सदस्य:Parakhtimessharma

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

हिन्दी उन्नयन को चिंतन में बदलाव जरूरी- डॉ0 शर्मा Published on April 14, 2018

Edit article
View stats

Suresh Sharma Suresh Sharma 23 articles

1

Like 0

Comment 0


उच्चायुक्त मॉरीशस सरकार को सौंपा ज्ञापन

ग्यारहवें विश्व हिन्दी सम्मेलन पर उठी 18 अप्रैली विश्व हिन्दी दिवस आन्दोलन की पहल

नई दिल्ली

सवा अरब की आबादी और सदियों पुरानी सांस्कृतिक समृद्धि के बावजूद हिन्दी की अन्तरराष्ट्रीय प्रतिष्ठापना में मॉरीशस से पीछे होते गये भारत की चिंतन शैली में यदि बदलाव नहीं लाया गया तो वह दिन दूर नहीं जब नागरी उन्नयन के गुर भारतीयों को विदेशों से सीखने पडें़गे।

यह मंथन डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान और मॉरीशस उच्चायोग के संयुक्त तत्वावधान में 18 अप्रैली विश्व हिन्दी दिवसीय ज्ञापन को लेकर शुक्रवार के दिन नई दिल्ली के चाणक्यपुरी क्षेत्र स्थित मॉरिशस उच्च आयोग में अनौपचारिक बैठक के दौरान किया गया।

संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं 18 अप्रैली विश्व हिन्दी दिवस आन्दोलन के सूत्रधार डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने उच्चायुक्त जगदीश्वर गोवरधन की हिन्दी वेदना के समर्थन में आरोप लगाया कि आजादी बाद के अविद्याग्रस्त भारतीय विद्वानों की लापरवाही का यह नतीजा है कि आज हिन्दी के महत्वपूर्ण कार्य विदेशों में हो रहे हैं और भारत में उसके स्वर्णिम इतिहास का सिर्फ शोषण और दुरूपयोग किया जा रहा है। आगे कहा कि हिन्दी की महत्वपूर्ण बोली भोजपुरी भारत में शासकीय पहचान नहीं बना सकी और उस पर मॉरीशस में उन मजदूरों के वंशजों ने वैश्विक महत्व का कार्य किया जिनके पूर्वज भारत से कभी करारबद्ध मजदूरी के लिए श्रीरामचरितमानस लेकर गये थे। कहा कि उन सपूतों के भाषाई प्रेम का यह नतीजा है कि विश्व हिन्दी सचिवालय आज मॉरीशस में है।

डॉ0 शर्मा ने रोष जताया कि दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन की बुनियाद में जिस निम्न स्तर का छल कपट किया गया और मामले को शेरे संसद शशि थरूर की जुबाँ सेे संसद तक पहुँचना पड़ा, उससे नहीं लगता है कि सत्ता पोषित भारत की विद्वत परिषद हिन्दी पर कोई सार्थक पहल कर सकेगी। आगे कहा कि मौजूदा सरकार ने 19वीं सदी के उद्धारकों में एफ0 एस0 ग्राउज, राधाचरण गोस्वामी की स्मारक परियोजनाओं के साथ उपेक्षित व्यवहार किया जिसके चलते न तो ग्राउज की याद में मथुरा में रेल संग्रहालय बन सका और न ही भारत में डाक टिकट पर हिन्दी की पहली जंग छेड़नेवाले वृन्दावनी विद्वान राधाचरण गोस्वामी पर कोई डाक टिकट जारी हो सका। जबकि दोनों परियोजनाओं की जिम्मेदारी एक ही केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के कंधों पर थी। कहा कि एफ0 एस0 ग्राउज और राधाचरण गोस्वामी 19वीं सदी के उस दौर में हिन्दी के उत्थान में लगे हुए थे, जब स्वाधीनता आन्दोलन की अलख जगाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का जन्म भी नहीं हुआ था। बताया कि ग्राउज ने 1883 में श्रीरामचरितमानस के अंग्रेजी अनुवाद से पूर्व ग्रियर्सन की हिन्दुस्तानी का खण्डन करते हुए हिन्दी के संस्कृत मूल से विकसित होने की भविष्यवाणी की थी और आज हिन्दी संस्कृत से विकसित होकर एक लाख से भी अधिक शब्दों की स्वामिनी बन गई है। आगे कहा कि ग्राउज की भविष्यवाणी महात्मा गांधी को भी जंच गई और वह हिन्दी को 1918 में दक्षिण भारत ले गये जिसके सौ वर्षों के लम्बे संघर्ष काल में हिन्दी ने देश ही नहीं बल्कि विदेशों की सीमायें भी लांघ डाली जिसका स्वप्न कभी राधाचरण गोस्वामी ने 1881 की बर्लिन कांफ्रेंस के दौरान देखा था।

इसी क्रम में श्री गोवरर्धन ने बताया कि भारत और मॉरीशस की विलुप्त सांस्कृतिक कडि़यों की तलाश के मद्देनजर बनारस में प्रवासी भारतीय केन्द्र बनाया जायेगा जिसके लिए सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया है।

