सदस्य:Sharmila kumari jain

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चित्रांगदा[संपादित करें]

चित्रांगदा महाभारत से लि हुई एक कहानी हे जीसे रवीन्द्रनाथ ठाकुर जी ने नाट्या रुप दिया है। सन १८९२ मे रचाइ हुइ एक पोरनीक नाटक है। इस नाटक मै कुछ किर्दार को बदला गया है ताकि उसमै नाय रुप लय जा सके। यह नाटक के रुप मे वास्तव मे एक कव्य हैं। यह मनिपुर की राजदुहिता चित्रांगदा और अर्जुन की प्रेम-लीला के साथ आधुनिक काल की औरत की कीर्ति को दर्शता है। इस नाटक का चीत्रा के नाम से अंग्रेजी मे अनुवद किया गय हे। इस नातक के मुख्य कलाकार चित्रंगदा, अर्जुन, वसंत देव और मदन देव है।यह नातक ग्यराह द्र्श्य मै विभजीत है।

महाभारत के अनुसार चित्रांगदा अर्जुन की पत्नीयो मै से एक है। अर्जुन के वनवास के दोरान जब वह मनिपुर जाता है तब उसकी मुलाकात चित्रांगदा से होति है। वह उससे शादी कराना चाहता है ।मनिपुर के राजा ने अपनी प्रजा की यचिका पर यह प्रतिगया लि कि मातृवंशीया परंपरा के अनुसार चित्रांगदा के पुत्र या पुत्रि मनिपुर के उत्तराधिकारी बनैंगे और असे राज्य से नहीं ले जाया जायेगा । अर्जुन ने इस प्रातिगया का सम्मान करते हुऐ चित्रांगदा से शादी कि। जल्द हि बाब्रुवाहाना नामक पुत्र क जानम हुआ जिसने मनिपुर कि राजगदि संभाली।

नाटक[संपादित करें]

चित्रांगदा मनिपुर के रज की एक मात्र कन्या थी। एक मात्र पुत्रि होने के कारन और राज्य के लिये वह एक पुरुष क वेश धारन करती है। राज्य और प्रजा कि उन पर अपनी रक्शा की आशा होति है। अर्जुन बारह वर्ष के ब्रह्मचर्या को पालने के लिये वनवास के लिये जाता है। बहुत लम्बा सफर देखने के बाद वह मनिपुर पहुँचता है जो अपने प्रक्रतिक सौन्दर्य के लिये प्रसिध है। एक दिन अपने शिकार पर जब उसने अर्जुन को देखा तब उसे अर्जुन से प्यार हो गया। अर्जुन भी उसके लडने के जस्बे और हिमत से बहुत प्रभावित हुआ पर इस ब्रम मै था कि वह एक लडका है। चित्रा।गदा को लगा कि इस रुप मै वह कभी भी उस से प्यार नहीं करेगा। यह सोछ वह कामावेदा(प्रेम के देव) से वरदान मांगती है कि उसे कुछ वक्त के लिये दुनिया की सबसे सुन्दर लडकि बनादे ताकि अर्जुन उसे देकते हि उस से प्यार करले। वह इसि रुप मै उसके सामने आति और अर्जुन को अपनि ओर आकर्शित करति। उसके पास सब कुछ् है पर वह चाहती है कि अर्जुन उसके वास्तविक रुप मै उस से प्यार करे। कुछ समय बाद राज्य मै लुट्टेरे हमला करने आते है, तब अर्जुन को पता चलता है कि इस राज्य की रक्शक एक स्त्रि है जो बहुत विधवान योधा है और सोचता है एसि परिस्थिती मै वो काहा है। चित्रांगदा कि प्रशंसा से वह प्रभावित होता है और उस से मिलना चहता है क्युंकि उसने किसी स्त्रि को अपने समान युध-निति मै श्रेष्ठ होते हुये नही सुना। चित्रांगदा अपनि सचाई बताने से पेहले वक्त् रहते अपने राज्य को बचा देति है। जब वह अर्जुन के सामने अपने वास्तविक रुप मै आति है और अर्जुन को सारी सचाई बताति तब अर्जुन उसके सोंद्रय से ज्यादा उसके गुनो से प्यार करता हैं और उस से शादि करता है। अर्जुन को चित्रांगदा की बातो से आत्म ज्ञन होता है। कुछ वक्त बद उनहे बाब्रुवाहाना के पुत्र क लाभ होता है।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]