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निश्चित विंग विमान

निश्चित विंग विमान (फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट) एक एसी हवाई जहाज है जिस मे विंग (पंख) विमान के शरीर से निश्चित रूप से जुडा हुआ होता है। यह एक व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला विमान है, जिसके कई फायदे हैं।

इतिहास[संपादित करें]

निश्चित विंग (पंख) विमान कि विचारधारा हम लोग लग-बग २८०० साल पहले तक लगा सकते है जब चीन में पहले पतंग बने थे। लेकिन जब राइट ब्रदर्स (वराइट बंधु - ऑरविल[ १९ अगस्त, १८७१ – ३० जनवरी १९४८] और विलबर [१६ अप्रैल, १८६७ – ३० मई, १९१२]) ने १७ दिसंबर १९०३ मे हवाई जहाज का आविष्कारक किया तो इस वैज्ञानिक क्षेत्र मे अनेक बदलाव हुआ।

प्रथम विश्व युद्ध ने इस निश्चित पंख विमान (फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट) को एक हथियार के रूप में उपयोग करने के लिए एक सबूत के रूप में कार्य किया। विमान ने चलने योग्य अवलोकन प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। उन्होंने खुद को दुश्मन को मार गिराने मे अपना महत्वपूर्न योगदान को साबित किया। इसलिए दो विश्व युद्धों के बीच की अवधि को विमानन की स्वर्ण युग कहा जाता है।

विदान / तंत्र[संपादित करें]

एयरफ्रेम, पंख, फ्यूजलेज (बॉडी), इंजन, रडार आदि एक निश्चित विंग विमान के महत्वपूर्ण भाग हैं। विमान की तेज़ गति के कारण उसके पंखों के ऊपर हवा की तेज़ गती (पंखों के आकार के कारण - पंखों के द्वारा गति मिलने पर) से लिफ्ट उत्पन्न होता है, जिस वजह से विमान उडान बरता है। इस तरह कि विमान कि उडने की प्रक्रिया को हम बर्नौली का सिद्धांत (बर्नूली का प्रमेय) से समझ सकते है। बर्नौली का सिद्धांत के अनुसार अगर किसी प्रवाह में, तरल (अथावा वायु) का वेग बढ़ने पर पर तरल (अथावा वायु) की स्थितिज उर्जा में कमी होती है या उस स्थान पर दाब में कमी हो जाती है। इस सिद्धांत के अनुसार जब एक निश्चित विंग (पंख) विमान / हवाई-जहाज तेज़ गति से आगे बडता है तो उसकि पंखों के ऊपर और नीछे हवा कि तेज़ गती बहती है और पंख कि उपर भाग कि क्षेत्र नीछे कि क्षेत्र से ज्यादा होने कि कारण लिफ्ट उत्पन्न होता है, इस लिफ्ट से विमान तेज़ गति से उपर हवा मे उडता है।

अधिकांश निश्चित पंख विमान एक पायलट द्वारा उड़ाए जाते हैं, लेकिन कुछ विशेष रूप से मानव रहित होने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं और एसी निश्चित पंख विमान या तो दूरस्थ रूप से या स्वायत्त रूप से नियंत्रित होते हैं (ऑनबोर्ड कंप्यूटर का उपयोग करके)। निश्चित विंग (पंख) विमान का अद्यायन करने के लिए वायुगतिकी का अद्यायन करना आवश्यक बनता है। वायुगतिकी गतिविज्ञान की वह शाखा है जिसमें वायु तथा अन्य तरलों की गति का और इन तरलों के सापेक्ष गतिवान ठोसों पर लगे बलों का विवेचन होता है। इस शाखा के अद्यायन द्वारा वैज्ञानिक निश्चित विंग (पंख) विमान और अन्य वायुयान को बेहतर बनाने कि कोशिश करते है ।

प्रकार[संपादित करें]

ग्लाइडर

निश्चित विंग (पंख) विमान रोटरी-विंग विमान से अलग होते हैं (जिसमें पंख एक कताई शाफ्ट या "मास्ट" पर जुडा हुआ रोटर बनाते हैं - जो तेज़ गति से गुमता है), और ऑर्निथोपटर से भी अलग होते हैं (जिस के पंख एक पक्षी के समान तरीके से फ़्लैप होते हैं)। एयरबस - ए380, बोइंग-747, ग्लाइडर, पतंग, एयरबस ए320 आदि निश्चित पंख विमान के कुच्छ प्रकार के कुछ उदाहरण हैं।

निश्चित विंग (पंख) विमान अनेक तरह के होते है:

  • विमान :हवा मे उडता है और धरा पर उतर सकता है,
  • जलविमान : जो हवा मे उडता है और पानी पर उतरता है,
  • ग्लाइडर :जो हवा के बल पर ऊपर नीचे जा सकता है बिना किसी इंजन की शक्ति से, मतलब ग्लाइडर फिक्स्ड-विंग विमान हैं जिनमें इंजन नहीं हैं,
  • पैराग्लाइडर, सैन्य (मिलिटरी) ग्लाइडर्स आदि।

सुरक्षा[संपादित करें]

माना जात है कि विमान से यात्रा करना सबसे सुरक्षित होता है, क्योंकी एक हवाई जहाज दुर्घटना की संभावना बहुत कम है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार लोगों के लिये सबसे सुरक्षित और सबसे तेज़ यात्रा, निश्चित विंग विमान (फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट) से ही हैं। इसलिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय, केंद्र सरकार के कहने पर देश के आम नगरिकों के लिये वायुयान कि कीमत कम कर दिया ताकि देश के हर नागरिक निश्चित विंग विमान (फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट) कि यात्रा का अनुभव पा सके।

उपयोग[संपादित करें]

इस विज्ञान के सार्वाधिक महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों में से एक अनुप्रयोग वायुयान की अभिकल्पना है। निश्चित विंग (पंख) विमान की अनेक उपयोग हैं, जैसे कि:

  • 'एंटोनोव -225 मीरिया' विश्व कि सबसे बडा और भारी निश्चित पंख विमान है - जो मिलिटरी और अन्य माल परिवहन करता है।
  • 'एयरबस ए-380' विश्व का सबसे बडा नागरिक विमान कहलाता है।
  • एक जगह से दूसरे जगह जाने मे, वायुयान सबसे कम समय लेता है।
  • आयात और निर्यात निश्चित विंग विमान (फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट) के कारण आसान हो गया है।

इस आदुनिक युग मे विमान अथावा नागरिक विमान मानव को आगे बडने मे, दैनंदिन कामों को तेज रफतार मे करने मे बहुत उपयोग मे आया है। मानव जाति को वैग्यनिक क्षेत्र मे आगे निकलने के लिये यह अत्यवश्यक है। अगर निश्चित विंग विमान का आविश्कार नहि हुआ होता तो हम आज भी एक जगह से दूसरे जगह मे जाने के लिये घटों समय बरबाद करते जब कि अभ हम कुछ ही मिंटो मे देश - विदेश आ-जा सकते है।

संदर्भ[संपादित करें]

https://simple.wikipedia.org/wiki/Fixed-wing_aircraft

https://en.wikipedia.org/wiki/Bernoulli%27s_principle

https://en.wikipedia.org/wiki/Fixed-wing_aircraft

https://en.wikiversity.org/wiki/Fixed-wing_aircraft

https://www.lifeflightmaine.org/Explore-Lifeflight/Fixed-Wing-Aircraft.aspx