सदस्य:Pulkituppal/प्रयोगपृष्ठ/1

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
Durga pooja.jpg

कनया पूजन[संपादित करें]

कंजक पूजा (कन्या पूजा) हिन्दु समुदाय का पवित्र त्यौहार है। यह त्यौहार नवरात्री की आठवी तथा नौवीं तीथि पर मनाया जाता है। इस उत्सव पर नौ लड़कियों मां दुर्गा के नौ रूप की तरह पूजा जाता है। लड़कियों को स्व्य्ं मां दुर्गा का प्रतीक माना जाता है। नौ लड़कियों को घर पर लाकर उनकी पूजा की जाती है। उन नौ लड़कियों के चरण स्पर्श करके धोये जाते है तथा उन्हें विभिन्न प्रकार के पकवान परोसे जाते है। लड़कियों को विभिन्न प्रकार के उपहार भी दिये जाते है। कन्या पूजा स्त्री शक्ति का प्रतीक है। अगर पूजा करनेवाला ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा करता है तो वह ब्राह्मण कन्या की पूजा करता है। अगर शक्ति प्राप्त करने की इच्छा करता है तो वह क्षत्रिया कन्या की पूजा करता है। हिंदुत्व में विश्वास करते हैं की स्त्री लिंग ब्रह्मांड के निर्माता है। धार्मिक बोल में देवी अनिवार्य रूप से महान स्त्री का प्रतीक है। इस पर्व पर गेहूँ के बीज की खेत्री बोयी जाती है और उसकी पूजा की जाती है। कंजक पूजन पर हलवे, पूरी तथा छोलों का प्रसाद बनाया जाता है। इस त्यौहार पर कन्या की पूजा करके ब्रम्हांड को बनाने वाली देवी की पूजा करने के मान्य माना जाता है।

देवीभागवत पुराण के अनुसार कन्या पूजन में केवल दो वर्ष से बड़ी और दस या दस वर्ष से छोटी उमर की कन्याओं को ही शामिल करना चाहिए। दो साल की कन्या कुमारी, तीन साल की त्रिमूर्ति, चार साल की कल्याणी, पांच साल की रोहिणी, छ: साल की कालिका, सात साल की चंडिका, आठ साल की शाम्भवी, नौ साल की दुर्गा और दस साल की कन्या सुभद्रा मानी जाती हैं। कन्या पूजन करते हुए इन देवियों का नाम मन में याद रखना चाहिये।

आम तौर पर इस पर्व पर घर पर कन्याओं को बुला कर उनके चरणो को धोया जाता है अथवा उनको कलावा बांध कर तिलक आदी लगाया जाता है। सभी कन्याओं को प्रसाद का हलवा पूरी आदी परोसा जाता है। कन्याओं से पह्ले घर के सभी लोगों को स्नान आदी करना होता है। सभी प्रकार के भोजन से पेह्ले मां दुर्गा को भोग लगाना होता है। कन्याओं की उमर दस वर्ष या उससे कम होना शुभ माना जाता है।

जब कन्याएं पेट भर कर भोजन कर ले तो उन्हें दक्षिणा में रुपया, सुहाग की वस्तुएं, चुनरी आदि वस्तुएं उपहार में देनी चाहिए। अंत में कन्याओं के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लेकर उन्हें प्रेम पूर्वक विदा करते है। इस दिन हवन करना बेहद आवश्यक माना जाता है और कोशिश करनी चाहिए कि हवन की कुछ आहुतियां कन्याओं के हाथों से डाली जा सके।