरेख में जो कुछ भी मुझे सिखने को मिला मैं उसका ब्यान शब्दो मे नहीं कर सकता,उन्होने ही मुझे एन0सी0सी0 औफ़िसर बनने के लिऐ 3 महीने की आर्मी ट्रेनिंग के लिऐ ओ0टि0ऐ0 क़ामटी, नागपुर (महाराष्ट्रा) भेजा जहाँ मैंने यह ट्रेनिंग राष्ट्रिय स्तर पर छ्ठे स्थान पर उतीर्ण की। मैंने बतौर एन0सी0सी0 कैडेट सन् 1983 में व बतौर एन0सी0सी0 औफ़िसर दो बार सन् 2004-5 व 2006-7 में क्रमशभारतीय गणतन्त्र दिवस के पावन शुभ अवसर पर पञ्जाब,हरियाणा,हिमाचल व चण्ड़ीग़ड डारैक्टोरेट का प्रतिनिधित्व करते हुए सन् 2006-7 मे इस डारैक्टोरेट को सांस्कृतिक प्रतिस्पद्धा मे पूरे देश में दूसरे स्थान पर पहुँचाने में अपना कृमठ योगदान दिया्। सर्वप्रथम, मुझे प्रिंसीपल बननें का न्यौता एक वतानुकुल अति उन्न्त् स्कूल पाथ फ़ाईण्डर हाई स्कूल,मौहाली चण्ड़ीग़ड ने सन् २००७ में दिया यहाँ दो साल बतौर प्रिंसीपल रहनें के पश्चात सन् २००९ को मैंने जीनियस ईन्टरनैश्न्ल पब्लिक स्कूल ,नेरचौक,मण्डी (हि०प्र०)में बतौर प्रधानाचार्य पद स्वीकृत किया। http://www.facebook.com/media/set/?set=a.1956364357199.117086.1485433900&l=dcd62355bc[http://www.principalrajeshsoail.com अभी हाल ही में मु़झे भारत का "सर्वश्रेष्ट शिक्षाविद २०११ "के सम्मान द्वारा "ईन्टरनेशनल इन्सटीच्युट आफ़ एजुकेशन व मैनेज्मेन्ट" दिल्ली द्धारा अनुग्रहित किया गया तदोपरान्त इसी र्श्रींखला के तहत अति शोभनिय व श्रेष्ठतम् "भारत ज्योति" और अति विभुषणीय गौरवशाली "भारत विधा शिरोमणि" पारितोषिक से भी आलंकृत् किया गया यह मेरे जीवन की अब तक की सबसे बडी उपलब्धियां हैं इसी सन्दर्भ से क्र्मवार कडी में हाल ही मुझे लाईफ टाईम एचिवमैन्ट अवार्ड इन द फ़िल्ड आफ एडुकेशन् से न्वाजा गया है।

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