सदस्य:Shilpa Ram17

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तमिल सिनेमा
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ए वी अम प्रोडक्शंस, भारत की प्रथम स्टूडियो जो आज भी मौजूद है।


तामिल सिनेमा भारतिय फिल्म उद्दोग से जुडा है जो तमिल नाडु की भाषा, कला, राजनीति एवं सामाजिक परिस्थितियों को चलचित्र के माध्यम से दर्शाता है। यह उद्दोग कोडमबक्कम में स्थापित होने का कारण इसका उपनाम कॉलीवुड रखा गया है जो हॉलीवुड और कोडमबक्कम नामों का मेल है। कॉलीवुड दक्षिण भारत का प्रमुख उद्दोग है जिसका मूल प्रतियोगी तेलुगु सिनेमा है। विशव में बॉलीवुड के बाद कॉलीवुड का ही बॉक्स ऑफिस में राज्य होता है।


मुखय तथ्यों[संपादित करें]

कॉलीवुड फिल्में वितरण के कारण दूर-दूर के देशों में मान्यता प्राप्त की है। इन देशों में प्रमुख है सिंगापुर, श्रीलंका, मलेशिया और जापान। श्रीलंका सिनेमा का अधिक्तर प्रेरणा स्त्रोत तामिल सिनेमा से ही है। कॉलीवुड की पहली फिल्म कीचक वाधम मूक सिनेमा थी जिसका निदेशक नटराज मुदलियार, तामिल सिनेमा का संस्थापक था। इस फिल्म सन १९१८ में बनाई गई थी। इस फिल्म की कहानी महाभारत की एक अध्याय से ली गई है। अलाम आरा भारत की पहली चलचित्र थी जिसमें भाषा का प्रयोग प्रस्तुत थी। इसके खरीब एक साल बाद कालीदास नामक तामिल चलचित्र बनाई गई थी जिसमे भाषा का प्रयोग पहली बार की गई थी। सन १०९३० मे मदरास विधान मंडल मनोरंजन कर उतीर्ण की थी। तमील नाडु में १५४६ सिनेमागर है। कॉलीवुड सिनेमा के प्रमुख उत्पादकों है ए वी अम प्रोडक्शंस, आसकर फिल्म, एपी इंटरनेशनल और पिरामिड साइमिरा। तमिल सिनेमा का चित्रण पहले विक्टोरिया सार्वजनिक हॉल में हुआ था।

इतिहास[संपादित करें]

सन १८९७ में हरिहरण चेय्यर ने कुछ चयनित मूक फिल्में को पहले विक्टोरिया सार्वजनिक हॉल में प्रदर्शन किया था। इन फिल्में प्रतिदिन के माम्ले का रिकॉर्ड था। फिल्म विद्वान स्टीफन ह्यूजेस का यह मानना है कि कुछ ही वर्षों के भीतर में टिकट का शुरुआत श्रीमती क्लुग नामक स्त्री से हुई थी। इससे फिल्मों एक व्यावसायिक मनोरंजन के रूप में स्थापित होने लगा। वारविक मेजर एक अंगरेज़ी व्यवसायी था जिसकी कल्प्ना के कारण भारत का सबसे पहले सिनेमाघर का निर्माण हुआ था। इस सिनेमाघर का नाम एलेट्रिक थीयेटर है जो आज भी खडा रहता है। उन दिनों में एलेट्रिक थीयेटर अंगरेज़ी समुदाय का एक लोकप्रिय जगह था पर कुछ ही वर्षों में वह बंद हो गया था। दक्षिण भारत का पहला सिनेमाघर जिसका निर्माण एक भारतीय नागरिक ने किया था वह कोयंबतूर में हुआ था। स्वामी विनंसेंट कन्नु इसके पीछे था और उनके नेतृत्व से ही 'टेंट सिनेमा' की संकल्पना वास्तविकता का आकर लेने लगा। गाँवों में टेंट लगाकर लोग फिल्में देखते थे।

प्रभाव एवं प्रेरणा[संपादित करें]

तमिल सिनेमा पहले भारत की कला और स्वतंत्रता के वातावरण से प्रभावित थी। कर्नाटिक संगीत के साथ-साथ भरतनाट्यम की मदद लेकर तमिल फिल्में अपनी कहानी को बताती थी। तमिल सिनेमा पहले महाभारत और रामायण जैसे महाकाव्यों को चलचित्र के रूप में दिखाती थी। चाहे पौराणिक या परियो की कथा उसकी रस और बढ़ाने के लिए संगीत और नृत्य की सहायता निर्देशकों लेते थे। यह अभ्यास चोला वंश के राजकुमारों के समय से ही प्रचलित था। कॉलीवुड की पहली फिल्म खीचका वाधम में ध्वनि की प्रौद्योगिकी न होने का कारण, पात्रों के संवादों टाइटल कार्ड के रूप में दिखाए गए थे। पूर्व स्वतंत्रता के सभी अभिनेताए थिएटर से ही थे।

तमिल सिनेमा से जुडे संगति[संपादित करें]

आजकल नडिगर संगम नामक संगति में कॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेताओं का योगदान है जो तमिल नाडु राज्य के प्रमुख विवादो में चर्चा करते हुए नजर आते है। इसके अलावा परोपकारी कार्य में भी इनका योगदान प्रमुख है। इस संगति का स्थापना पहले अम जी रामचंद्रन ने किया था। वर्तमान समय में इस संगति का अध्यक्ष अभिनेता नास्सर है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

1। http://www.cineulagam.com/in
2। https://en.wikipedia.org/wiki/Tamil_cinema
3। https://en.wikipedia.org/wiki/Cinema_of_South_India
4। http://www.avm.in/movies.html