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दिल्ली के सामूहिक बलात्कार काण्ड के विरोध में नई दिल्ली में इण्डिया गेट पर हुए प्रदर्शन का एक दृश्य
दिल्ली के सामूहिक बलात्कार कांड के विरोध में कलकत्ता में हुए प्रदर्शन का एक दृश्य
दिल्ली के सामूहिक बलात्कार कांड के विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन हुए उन्हीं में से बंगलौर का एक दृश्य

2012 दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामला भारत में १६ दिसम्बर २०१२ में हुई एक बलात्कार तथा हत्या की घटना थी, जो संचार माध्यम के त्वरित हस्तक्षेप के कारण प्रकाश में आयी। इसकी संक्षेप में कहानी इस प्रकार है। "भारत की राजधानी दिल्ली में भौतिक चिकित्सा की प्रशिक्षण कर रही एक युवती[1] पर दक्षिण दिल्ली में अपने पुरुष मित्र के साथ बस में सफर के दौरान 16 दिसम्बर 2012 की रात में बस के निर्वाहक, मार्जक व उसके अन्य साथियों द्वारा पहले भद्दी-भद्दी फब्तियाँ कसी गयीं और जब उन दोनों ने इसका विरोध किया तो उन्हें बुरी तरह पीटा गया। जब उसका पुरुष दोस्त बेहोश हो गया तो उस युवती के साथ उन बहशियों ने बलात्कार करने की कोशिश की। उस बहादुर युवती ने उनका डटकर विरोध किया परन्तु जब वह संघर्ष करते-करते थक गयी तो उन्होंने पहले तो उससे बेहोशी की हालत में बलात्कार करने की कोशिश की परन्तु सफल न होने पर उसके यौनांग में व्हील जैक की रॉड घुसाकर उसके अन्तरंगों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। बाद में वे सभी बहशी दरिंदे उन दोनों को एक निर्जन स्थान पर बस से नीचे फेंककर भाग गये। किसी तरह उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। वहाँ बलात्कृत युवती की शल्य चिकित्सा की गयी। परन्तु हालत में कोई सुधार न होता देख उसे 26 दिसम्बर 2012 को सिंगापुर के माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल ले जाया गया जहाँ उस युवती की बलवती आत्मा ने 29 दिसम्बर 2012 को यह अपवित्र शरीर सदा-सदा के लिये त्याग दिया।"

30 दिसम्बर 2012 को उसका शव दिल्ली लाकर पुलिस की सुरक्षा में जला दिया गया।[2] भारत सरकार के इस कृत्य की निन्दा करते हुए सोशल मीडिया में ट्वीटर फेसबुक आदि पर काफी कुछ लिखा गया। इस घटना के विरोध में पूरे देश में उग्र व शान्तिपूर्ण प्रदर्शन हुए उन्हीं में से नई दिल्ली, कलकत्ता और बंगलौर में हुए प्रदर्शनों के कुछ दृश्य भी बानगी के तौर पर यहाँ दिये जा रहे हैं। उल्लेखनीय बात यह है कि नई दिल्ली में यौन अपराधों की दर अन्य मैट्रोपॉलिटन शहरों के मुकाबले सर्वाधिक (प्रति 18 घण्टे पर लगभग एक बलात्कार) है। इससे पूर्व भारत की एक मात्र महिला राष्ट्र्पति प्रतिभा पाटिल सुप्रीम कोर्ट द्वारा बलात्कार के पाँच मामलों में दी गयी फाँसी की सजा को माफ करके उम्रकैद में बदल चुकी हैं। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी निन्दा हुई है। सम्प्रति जनता के आक्रोश और समय की माँग को देखते हुए भारत की केन्द्र सरकार बलात्कारियों को जीवन भर के लिये नपुंसक बना देने पर विचार कर रही है।

दिल्ली सामूहिक बलात्कार: अहम घटनाक्रम[संपादित करें]