डॉ0 शर्मा ने बताया कि 18 अप्रैल 1900 के पीछे हिन्दी संघर्ष का वह अछूता अध्याय छिपा है जिसके लिए एफ0 एस0 ग्राउज, आचार्य केशव चन्द्र सेन, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, राधाचरण गोस्वामी समेत भारतरत्न महामना मदनमोहन मालवीय आजीवन संघर्ष करते रहे। फिर जब आजादी के बाद उसे गौरवान्वित होने का अवसर आया तो कांस्टीट्यूअन्ट असेम्बली ने राजभाषा स्वीकृति दिवस 14 सितम्बर को ही राष्ट्रीय हिन्दी दिवस बना दिया। आगे कहा कि एक ही प्रदेश के दो भक्तिमार्गी केन्द्रों से ‘श्रीरामचरितमानस’ और ‘सूरसागर’ जैसे विश्वविख्यात महाकाव्यों को जन्म देने वाली भाषा अपने ही प्रदेश में सरकारी कामकाज के लिए सदियों तक तरसती रही और भेदभाव का मंजर 1877 में उस वक्त चरमोत्कर्ष पर पहुँच गया, जब एक चार्टर के जरिये सूबे के सारे सरकारी कामकाज उर्दू और अंग्रेजी में सुनिश्चित कर दिये गये। फिर जब नागरी संघर्ष का उद्धार ‘भारतरत्न महामना मदनमोहन मालवीय द्वारा प्रतिपादित ‘दा कोर्ट कैरेक्टर्स एण्ड प्राइमरी एजूकेशन इन दा प्रविंसेस ऑफ आगरा एण्ड अवध’ दस्तावेज से हुआ और उसके तीन वर्षों बाद नागरी ने 18 अप्रैल 1900 के दिन पुनर्जीवन की साँस ली तो आजाद भारत की स्वार्थी ताकतों ने फिर उसे हमेशा के लिए गुमनामी में सुला दिया।

डॉ0 शर्मा ने आक्रोश जताया कि नागरी विजय दिवस के 114 वर्षों बाद जब उसे प्रादेशिक, राष्ट्रीय और वैश्विक हिन्दी दिवस घोषित करने का सवाल उठाया गया तो देश के आकाओं के निजी स्वार्थ टकराने लगे। नतीजन दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में उठने वाली माँग व्यापमं, ललित मोदी के जख्म भरने में खत्म हो गई। मगर जब दवा काम नहीं आई और जख्म नासूर बनने लगा तो 10 जनवरी का अनचाहा मरहम ईजाद कर लिया गया। आगे कहा कि राजनीतिक दलों ने भी स्टीलिंग, एक्सप्लाइटिंग एण्ड मिसयूजिंग के संक्षिप्तांश ‘सेम’ अनूदित महामना स्मारक परियोजना की चोरी शोषण एवं दुरूपयोग की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए मामले को राजनीतिक मुद्दा बना लिया और समाजवादी पार्टी ने प्रकरण को चिंतन सभा का मुद्दा बनाते हुए मुद्दे की अगुआई में अपने नेता शिवपाल यादव को 10 मार्च के दिन मॉरीशस भेजा। जबकि उसी पार्टी के राज्य सभा सांसद विशम्भर निषाद विश्व हिन्दी दिवस पर संसदीय सवाल उठाने का आश्वासन देने के बावजूद वायदे से मुकर चुके थे। कहा कि राजनारायण और स्वामी सहजानन्द के आदर्शों पर चलते हुए जहानाबाद सांसद डॉ0 अरूण कुमार भी बहती गंगा में हाथ धोने से नहीं चूके और संसद में सवाल उठाने के नाम पर पीडि़त से हथियाया रिकार्ड लेकर 10 जनवरीय विश्व हिन्दी दिवस के सूत्रधार बन बैठे जिसके विरोध में ंसंसद मार्ग पर पुनः प्रदर्शन किया गया।

डॉ0 शर्मा ने क्षोभ जताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ भी मनमाने दिवस घोषित कर जनाधारित इतिहास की अनदेखी करता रहा है। अतएव उसे हेरिटेज के साथ हिन्दी को संयुक्त कर सार्थक पहल करने की नसीहत देनी होगी। चेतावनी दी कि यदि संघ ने 18 अप्रैल को विश्व हिन्दी दिवस नहीं किया तो उसके खिलाफ भी आन्दोलन चलाया जायेगा।


हिन्दी उन्नयन को चिंतन में बदलाव जरूरी- डॉ0 शर्मा https://www.linkedin.com/pulse/%E0%A4%B9%E0%A4%A8%E0%A4%A6-%E0%A4%89%E0%A4%A8%E0%A4%A8%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%95-%E0%A4%9A%E0%A4%A4%E0%A4%A8-%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A4%B5-%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A4%B0-%E0%A4%A10-%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A4%AE-suresh-sharma/?published=t हिन्दी उन्नयन को चिंतन में बदलाव जरूरी- डॉ0 शर्मा https://parakhtimes.wordpress.com/2018/04/14/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%89%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87/


हिन्दी उन्नयन को चिंतन में बदलाव जरूरी- डॉ0 शर्मा https://drrcsharmamemorialresearchwelfareinstitute.wordpress.com/2018/04/14/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%89%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87/