1- दिल्ली में 16 दिसम्बर रविवार की रात चलती बस में एक लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। यह घटना उस वक्त हुई जब लड़की फिल्म देखने के बाद अपने पुरुष मित्र के साथ बस में सवार होकर मुनीरका से द्वारका जा रही थी।
2- लड़की के बस में बैठते ही लगभग पांच से सात यात्रियों ने उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। उस बस में और यात्री नहीं थे. लड़की के मित्र ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उन लोगों ने उसके साथ भी मारपीट की और लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। बाद में इन लोगों ने लड़की और उसके मित्र को दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर के नजदीक वसंत विहार इलाके में बस से फेंक दिया।
3- पीड़ित लड़की को नाजुक हालत में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के विरोध में अगले ही दिन कई लोगों ने सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक और ट्विटर के जरिए अपना गुस्सा ज़ाहिर करना शुरु किया। दिल्ली पुलिस ने कहा कि बस के ड्राइवर को सोमवार देर रात गिरफ्तार कर लिया और उसका नाम राम सिंह बताया गया।
4- सामूहिक बलात्कार की घटना के क़रीब दो दिन बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने मीडिया को संबोधित किया और जानकारी दी कि इस मामले में चार अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि जिस बस में सामूहिक दुष्कर्म किया गया था, उस पर 'यादव' लिखा हुआ था और ये बस दक्षिण दिल्ली में आरके पुरम सेक्टर-3 से बस बरामद की गई। सुबूत मिटाने के लिए बस को धो दिया गया था।
5- ड्राइवर राम सिंह ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और उसकी निशानदेही पर उसके भाई मुकेश, एक जिम इंस्ट्रक्टर विनय गुप्ता और फल बेचने वाले पवन गुप्ता को गिरफ़्तार किया गया।
6- मंगलवार 18 दिसम्बर को इस मामले की गूंज संसद में सुनाई पड़ी जहां आक्रोशित सांसदों ने बलात्कारियों के लिए मृत्युदंड की मांग की। गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने संसद को आश्वासन दिलाया कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे।
7- इस बीच पीड़ित लड़की की हालत नाज़ुक बनी रही और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। सड़कों और सोशल मीडिया से उठी आवाज़ संसद के रास्ते सड़कों पर पहले से कहीं अधिक बुलंद आवाज के साथ सड़कों पर उतरी और दिल्ली में जगह-जगह प्रदर्शन होने लगे।
8- दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि उनमें इतनी हिम्मत नहीं कि वो अस्पताल जाकर बस में बर्बर सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई उस पीड़ित लड़की को देखने जा सकें। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सफदरजंग अस्पताल जाकर पीड़ित लड़की का हालचाल जाना। शीला दीक्षित ने ये भी कहा कि ज़रूरत पड़ने पर पीड़ित लड़की को इलाज के लिए विदेश ले जाया जाएगा।
9- दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि उसने इस मामले में सभी अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन इससे आम लोगों का आक्रोश कम नहीं हुआ और शनिवार को रायसीना हिल्स पर हज़ारों लोग एकजुट हुए जिन्हें पुलिस ने तितर-बितर करने के लिए बल-प्रयोग किया।
10- शनिवार की घटना से सबक लेते हुए दिल्ली पुलिस ने रविवार के लिए पहले से ही तैयारी कर रखी थी और निषेधाज्ञा लगाकर रोकने की कोशिश की। कड़कड़ाती सर्दी और कुछ मेट्रो स्टेशनों के बंद होने के बाद भी लोग रविवार को बड़ी संख्या में एक बार फिर इंडिया गेट पर जुटे। पुलिस ने एक बार फिर बल प्रयोग करके प्रदर्शनकारियों के हटाने का प्रयास किया लेकिन विरोध का सिलसिला जारी रहा।[3]
११ मार्च २०१३, राम सिंह नामक मुख्य आरोपी ने सुबह तिहाड़ जेल में आत्म-हत्या कर लिया। [4]हालाँकि राम सिंह के परिवार वालों तथा उसके वकील का मानना है की उसकी जेल में हत्या की गयी है ।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "IAP condoles death of Delhi gang-rape victim". Zeenews.com. अभिगमन तिथि 29 December 2012. |firstlast= missing |lastlast= in first (मदद)
  2. Reuters (30 December 2012). "Body of gang rape victim cremated in नई दिल्ली". Reuters.in. अभिगमन तिथि 30 December 2012.
  3. "दिल्ली सामूहिक बलात्कार: दस अहम घटनाक्रम". BBC. अभिगमन तिथि January 06,2013. |accessdate= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  4. "Delhi gang-rape case accused commits 'suicide'". द हिन्दू. 11 March 2013. अभिगमन तिथि 11 March 2013.